दिल्ली रेस्तरां हादसे में 21 मौतें: उपहार सिनेमा से लेकर मुंडका तक, राजधानी में हुए ये दहलाने वाले अग्निकांड
आइये जानते हैं ऐसी ही कुछ घटनाओं के बारे में, जिन्होंने दिल्ली को कई वर्षों तक दहलाया। हालांकि, इसके बावजूद शासन-प्रशासन की तैयारियां हमेशा नाकाफी पड़ती दिखीं।
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हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब दिल्ली में आगजनी की किसी घटना ने एक दर्जन से ज्यादा लोगों की जान ले ली है। इससे पहले भी देश की राजधानी ने कई अग्निकांड देखे हैं। इनमें आग लगने की घटना से जुड़ा सबसे बड़ा और चर्चित हादसा करीब 29 साल पुराना उपहार सिनेमा अग्निकांड रहा था, जिसमें 59 लोगों की जान चली गई थी। हालांकि, इसके बाद भी कई आग लगने की घटनाएं हुई हैं, जिनमें दर्जनों लोग मारे गए हैं।
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1. उपहार सिनेमा अग्निकांड (1997)
तारीख और जगह: 13 जून, 1997; ग्रीन पार्क, दक्षिणी दिल्लीहताहत: 59 मौतें, 103 घायल
घटना: फिल्म बॉर्डर के शो के दौरान ग्राउंड फ्लोर पर लगे बिजली के ट्रांसफार्मर में चिंगारी उठी, जिससे पार्किंग में खड़ी गाड़ियों में आग लग गई। इससे भारी मात्रा में कार्बन मोनोऑक्साइड गैस बनी। सिनेमा हॉल के बालकनी सेक्शन में बैठे लोग बाहर नहीं निकल पाए क्योंकि प्रबंधन ने अतिरिक्त सीटें लगाने के लिए इमरजेंसी गेट्स को बंद या ब्लॉक कर दिया था।
2. लाल कुआं केमिकल गोदाम अग्निकांड (1999)
तारीख और जगह: 31 मई 1999; लाल कुआं (हमदर्द रोड), पुरानी दिल्ली
हताहत: 57 मौतें, 23 घायल
घटना: यह आग एक केमिकल गोदाम में भड़की थी और इसने इतनी तेजी से विकराल रूप ले लिया कि आसपास की इमारतें भी इसकी चपेट में आ गईं। एक स्थानीय निवासी के अनुसार, रसायनों के कारण दुर्घटना के बाद लगभग एक हफ्ते तक वहां की सड़क नीली दिखाई दे रही थी। इस भीषण अग्निकांड के बाद सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, केमिकल मार्केट को पुरानी दिल्ली से हटाकर होलंबी कलां स्थानांतरित कर दिया गया था। हालांकि, आज भी इस इलाके में तारों के जाल और संकरी गलियों के कारण आग लगने का खतरा बना हुआ है।
3. अनाज मंडी फैक्ट्री अग्निकांड (2019)
तारीख और जगह: 8 दिसंबर, 2019; रानी झांसी रोड, केंद्रीय दिल्लीहताहत: 43 मौतें, 56 से अधिक घायल
घटना: एक आवासीय क्षेत्र में अवैध रूप से चल रही बैग बनाने की फैक्ट्री में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लग गई। इमारत के अंदर सो रहे मजदूर जहरीले धुएं के कारण दम घुटने से मर गए। खिड़कियों पर लोहे की ग्रिल लगी होने और सीढ़ियों पर कच्चा माल जमा होने के कारण भागने का कोई रास्ता नहीं बचा था।
4. मुंडका कमर्शियल बिल्डिंग अग्निकांड (2022)
घटना: एक चार मंजिला व्यावसायिक इमारत में, जहां सीसीटीवी कैमरे और इलेक्ट्रॉनिक राउटर बनते थे, पहली मंजिल पर इलेक्ट्रिकल स्विच के पास आग लग गई। गत्ते और प्लास्टिक के कारण आग तेजी से फैली। इमारत में केवल एक ही निकास द्वार था, जिससे वहां काम करने वाली दर्जनों महिलाएं अंदर ही फंस गईं।
5. बवाना औद्योगिक क्षेत्र अग्निकांड (2018)
तारीख और जगह: 20 जनवरी, 2018, बवाना इंडस्ट्रियल एरिया, उत्तर-पश्चिमी दिल्लीहताहत: 17 मौतें, 2 घायल
घटना: एक पटाखा पैकेजिंग यूनिट में अचानक आग लग गई। इमारत में आने-जाने का केवल एक ही रास्ता था। जब सीढ़ियों के पास आग लगी, तो ऊपर की मंजिलों पर काम कर रहे मजदूरों के लिए बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा।
6. अर्पित पैलेस होटल अग्निकांड (2019)
घटना: करोल बाग के एक बजट होटल में एसी डक्ट में शॉर्ट सर्किट होने से आग गलियारों और छत पर बने अवैध रेस्टोरेंट में फैल गई। होटल के अंदर लगे लकड़ी के पैनलों के कारण धुआं तेजी से बढ़ा और इमरजेंसी गेट्स पर ताला लगे होने के कारण लोग अंदर ही फंस गए।
7. अलीपुर पेंट फैक्ट्री अग्निकांड (2024)
तारीख और जगह: 15 फरवरी, 2024; अलीपुर, उत्तरी दिल्ली
हताहत: 11 मौतें, 4 घायल
घटना: एक अवैध केमिकल और पेंट मिक्सिंग फैक्ट्री में वेल्डिंग की चिंगारी से विस्फोट हो गया। ज्वलनशील केमिकल केमिकल नालियों में फैल गया, जिससे आग आसपास के घरों और दुकानों तक पहुंच गई और अंदर काम कर रहे लोग फंस गए।
8. विवेक विहार रिहायशी इमारत अग्निकांड (2026)
घटना: तड़के सुबह एक चार मंजिला इमारत की दूसरी मंजिल पर एयर कंडीशनर (एसी) के कंप्रेसर में हुए ब्लास्ट से भीषण आग लग गई। आग ने ऊपर जाने वाले रास्तों को ब्लॉक कर दिया, जिससे सो रहे एक ही परिवार के लोग अंदर ही फंस गए और दम घुटने से उनकी मृत्यु हो गई।
9. पालम अग्निकांड (2026)
तारीख और जगह: 18 मार्च 2026; पालम, दक्षिण-पश्चिम दिल्ली
हताहत: 9 मौतें, तीन घायल
घटना: एक चार मंजिला इमारत में सुबह करीब 6:30 बजे भीषण आग लग गई। इस दर्दनाक दुर्घटना में व्यवसायी राजिंदर कश्यप के परिवार के 9 लोगों की जान चली गई, जिनमें तीन बच्चे भी शामिल थे। इमारत के बेसमेंट, ग्राउंड और पहली मंजिल पर कॉस्मेटिक्स और कपड़ों का शोरूम था, जबकि परिवार ऊपरी मंजिलों पर रहता था। माना जा रहा है कि आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी और कॉस्मेटिक्स जैसे अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थों के कारण यह तेजी से ऊपरी मंजिलों तक फैल गई। आग से बचने के लिए एक बेटे ने अपनी दो वर्षीय बच्ची को नीचे बचाव कर्मियों की ओर फेंका और फिर खुद छलांग लगा दी, जबकि एक अन्य बेटा पास की इमारत पर कूदकर अपनी जान बचाने में सफल रहा। संकरी गली और तारों के जाल के कारण बचाव कार्य में काफी बाधा आई। चश्मदीदों के अनुसार, हाइड्रोलिक सीढ़ी के न खुलने से बचाव कार्य में 30-40 मिनट की देरी हुई, हालांकि दमकल विभाग का कहना था कि सीढ़ी की ऊंचाई तीसरी मंजिल तक पहुंचने के लिए कम थी।
10. गोकुलपुरी झुग्गी बस्ती अग्निकांड (2022)
तारीख और जगह: 12 मार्च, 2022; गोकुलपुरी, उत्तर-पूर्वी दिल्लीहताहत: 7 मौतें, 60 से अधिक झुग्गियां खाक
घटना: आधी रात को एक झुग्गी बस्ती में अचानक आग लग गई। प्लास्टिक, लकड़ी और तिरपाल जैसी ज्वलनशील चीजों के कारण आग इतनी तेजी से फैली कि संकरी गलियों में सो रहे लोगों को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला।
11. जाकिर नगर भवन अग्निकांड (2019)
तारीख और जगह: 6 अगस्त, 2019; जाकिर नगर, दक्षिण-पूर्वी दिल्लीहताहत: 6 मौतें, 10 घायल
घटना: स्टिल्ट पार्किंग एरिया में लगे इलेक्ट्रिक मीटर बोर्ड में शॉर्ट सर्किट होने से वहां खड़ी गाड़ियों ने आग पकड़ ली। संकरी लिफ्ट शाफ्ट और सीढ़ियों ने चिमनी की तरह काम किया, जिससे जहरीला धुआं सीधे ऊपरी मंजिलों तक पहुंच गया।
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