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Delhi High Court: साईं बाबा पर ‘आपत्तिजनक’ वीडियो से हाईकोर्ट नाराज: अपीलीय समिति को जल्द फैसला करने का आदेश

Wed, 12 Aug 2026 08:40 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: प्रशांत तिवारी Updated Wed, 12 Aug 2026 08:40 PM IST
सार

दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार की शिकायत अपीलीय समिति को निर्देश दिया है कि वह शिरडी साईं बाबा को निशाना बनाने वाले कुछ कथित भड़काऊ और अपमानजनक YouTube वीडियो को हटाने की मांग से जुड़ी अपील पर सात दिनों के भीतर फैसला करे।
 

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Delhi High Court displeased over objectionable video on Sai Baba orders appellate committee to decide quickly
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने शिरडी साईं बाबा संस्थान ट्रस्ट की याचिका पर केंद्र की शिकायत अपीलीय समिति को निर्देश दिया है कि वह साईं बाबा और ट्रस्ट के खिलाफ कथित आपत्तिजनक वीडियो हटाने की मांग वाली अपील पर सात दिनों के भीतर फैसला करे। ट्रस्ट का आरोप है कि वीडियो में झूठे, अपमानजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक रूप से उकसाने वाले दावे किए गए हैं। वहीं, यूट्यूब ने कथित तौर पर कंटेंट हटाने से इनकार करते हुए कहा कि वह आरोपों की सत्यता की जांच नहीं कर सकता। हाई कोर्ट ने केंद्र से 19 अगस्त की अगली सुनवाई तक अनुपालन रिपोर्ट भी मांगी है।

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अदालत ने सात दिन में फैसला लेने को क्यों कहा?
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने 11 अगस्त को श्री साईं बाबा संस्थान ट्रस्ट, शिरडी की ओर से दायर याचिका पर यह आदेश पारित किया। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता की शिकायत और याचिका में लगाए गए आरोपों की प्रकृति को देखते हुए मामले को शिकायत अपीलीय समिति के समक्ष उठाई गई वैधानिक अपील के आधार पर तय किया जाना उचित है। कोर्ट ने समिति को निर्देश दिया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इस आदेश की तारीख से सात दिनों के भीतर आदेश पारित कर याचिकाकर्ता को इसकी जानकारी दी जाए।
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ट्रस्ट ने  वीडियो को लेकर क्या आरोप लगाए हैं?
याचिकाकर्ता का आरोप है कि कुछ वीडियो में शिरडी साईं बाबा और ट्रस्ट के खिलाफ 'झूठे, मानहानिकारक, भड़काऊ और अपमानजनक आरोप' लगाए गए हैं। ट्रस्ट का कहना है कि इन वीडियो को हटाने के लिए यूट्यूब से शिकायत की गई, लेकिन प्लेटफॉर्म ने इन्हें हटाने से इनकार कर दिया।
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ट्रस्ट ने किन अधिकारियों से संपर्क किया?
ट्रस्ट के मुताबिक, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) व्यवस्था के तहत केंद्र सरकार की शिकायत अपीलीय समिति समेत विभिन्न संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया गया। इसके बावजूद कथित आपत्तिजनक कंटेंट यूट्यूब पर उपलब्ध रहा। ट्रस्ट ने दावा किया कि इससे भक्तों की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं और संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत उन्हें प्राप्त धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन हो रहा है।

केंद्र सरकार को अब क्या करना होगा?
दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को 19 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसका मतलब है कि अगली सुनवाई में अदालत यह देखेगी कि शिकायत अपीलीय समिति ने हाई कोर्ट के निर्देश के अनुसार मामले पर कार्रवाई की है या नहीं।

वीडियो में ट्रस्ट के खिलाफ क्या आरोप लगाए जाने का दावा है?
याचिका के मुताबिक, इन वीडियो के जरिए ट्रस्ट पर भक्तों को धोखा देने, धार्मिक इतिहास में हेरफेर करने और एक झूठी धार्मिक कहानी को बढ़ावा देने जैसे आरोप लगाए गए हैं। ट्रस्ट ने इसे धार्मिक शत्रुता और सांप्रदायिक वैमनस्य पैदा करने की कोशिश बताते हुए आरोप लगाया कि उसके खिलाफ एक 'लगातार और सुनियोजित डिजिटल अभियान' चलाया जा रहा है।

यूट्यूब से शिकायत करने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
याचिका में कहा गया है कि सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के तहत उपलब्ध शिकायत निवारण तंत्र के जरिए यूट्यूब के सामने विस्तार से शिकायत दर्ज की गई, लेकिन ट्रस्ट को कोई प्रभावी समाधान नहीं मिला। इसके बाद 29 जुलाई को शिकायत अपीलीय समिति के समक्ष अपील दायर की गई।

यूट्यूब ने वीडियो हटाने से इनकार करते हुए क्या कहा?
याचिका के अनुसार, यूट्यूब ने कंटेंट हटाने से इनकार करते हुए कहा कि वह पोस्ट में किए गए दावों की सच्चाई की जांच करने की स्थिति में नहीं है और केवल आरोपों के आधार पर वीडियो नहीं हटाता। प्लेटफॉर्म ने ट्रस्ट को सलाह दी कि वह या तो सीधे वीडियो अपलोड करने वालों से संपर्क करे या फिर इस मामले में अदालत का रुख करे।


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ट्रस्ट ने केंद्र के IT मंत्रालय को क्या बताया?
ट्रस्ट ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भी इस मामले में एक विस्तृत प्रतिवेदन भेजा। ट्रस्ट का कहना है कि संबंधित अधिकारियों के समक्ष मामला उठाने के बावजूद कथित आपत्तिजनक वीडियो उपलब्ध रहे।

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