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ED: डीएवी कॉलेज में एससी/एसटी/पिछड़ा वर्ग के छात्रों की छात्रवृत्ति में गबन, 2.27 करोड़ के लिए बदला बैंक खाता

डिजिटल ब्यूरो ,अमर उजाला Published by: Asmita Tripathi Updated Wed, 03 Jun 2026 05:51 PM IST
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सार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), देहरादून ने डीएवी (पीजी) कॉलेज छात्रवृत्ति घोटाले के संबंध में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत आरोपी पीयूष चंद्र भटनागर और रंजना रावत के खिलाफ विशेष न्यायालय (पीएमएलए), देहरादून के समक्ष अभियोग शिकायत (पीसी) दर्ज की है।

DAV College embezzled scholarships meant for SC/ST/OBC students, altered bank accounts extract Rs 2.27 crore
ED - फोटो : ED
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विस्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), देहरादून ने डीएवी (पीजी) कॉलेज छात्रवृत्ति घोटाले के संबंध में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत आरोपी पीयूष चंद्र भटनागर और रंजना रावत के खिलाफ विशेष न्यायालय (पीएमएलए), देहरादून के समक्ष अभियोग शिकायत (पीसी) दर्ज की है। डीएवी कॉलेज में एससी/एसटी/पिछड़ा वर्ग के छात्रों की छात्रवृत्ति में गबन किया गया था। आरोपियों ने 2.27 करोड़ रुपये उड़ाने के लिए बैंक खाता तक बदल दिया।  



अनाधिकृत बैंक खाते के जरिए हुआ गबन ... 
ईडी ने उत्तराखंड पुलिस द्वारा आईपीसी, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की है। एफआईआर एवं चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि देना बैंक में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति निधि का पैसा जमा था। आरोपियों ने एक अनाधिकृत बैंक खाते के माध्यम से छात्रवृत्ति निधि का धोखाधड़ी से गबन और दुरुपयोग किया। जांच में पता चला कि उक्त खाते में 2009 से 2014 की अवधि के दौरान छात्रवृत्ति निधि, डीएवी कॉलेज खातों से हस्तांतरण और ब्याज के रूप में लगभग 2.27 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे। 
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धोखाधड़ी से बदला गया बैंक शाखा का नाम ...  
पीएमएलए के तहत की गई जांच में पता चला कि डीएवी (पीजी) कॉलेज की प्रबंध समिति ने देना बैंक, लक्ष्मी रोड शाखा में एक बैंक खाता खोलने की मंजूरी दे दी थी, लेकिन शाखा का नाम धोखाधड़ी से बदल दिया गया। डीएवी (पीजी) कॉलेज के कर्मचारी पीयूष चंद्र भटनागर और उनके साथियों ने देना बैंक, जीएमएस रोड शाखा में एक अनाधिकृत बैंक खाता खोल लिया। कॉलेज में छात्रवृत्ति प्रभारी/सहायक क्लर्क (बाद में कार्यालय अधीक्षक) के रूप में कार्यरत पीयूष चंद्र भटनागर ने अपराध की आय के सृजन, छिपाव, कब्जे और उपयोग में केंद्रीय भूमिका निभाई। 
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खुद को खाता संचालक के रूप में शामिल किया ...  
पीयूष चंद्र ने धोखाधड़ी से बैंक खाता खोलने की प्रक्रिया में हेरफेर किया। खुद को खाता संचालक के रूप में शामिल किया। अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए निर्धारित छात्रवृत्ति निधि को व्यवस्थित रूप से स्थानांतरित कर दिया। जांच में यह भी पता चला कि अनाधिकृत खाते में जमा की गई कुल धनराशि में से 42.50 लाख रुपये नकद निकाले गए। इसके बाद 66.50 लाख रुपये विभिन्न व्यक्तियों के नाम पर जारी किए गए। यह राशि चेक के माध्यम से निकाली गई। पीयूष चंद्र भटनागर के कई निजी बैंक खातों में 99.43 लाख रुपये स्थानांतरित किए गए। किसी को शक न हो, इसके लिए उक्त धनराशि को कई बैंक खातों के माध्यम से अलग-अलग तरीकों से इस्तेमाल किया गया। इसका उपयोग स्वयं और परिवार के सदस्यों के नाम पर बीमा प्रीमियम के भुगतान, नकद निकासी, अंतर-खाता हस्तांतरण और अन्य व्यक्तिगत उपयोगों के लिए किया गया।

हस्ताक्षरकर्ता रंजना रावत ने निभाई अहम भूमिका ... 
डीएवी (पीजी) कॉलेज की छात्रवृत्ति समन्वयक और बैंक खातों की अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता रंजना रावत ने अपराध की आय अर्जित करने और उसे मनी लॉन्ड्रिंग करने में सहायक भूमिका निभाई। उन्होंने देना बैंक खातों से संबंधित कई खाली चेकों पर हस्ताक्षर करने की बात स्वीकार की। इन चेकों का उपयोग बाद में छात्रवृत्ति निधि की निकासी और हेराफेरी के लिए किया गया। जांच में पता चला कि हस्ताक्षरित चेकों के माध्यम से अनधिकृत वित्तीय लेनदेन किए गए। आरोपियों ने विभिन्न लाभार्थियों और बैंक खातों के माध्यम से अपराध की आय को इधर उधर किया।  

परिवार के सदस्यों के नाम पर बीमा पॉलिसी ... 
ईडी की जांच में यह भी स्थापित हुआ है कि अपराध की आय का कुछ हिस्सा पीयूष चंद्र भटनागर और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर बीमा पॉलिसियों, बैंक बैलेंस और एक होंडा एक्टिवा एच-स्मार्ट (125 सीसी) वाहन के रूप में चल संपत्तियों में परिवर्तित किया गया था। इसके बाद 27 मई को ईडी ने 7.86 लाख रुपये मूल्य की चल संपत्तियों को अनंतिम रूप से कुर्क किया था। जांच के दौरान जुटाए गए सबूतों में बैंक रिकॉर्ड, दस्तावेजी सबूत और पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज बयान शामिल हैं। ईडी ने पीएमएलए, 2002 की धारा 3 और 4 के तहत मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध के लिए विशेष न्यायालय (पीएमएलए), देहरादून के समक्ष अभियोजन शिकायत दायर की है।

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