12:15 PM, 03-Jun-2026
सीएम शुभेंदु बोले- जालसाजी करने वाले किसी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा
इस राजनीतिक विवाद के बीच सीएम शुभेंदु अधिकारी ने भी टीएमसी नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कथित फर्जी हस्ताक्षर और आंतरिक पत्राचार विवाद को लेकर कहा कि मामले में कानून अपना काम करेगा और हस्ताक्षर जालसाजी करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
शुभेंदु अधिकारी ने घटनाक्रम का विवरण देते हुए बताया कि 9 मई को टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता, नयना बंद्योपाध्याय और असीमा पात्रा को उपनेता तथा फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक नियुक्त करने का प्रस्ताव दिया था। इसके बाद 20 मई को 70 हस्ताक्षरों वाला एक और पत्र भेजा गया। हालांकि, विवाद तब बढ़ गया जब टीएमसी विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने औपचारिक शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया कि विधायक दल की ओर से ऐसा कोई प्रस्ताव पारित ही नहीं किया गया था।
विधानसभा अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद हेयर स्ट्रीट थाने में एफआईआर दर्ज की गई और मामले की जांच बाद में सीआईडी को सौंप दी गई। सीएम शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि सीआईडी ने पत्र में शामिल विधायकों के हस्ताक्षर नमूने जुटाने शुरू कर दिए हैं। उनके अनुसार, टीएमसी के तीन विधायक बहारुल इस्लाम, अरूप रॉय और सुभाशीष दास ने सीआईडी के सामने स्वीकार किया है कि उन्होंने संबंधित दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किए थे।
12:12 PM, 03-Jun-2026
क्या बोले बागी विधायक
बुधवार को कथित बागी गुट के कई नेताओं ने दावा किया कि उन्हें टीएमसी के 80 में से अधिकतर विधायकों का समर्थन हासिल है। बागी नेताओं ने विधानसभा में विपक्ष के नेता (एलओपी) के रूप में शोभनदेब चट्टोपाध्याय की नियुक्ति पर आपत्ति जताई है। इस मुद्दे पर टीएमसी विधायक मुस्तफिजुर रहमान ने पत्रकारों से कहा, 'हमें सटीक संख्या नहीं पता, लेकिन बाहर से सुनने में आ रहा है कि 59 हस्ताक्षर प्राप्त हो चुके हैं। मैंने भी हस्ताक्षर किए हैं।' वहीं, टीएमसी विधायक प्रिया पॉल ने इस मामले पर फिलहाल खुलकर कुछ कहने से बचते हुए कहा, 'मैं विधानसभा के अंदर जा रही हूं। बैठक के बाद इस बारे में बताऊंगी।'
11:58 AM, 03-Jun-2026
एक फर्जी हस्ताक्षर कांड से शुरू हुई टीएमसी में बगावत
यह पूरा विवाद उस पत्र को लेकर शुरू हुआ, जिसे टीएमसी ने विधानसभा सचिवालय को सौंपा था। इस पत्र में शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष बनाने के समर्थन में करीब 70 विधायकों के हस्ताक्षर थे। हालांकि पार्टी के निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने आरोप लगाया कि समर्थन पत्र में उनके हस्ताक्षर फर्जी हैं। इनके अलावा कई और विधायकों के हस्ताक्षर भी संदिग्ध पाए गए। इसके बाद पार्टी ने ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निष्कासित कर दिया।
विधानसभा सचिवालय की शिकायत में कहा गया कि टीएमसी नेता नैना बनर्जी के हस्ताक्षर सबसे ज्यादा संदिग्ध पाए गए। शपथ लेने के समय किए गए उनके हस्ताक्षर और समर्थन पत्र में मौजूद हस्ताक्षर अलग बताए गए। इसके बाद सीआईडी ने जांच शुरू की और कई विधायकों से पूछताछ की। इनमें नैना बनर्जी, चंद्रनाथ सिन्हा, कुनाल घोष और बहरुल इस्लाम जैसे नेता शामिल हैं।
11:40 AM, 03-Jun-2026
ममता बनर्जी की बैठकों से दूरी बनाए हुए थे कई विधायक
हालिया बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने 80 सीटों पर जीत दर्ज की थी। हालांकि अब इनमें से तीन चौथाई विधायक यानी 59 टूट सकते हैं। कई विधायकों ने टीएमसी की बैठकों से भी दूरी बनाई हुई थी। साथ ही पूर्व सीएम और पार्टी की मुखिया ममता बनर्जी द्वारा किए जा रहे धरना प्रदर्शनों से भी कई विधायक नदारद थे। इसके बाद से ही पार्टी में टूट की खबरें आनी शुरू हो गईं थी। हालांकि टीएमसी ने टूट की खबरों को खारिज किया था।
11:27 AM, 03-Jun-2026
West Bengal: क्या तृणमूल कांग्रेस में टूट तय? बागी गुट को 59 विधायकों का समर्थन मिलने का दावा
टीएमसी के कई अन्य विधायक भी विधानसभा पहुंचे हैं, जिनमें अरूप रॉय, शिउली साहा, अखुज्जमान, सबीना यास्मीन आदि शामिल हैं। विधायकों ने बताया कि वे विपक्ष के नेता का चुनाव करने के लिए बैठक करेंगे।