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हिंदुओं के अधिकारों की रक्षा के लिए संसद में हिंदू चार्टर बिल पास करने की मांग
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 23 Nov 2018 06:27 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Reuters
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देश के कुछ हिंदुओं को लगता है कि बहुसंख्यक होने के बाद भी उनके साथ भेदभाव हो रहा है। यही कारण है कि अब एक वर्ग हिंदुओं के अधिकारों की रक्षा की मांग करने लगा है। हिंदू चार्टर बिल के नाम से एक मांग पत्र तैयार किया गया है जिसमें हिंदुओं को भी अन्य धर्मावलंबियों के समान अधिकार देने की मांग की गई है।
दिल्ली से विधायक कपिल शर्मा ने एक प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदुओं के देश में हिंदुओं से ही दूसरे दर्जे का व्यवहार किया जा रहा है। कुछ खास धर्मों को अल्पसंख्यक होने के आधार पर विशेष सुविधाएं दी जा रही हैं। इससे भी ज्यादा गंभीर मामला है कि सुप्रीम कोर्ट से भी कई फैसले इस तरह के आ रहे हैं जिससे यह लगने लगा है कि हिंदुओं की भावनाओं की उपेक्षा की जा रही है। इससे गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। उनकी मांग है कि सरकार संसद में इस तरह का कानून बनाए जिससे सभी धर्मों को एक समान अधिकार मिले।
खत्म हो एफसीआरए कानून
हिंदू चार्टर की मांग करने वाले एक सदस्य संक्रांत सानू ने कहा कि अल्पसंख्यक वर्ग को विदेशों से बेतरतीब तरीके से मदद मिल रही है। इस धन का उपयोग धर्मांतरण कराने और एक वर्ग विशेष की कुछ विशेष इमारतें बनाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस कानून की आड़ में विदेशों से बेहिसाब धन आ रहा है जिसका किस तरह उपयोग हो रहा है इसकी निश्चित जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई है जिससे इसके भारत के ही खिलाफ दुरुपयोग होने की आशंका बढ़ गई है। इसलिए सरकार से उनकी मांग है कि एफसीआरए कानून को तत्काल खत्म किया जाए।
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दिल्ली से विधायक कपिल शर्मा ने एक प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदुओं के देश में हिंदुओं से ही दूसरे दर्जे का व्यवहार किया जा रहा है। कुछ खास धर्मों को अल्पसंख्यक होने के आधार पर विशेष सुविधाएं दी जा रही हैं। इससे भी ज्यादा गंभीर मामला है कि सुप्रीम कोर्ट से भी कई फैसले इस तरह के आ रहे हैं जिससे यह लगने लगा है कि हिंदुओं की भावनाओं की उपेक्षा की जा रही है। इससे गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। उनकी मांग है कि सरकार संसद में इस तरह का कानून बनाए जिससे सभी धर्मों को एक समान अधिकार मिले।
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खत्म हो एफसीआरए कानून
हिंदू चार्टर की मांग करने वाले एक सदस्य संक्रांत सानू ने कहा कि अल्पसंख्यक वर्ग को विदेशों से बेतरतीब तरीके से मदद मिल रही है। इस धन का उपयोग धर्मांतरण कराने और एक वर्ग विशेष की कुछ विशेष इमारतें बनाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस कानून की आड़ में विदेशों से बेहिसाब धन आ रहा है जिसका किस तरह उपयोग हो रहा है इसकी निश्चित जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई है जिससे इसके भारत के ही खिलाफ दुरुपयोग होने की आशंका बढ़ गई है। इसलिए सरकार से उनकी मांग है कि एफसीआरए कानून को तत्काल खत्म किया जाए।
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