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किस पार्टी में महिलाओं का कितना प्रतिनिधित्व: चुनाव लड़ने का प्रतिशत क्या, किस दल में इनकी कितनी हिस्सेदारी?
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: Kirtivardhan Mishra
Updated Thu, 16 Apr 2026 08:07 PM IST
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सार
संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार गुरुवार को लोकसभा में नारी शक्ति वंदन विधेयक, 2026 लेकर आई है। इस विधेयक के पारित होने को लेकर कई पेच हैं। इस बीच यह जानना अहम है कि जिस सदन में यह विधेयक लाया गया है, वहां मौजूदा समय में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के आंकड़े क्या हैं और इस मामले में विधानसभाओं की क्या स्थिति है। आइये जानते हैं...
नारी शक्ति वंदन विधेयक पेश, जानें महिला प्रतिनिधित्व की सच्चाई।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भारत में महिला आरक्षण विधेयक इस वक्त चर्चा में है। दरअसल, केंद्र की मोदी सरकार ने गुरुवार (16 अप्रैल) को लोकसभा में नारी शक्ति वंदन विधेयक, 2026 पेश कर दिया। इस पर दो दिन चर्चा होगी। साथ ही दो और विधेयकों को इसके साथ ही पटल पर रखा गया है। इसमें एक विधेयक महिला आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन से जुड़ा है, ताकि 2029 के चुनाव से पहले ही लोकसभा का संख्याबल 543 से बढ़ाकर 850 तक किया जा सके और महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू कर उन्हें सदन में जगह दी जा सके। लोकसभा में होने वाली यह प्रक्रिया कुछ समय बाद ही राज्य की विधानसभाओं में भी दोहराई जाएगी, जिससे राज्यों में सीटों को बढ़ाया जा सकेगा।
इस बीच यह जानना अहम है कि जिस नारी शक्ति को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच सदन में चर्चा चल रही है, उस नारी शक्ति को असल मायनों में किस पार्टी ने कितने जोर-शोर से मौका दिया है? अलग-अलग दलों की तरफ से अभी महिलाओं को कितना प्रतिनिधित्व सौंपा गया है? विपक्ष का इसमें क्या हाल है? आइये जानते हैं...
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इस बीच यह जानना अहम है कि जिस नारी शक्ति को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच सदन में चर्चा चल रही है, उस नारी शक्ति को असल मायनों में किस पार्टी ने कितने जोर-शोर से मौका दिया है? अलग-अलग दलों की तरफ से अभी महिलाओं को कितना प्रतिनिधित्व सौंपा गया है? विपक्ष का इसमें क्या हाल है? आइये जानते हैं...
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पहले जानें- लोकसभा में किस पार्टी की तरफ से महिलाओं को कितना प्रतिनिधित्व?
वर्तमान 18वीं लोकसभा में कुल 543 सांसदों में से 75 महिला सांसद (लगभग 14%) चुनकर आई हैं। आंकड़ों के लिहाज से देखा जाए तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सबसे ज्यादा 31 महिला सांसद हैं। दूसरा नंबर कांग्रेस का है, जिसकी 13 महिला सांसद हैं। इसके बाद नंबर आता है कि तृणमूल कांग्रेस का, जिसकी 11 महिला सांसद सदन में हैं।अनुपात में जानें किस पार्टी से कितनी महिलाओं का प्रतिनिधित्व
हालांकि, सिर्फ आंकड़ों से ज्यादा इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि पार्टियों ने अपनी कुल भागीदारी में से कितनी महिलाओं को मौका दिया। अगर अनुपात के लिहाज से देखा जाए तो इन सबसे ज्यादा महिला सांसद तृणमूल कांग्रेस से हैं। वहीं, भाजपा इस मामले में सबसे पिछड़ी पार्टियों में से है।
2024 के लोकसभा चुनाव में केवल मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों की महिला उम्मीदवारों ने ही जीत दर्ज की है; किसी भी निर्दलीय महिला उम्मीदवार या गैर-मान्यता प्राप्त दल की महिला उम्मीदवार को जीत नहीं मिली।
एक और गौर करने वाली बात यह है कि जिस तरह का मौजूदा समय में लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व है, वह कई बड़े लोकतंत्रों के मुकाबले काफी पीछे है। जहां दक्षिण अफ्रीका में 46 फीसदी सांसद महिलाएं हैं, वहीं ब्रिटेन में 40-41 फीसदी महिला सांसद हैं। अमेरिका के दोनों सदनों में 25 फीसदी से ज्यादा महिला सांसद हैं।
एक और गौर करने वाली बात यह है कि जिस तरह का मौजूदा समय में लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व है, वह कई बड़े लोकतंत्रों के मुकाबले काफी पीछे है। जहां दक्षिण अफ्रीका में 46 फीसदी सांसद महिलाएं हैं, वहीं ब्रिटेन में 40-41 फीसदी महिला सांसद हैं। अमेरिका के दोनों सदनों में 25 फीसदी से ज्यादा महिला सांसद हैं।
अब जानें- विधानसभाओं और लोकसभा को मिलाकर महिलाओं के प्रतिनिधित्व की क्या स्थिति?
1. लोकसभा में महिलाओं की उम्मीदवारी कितनी
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्मस (एडीआर) की तरफ से लोकसभा चुनाव के दौरान उम्मीदवारों का जो विश्लेषण किया गया था, उसके मुताबिक 2024 में कुल 8,360 उम्मीदवार चुनाव में खड़े हुए थे। इनमें से महज 800 महिलाएं थीं। यानी कुल 9.60 फीसदी।। इतना ही नहीं 543 लोकसभा सीटों में से 152 यानी करीब 28 फीसदी सीटों पर एक भी महिला प्रत्याशी के तौर पर नहीं उतरी। राष्ट्रीय दलों में भाजपा ने 16 फीसदी महिलाओं को टिकट दिया। इसके बाद कांग्रेस और माकपा (13-13%) और बसपा आठ फीसदी का स्थान रहा। आम आदमी पार्टी ने एक भी महिला उम्मीदवार को मौका नहीं दिया था।
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2. विधानसभाओं में महिलाओं की उम्मीदवारी के आंकड़े
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की 2026 में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, देश भर की वर्तमान राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) की विधानसभाओं में महिलाओं की उम्मीदवारी 10 फीसदी के करीब रही। इन राज्यों के कुल 43,348 उम्मीदवारों में से केवल 4,295 (10%) महिला उम्मीदवार थीं।
देश भर के 4,123 विधानसभा क्षेत्रों में से 1,698 (41%) निर्वाचन क्षेत्रों में एक भी महिला उम्मीदवार ने चुनाव नहीं लड़ा। किसी भी राज्य में महिला उम्मीदवारों का प्रतिशत 15% से ज्याद नहीं रहा। सबसे अधिक महिला उम्मीदवारों का प्रतिशत दिल्ली (14%), ओडिशा (14%) और छत्तीसगढ़ (13%) में देखा गया। इसके अलावा उत्तर प्रदेश और त्रिपुरा में भी यह प्रतिशत क्रमशः 13% और 12% रहा। सबसे कम महिला उम्मीदवारों की हिस्सेदारी नगालैंड (2%), अरुणाचल प्रदेश (5%) और जम्मू-कश्मीर (5%) में रही।
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की 2026 में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, देश भर की वर्तमान राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) की विधानसभाओं में महिलाओं की उम्मीदवारी 10 फीसदी के करीब रही। इन राज्यों के कुल 43,348 उम्मीदवारों में से केवल 4,295 (10%) महिला उम्मीदवार थीं।
देश भर के 4,123 विधानसभा क्षेत्रों में से 1,698 (41%) निर्वाचन क्षेत्रों में एक भी महिला उम्मीदवार ने चुनाव नहीं लड़ा। किसी भी राज्य में महिला उम्मीदवारों का प्रतिशत 15% से ज्याद नहीं रहा। सबसे अधिक महिला उम्मीदवारों का प्रतिशत दिल्ली (14%), ओडिशा (14%) और छत्तीसगढ़ (13%) में देखा गया। इसके अलावा उत्तर प्रदेश और त्रिपुरा में भी यह प्रतिशत क्रमशः 13% और 12% रहा। सबसे कम महिला उम्मीदवारों की हिस्सेदारी नगालैंड (2%), अरुणाचल प्रदेश (5%) और जम्मू-कश्मीर (5%) में रही।
