Supreme Court: कृष्ण जन्मभूमि विवाद में 'सुप्रीम' टिप्पणी, पहले तय हो कौन होगा लीड केस; अगली सुनवाई कब?
कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में लीड केस तय करने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अहम संकेत दिया। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ ने कहा कि मामला नए सिरे से विचार के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजा जा सकता है। क्या मामला फिर हाईकोर्ट जाएगा? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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विस्तार
कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद से जुड़े कई मुकदमों में से किसे प्रतिनिधि या मुख्य मामला माना जाए, इस सवाल पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अहम टिप्पणी की। न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने संकेत दिया कि यह मुद्दा नए सिरे से विचार के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजा जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी।
क्या ‘लीड केस’ तय करने का मामला फिर हाईकोर्ट जाएगा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दूसरे मुकदमों के वादियों को नोटिस दिए बिना एक हिंदू पक्ष को भगवान कृष्ण के सभी भक्तों का प्रतिनिधि मान लिया था। पीठ ने कहा कि आवेदन का विषय कुछ और था और सभी वादियों को नोटिस भी नहीं दिया गया। इसी आधार पर शीर्ष अदालत ने मामले को दोबारा विचार के लिए हाईकोर्ट भेजने का संकेत दिया।
क्या हाईकोर्ट ने दूसरे पक्ष को प्रतिनिधि मानकर मुकदमा पहले सुनने का आदेश दिया था?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 18 जुलाई 2025 को एक हिंदू पक्ष की ओर से दाखिल आवेदन को मंजूरी दी थी। इसके तहत उस मुकदमे को दूसरे मामलों में शामिल पक्षों की ओर से प्रतिनिधि कार्रवाई के तौर पर चलाने की अनुमति दी गई थी। हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि इसी मुकदमे की पहले सुनवाई कर फैसला किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट में किस आदेश को चुनौती दी गई?
हाईकोर्ट के इस आदेश को एक अन्य हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। उसका कहना था कि अलग-अलग दीवानी मुकदमों को मथुरा अदालत से हाईकोर्ट में स्थानांतरित किए जाने के बाद उसका मुकदमा प्रभावी तौर पर मुख्य मामला बन गया था, लेकिन हाईकोर्ट ने किसी दूसरे वादी को प्रतिनिधि का दर्जा दे दिया।
कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में कितने मुकदमे हैं?
इस व्यापक विवाद से जुड़े 20 से अधिक दीवानी मुकदमे हैं। हिंदू पक्ष के वादियों का दावा है कि मथुरा स्थित शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण मुगल बादशाह औरंगजेब ने भगवान कृष्ण के जन्मस्थान पर मौजूद मंदिर को गिराने के बाद कराया था।
इन मुकदमों को शुरुआत में मथुरा की अदालत में दाखिल किया गया था। बाद में इन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया। विवाद से जुड़े सर्वे और मुकदमों की पोषणीयता समेत कई मुद्दे हाईकोर्ट के सामने लंबित हैं।
क्या शाही ईदगाह परिसर के सर्वे पर भी सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई थी?
सुप्रीम कोर्ट में मस्जिद कमेटी और हिंदू पक्षों की ओर से विवाद से जुड़े अलग-अलग आदेशों को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं भी लंबित हैं। इनमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के 26 मई 2023 के उस फैसले को चुनौती भी शामिल है, जिसके तहत विवाद से जुड़े सभी मामलों को मथुरा अदालत से हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया गया था।
16 जनवरी 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद कमेटी की याचिका पर हाईकोर्ट के 14 दिसंबर 2023 के आदेश पर रोक लगा दी थी। इस आदेश में शाही ईदगाह मस्जिद परिसर के कोर्ट की निगरानी में सर्वे की अनुमति दी गई थी।
अगली सुनवाई कब होगी?
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर के लिए तय की है। अब नजर इस बात पर है कि ‘लीड केस’ तय करने के मुद्दे पर शीर्ष अदालत क्या निर्देश देती है और क्या मामला नए सिरे से विचार के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजा जाता है।