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Women Reservation Bill: प्रियंका बोलीं- महिला आरक्षण की बात सबसे पहले कांग्रेस ने की, तब BJP ने विरोध किया था
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: Rahul Kumar
Updated Thu, 16 Apr 2026 05:55 PM IST
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सार
लोकसभा में महिला आरक्षण को लेकर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि देश में महिला आरक्षण की शुरुआत कांग्रेस ने ही की थी। उन्होंने चर्चा के दौरान कराची अधिवेशन का जिक्र करते हुए कहा, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ये प्रस्ताव लेकर आए थे लेकिन उस वक्त भाजपा ने ही इसका विरोध किया था। बता दें कि प्रियंका गांधी से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर अपनी बात सदन के सामने रखी थी।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी।
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
महिला आरक्षण को लेकर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा, सबसे पहले महिला आरक्षण की बात कांग्रेस ने की थी। उन्होंने कहा कि कराची अधिवेशन में इस पर प्रस्ताव पास किया था। उन्होंने कहा कि उस वक्त राजीव गांधी ने ये प्रस्ताव पास किया था और उस समय बीजेपी ने इसका विरोध किया था। प्रियंका गांधी ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस पर चर्चा की लेकिन ये नहीं बताया कि उस समय इसका विरोध किसने किया था।
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'जब तक जातिगत जनगणना नहीं होगी, सभी वर्गों को उचित हिस्सा नहीं मिल सकता'
कांग्रेस सांसद ने कहा कि महिला आरक्षण 2029 तक लागू होना चाहिए। हम सहमत हैं। इसे लागू करने के लिए सीटों की संख्या 50 फीसदी बढ़ानी पड़ेगी और 850 कर दी जाएगी। इसके लिए परिसीमन आयोग बनाया जाएगा, जो सीटों को बढ़ाने के लिए काम करेगा। राजनीतिक की बू, जिसका जिक्र पीएम ने किया वह इसमें पूरी तरह मिली हुई है। 2023 में जो विधेयक पारित कराया गया था, उसमें दो चीजें थीं, जो इसमें नहीं हैं। उसमें नई जनगणना और परिसीमन का जिक्र था। अब क्या हो गया। मन बदल गया। पुराने आंकड़ों के आधार पर क्यों आगे बढ़ना चाह रही सरकार। जल्दबाजी क्यों। जब तक जातिगत जनगणना नहीं होगी, सभी वर्गों को उचित हिस्सा नहीं मिल सकता है।
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प्रियंका ने ओबीसी की अनदेखी का लगाया आरोप
प्रियंका गांधी बोलीं, पीएम ने हल्के में बोल दिया कि इस वर्ग और उस वर्ग के बारे में बाद में देखेंगे। ये हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह बड़ी संख्या है। यह पूरे वर्ग का संघर्ष है। इसे तकनीकी मुद्दा बताकर पल्ला झाड़ लिया। हम इनकी जरूरतों को आगे कर रहे हैं। हम उनका हक मांग रहे हैं। पीएम ने इसे तकनीकी मुद्दा बता दिया। वे किस बात से घबरा रहे हैं। उन्हें लग रहा है कि जब जातीय जनगणना होगी तो उन्हें पता चलेगा कि ओबीसी वर्ग कितना बडा है और इसका हक कोई नकार नहीं पाएगा। पीएम इस विधेयक के जरिए ओबीसी वर्ग का हक छीनना चाहते हैं।
कांग्रेस सांसद बोलीं- इस देश को किसी एक का हक छीन कर नहीं चलाया जा सकता। इसमे संसद का 50 फीसदी विस्तार बताया गया है। लेकिन परिवर्तन के नियम के बारे में पूरे विधेयक में कोई शर्त नहीं है। 1971 की जनगणना के आधार पर परिसीमन पर रोक लगाई गई थी। अब इसे पूरी तरह बदलने की कोशिश की जा रही है। इस बड़े परिवर्तन के लिए भारत में पूरी प्रक्रिया बनी हुई है, लेकिन वे इस प्रक्रिया का पालन नहीं करना चाहते।
प्रियंका गांधी ने आगे कहा, कुछ प्रदेशों की ताकत कम कर के लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाकर अपनी पार्टी की मजबूती तय की जा रही है। इन्होंने पूरी योजना बना ली है। अचानक प्रदेश में चुनाव के दौरान बैठक बुलाओ, कोई सर्वदलीय बैठक न करो। विधेयक का प्रारूप एक दिन पहले ही जारी करो। मीडिया में चर्चा शुरू कराओ। बेचारे मोदीजी इतना बड़ा कदम उठाने वाले हैं ऐसी बातें चलाई जाती हैं। यह कर कर के विपक्ष को धर्मसंकट में डालने की कोशिश की जाती है। एक तरफ महिला आरक्षण लाना और दूसरी तरफ काट पीट करने की स्वतंत्रता, पूरे ढांचे को बदलने की स्वतंत्रता और ओबीसी वर्ग के हक को खत्म करने की स्वतंत्रता हासिल करना। यह सत्ता बनाए रखने का एक कमजोर बहाना है।
ये भी पढ़ें: अमित शाह का विपक्ष को दो टूक जवाब: 'दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ेगी', परिसीमन को लेकर फैलाया जा रहा भ्रम
कांग्रेस सांसद ने कहा कि सरकार मौजूदा 543 सीटों में ही 33 फीसदी आरक्षण का एलान क्यों नहीं कर देती। इससे आपका काम भी हो जाएगा और काला टीका (विपक्ष का विरोध) भी काम आ जाएगा। मैं प्रधानमंत्री महोदय जी को कहना चाहती हूं कि अगर वे ईमानदारी से इस कदम को उठाते तो पूरा सदन उनके साथ खड़े होकर इसका समर्थन करता। प्रधानमंत्री जी अगर महिलाओं का सम्मान करते हैं तो उनका राजनीतिक इस्तेमाल न करें। हम आपके तीनों विधेयकों का सख्त विरोध करते हैं, लेकिन अब भी आप ऐसा निर्णय ले सकते हैं, जो सर्वसम्मति से सदन में पारित हो जाएगा और हमारी नारी शक्ति को ज्यादा प्रतिनिधित्व मिल जाएगा।
प्रियंका के सवालों पर अमित शाह का जवाब
प्रियंका गांधी के सवालों का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि कुछ चीजें ऐसी यहां कही गई हैं, जिन्हें स्पष्ट करना जरूरी है, ताकि जनता के मन में आज रात तक कोई भ्रम न रह जाए। एक नैरेटिव खड़ा किया जा रहा है कि यह जो तीन विधेयक हैं, वो आने से दक्षिण की क्षमता लोकसभा में बहुत कम हो जाएगी। हमारे दक्षिण के राज्यों को बहुत बड़ा नुकसान होगा।
शाह ने समझाया परिसीमन का गणित
अमित शाह ने कहा कि सदन में 543 सांसद हैं। कर्नाटक के करीब 15 फीसदी सांसद यहां आते हैं। संविधान संशोधन के बाद कर्नाटक के सांसदों की संख्या 28 से होकर 42 हो जाएगी। आंध्र प्रदेश की अभी 25 सीटें हैं और उसका प्रतिनिधित्व 4.60% है। उसकी सीटें हो जाएंगी 38 और हिस्सेदारी 4.65 फीसदी हो जाएगी। तेलंगाना के सांसदों की मौजूदगी 3.13 फीसदी है, उनकी हिस्सेदारी 3.18 फीसदी है। मैं कह रहा हूं कि आपकी शक्ति कम नहीं होगी, बल्कि बढ़ जाएगी। अभी तमिलनाडु की हिस्सेदारी है 7.18 फीसदी है, वह बढ़कर हो जाएगी 7.23 फीसदी। केरल की हिस्सेदारी 3.68 की जगह 3.67 फीसदी हो जाएगी। ये जो दक्षिण का नैरेटिव है, 543 में से 129 सांसद दक्षिण के सांसद सदन में बैठते हैं। 23. 76 फीसदी उनकी हिस्सेदारी है। आगे 150 सांसद बैठेंगे और 23.97 फीसदी सांसद यहां बैठेंगे।
