DA/DR: 50 लाख केंद्रीय कर्मियों व 69 लाख पेंशनरों का महंगाई भत्ता नहीं रोक सकती सरकार, सड़क पर उतरा संघ
केंद्र के 50 लाख कर्मचारी और 69 लाख पेंशनर डीए/डीआर बढ़ोतरी का इंतजार कर रहे हैं। देरी से नाराज संगठनों ने प्रदर्शन किया, चेताया जल्द घोषणा नहीं हुई तो आंदोलन तेज होगा, दर 60% पार संभव।
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केंद्र सरकार के 50 लाख कर्मचारी और 69 लाख पेंशनर, एक जनवरी 2026 से महंगाई भत्ते/महंगाई राहत की दरों में बढ़ोतरी होने का इंतजार कर रहे हैं। आमतौर पर होली से पहले इन भत्तों की दरों में वृद्धि किए जाने की परंपरा रही है, लेकिन इस बार अप्रैल के तीसरे सप्ताह में भी यह घोषणा नहीं हो सकी है। इन भत्तों को अविलंब जारी कराने के लिए गुरुवार को केंद्रीय कर्मचारी संगठन 'कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स' सड़कों पर उतरा है। कर्मचारियों ने सरकार को चेताया है कि डीए/डीआर की दरों में बढ़ोतरी को घोषणा को ठंडे बस्ते में न डाला जाए। अब बिना किसी देरी के यह घोषणा नहीं हुई तो सरकार को कर्मचारी संगठनों का विरोध झेलना पड़ेगा।
'पश्चिम एशिया संकट' तो जिम्मेदार नहीं
बता दें कि केंद्रीय कर्मियों की नजर, बुधवार को होने वाली कैबिनेट ब्रीफिंग पर रहती है। पिछले सप्ताह कैबिनेट ब्रीफिंग तो हुई, मगर महंगाई भत्ते को लेकर कोई घोषणा नहीं की गई। इसके बाद केंद्रीय कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों को यह आशंका हुई कि डीए/डीआर की घोषणा टलने के पीछे क्या 'पश्चिम एशिया संकट' तो जिम्मेदार नहीं है। केंद्रीय कर्मियों के बीच यह चर्चा शुरु हो गई कि कोरोनाकाल की तरह क्या फिर से डीए/डीआर फ्रीज हो जाएगा। 'कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स' ने डीए/डीआर में बढ़ोतरी की घोषणा को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखा। 'कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स' के अध्यक्ष एसबी यादव ने कहा, अभी तक मार्च में यह घोषणा होती रही है। अप्रैल के पहले सप्ताह में तीन माह का एरियर मिल जाता था। इस बार केंद्र सरकार डीए/डीआर बढ़ोतरी को लेकर मौन है।
कैबिनेट सचिव को दिया था प्रदर्शन का नोटिस
कॉन्फेडरेशन के अध्यक्ष एसबी यादव ने बताया कि गुरुवार को हुए प्रदर्शन को लेकर 14 अप्रैल को कैबिनेट सचिव को एक पत्र के माध्यम से सूचित किया गया था। केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर, इस बात को लेकर चिंतित हैं कि क्या इस बार सरकार, डीए/डीआर को फ्रीज करना चाहती है। यह राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन भोजन अवकाश के समय किया गया है। इसके जरिए सरकार को चेताया गया है कि बिना किसी देरी के डीए व डीआर की घोषणा नहीं करती है तो कर्मचारी, विशाल प्रदर्शन के लिए सड़क पर उतरने से गुरेज नहीं करेंगे।
डीए/डीआर की दर 58 पर पहुंच गई थी
केंद्र सरकार ने एक जुलाई 2025 से अपने कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते एवं महंगाई राहत में तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद डीए/डीआर की दर 58 पर पहुंच गई थी। अब एक जनवरी 2026 से डीए/डीआर की दरों में बढ़ोतरी होनी है। फिलहाल अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (औद्योगिक श्रमिक) की रिपोर्ट, डीए की दरों में दो से तीन फीसदी की वृद्धि होने के संकेत दे रही है। जुलाई 2025 में सूचकांक 146.5, अगस्त में 147.1, सितंबर में 147.3, अक्टूबर में 147.7, नवंबर में 148.2 और दिसंबर में भी 148.2 पर संकलित हुआ है। ऐसे में महंगाई भत्ते/महंगाई राहत की दर 60 के पार हो सकती है।
भत्तों में देरी की क्या वजह है
ऑल इंडिया एनपीएस एम्पलाइज फेडरेशन एवं नेशनल मिशन फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम भारत' के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने भी बृहस्पतिवार को वित्त मंत्री को पत्र लिखा था। उसमें कहा गया कि डेढ़ दशक से इन भत्तों में होली के आसपास वृद्धि होती रही है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ, जब यह घोषणा करने में इतनी देर हुई हो। क्या सरकार, 'पश्चिम एशिया संकट' के चलते कहीं इन भत्तों पर रोक लगाना चाहती है। अगर सरकार की नीयत साफ है तो तुरंत इस बाबत स्पष्टीकरण देना चाहिए। कर्मचारियों को यह बताया जाए कि भत्तों में देरी की क्या वजह है और कब तक इनकी घोषणा संभव है। पटेल ने कहा, अभी कॉन्फेडरेशन ने इस बाबत प्रदर्शन किया है। अगर सरकार ने इसके बाद डीए/डीआर की घोषणा नहीं की तो ऑल इंडिया एनपीएस एम्पलाइज फेडरेशन भी सड़कों पर उतरेगा।

कोरोनकाल में रोकी गई थी तीन किस्तें
केंद्र सरकार ने कोरोनाकाल के दौरान जनवरी 2020 से जून 2021 तक 18 महीने का महंगाई भत्ते और महंगाई राहत की तीन किस्तें रोक ली थी। उस वक्त सरकार ने आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने की बात कही थी। स्टाफ साइड की राष्ट्रीय परिषद (जेसीएम) के सदस्य सी.श्रीकुमार का कहना है कि कोरोनाकाल में सरकार ने कर्मियों के 11 फीसदी डीए का भुगतान रोक कर 34,402.32 करोड़ रुपये बचा लिए थे। डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने बताया, डीए/डीआर की दर जब 50 फीसदी के पार हो जाती है तो नियमानुसार डीए/डीआर को मूल वेतन और पेंशन में विलय कर दिया जाता है। सरकार ने इस विलय से इनकार कर दिया है। पिछले दो साल से दस प्रतिशत के हिसाब से कर्मचारियों का वेतन हड़पा जा रहा है। पेंशन भी हड़पी जा रही है। आठवें वेतन आयोग के लागू होने की उम्मीद दो साल बाद ही कर सकते हैं। ऐसे में चार साल तक कर्मियों को हर माह दस प्रतिशत वेतन का नुकसान उठाना पड़ेगा। अब सरकार कह रही है कि डीए का मूल वेतन में विलय नहीं करेंगे।
