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ईरान पर परमाणु हमले के पक्ष में थे ट्रंप: पूर्व CIA विश्लेषक का दावा, जनरल डैन केन के इनकार के बाद पीछे हटे

एएनआई, नई दिल्ली। Published by: राकेश कुमार Updated Fri, 15 May 2026 06:51 PM IST
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सार

ईरान, अमेरिका और इस्राइल के बीच जारी जंग को लेकर पूर्व सीआईए विश्लेषक के दावे ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने बताया कि तनाव के बीच दुनिया परमाणु युद्ध के कितने करीब थी और कैसे वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व के कड़े रुख ने राष्ट्रपति ट्रंप को इस विनाशकारी कदम से पीछे हटने पर मजबूर किया। उन्होंने क्या-क्या कहा है? खबर में जानिए...
 

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डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

पूर्व सीआईए विश्लेषक लैरी जॉनसन ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों के इस्तेमाल पर गंभीरता से विचार कर रहे थे। जॉनसन के अनुसार, ट्रंप ने अमेरिकी ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन से परमाणु हमले की संभावनाओं पर बात की थी, लेकिन जनरल केन ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।


न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत के दौरान जॉनसन ने बताया कि हालांकि परमाणु हथियारों के कोड्स राष्ट्रपति के पास होते हैं और वे कमांडर-इन-चीफ के तौर पर आदेश दे सकते हैं, लेकिन जनरल केन ने इससे इनकार कर दिया। इसी का नतीजा था कि बाद में डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया के सामने आकर कहा कि हम परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कभी नहीं करेंगे।
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सैन्य सलाह और इस्तीफे का दबाव
लैरी जॉनसन ने समझाया कि कानूनन ज्वाइंट चीफ के चेयरमैन राष्ट्रपति के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार होते हैं। हालांकि वे राष्ट्रपति के आदेश को वीटो नहीं कर सकते, लेकिन अगर राष्ट्रपति उनकी सलाह को नजरअंदाज कर परमाणु हमले जैसा कदम उठाते, तो जनरल केन अपने पद से इस्तीफा दे सकते थे। जॉनसन ने कहा, 'जनरल केन का विरोध कोई राजनीतिक विचार नहीं था, बल्कि एक वास्तविक सैन्य विचार था। परमाणु हमला करने से अमेरिका दुनिया में अलग-थलग पड़ जाता और रूस, चीन तथा उत्तर कोरिया जैसे देशों के साथ परमाणु संघर्ष का खतरा बढ़ जाता।'
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भारत-पाकिस्तान का भी किया जिक्र
जॉनसन ने चेतावनी दी कि अमेरिका का ऐसा कदम पूरी दुनिया को एक-दूसरे के खिलाफ जंग में झोंक सकता है। उन्होंने भारत और पाकिस्तान का उदाहरण देते हुए कहा कि पड़ोसी होने के नाते दोनों के पास परमाणु हथियार हैं, जो उन्हें एक-दूसरे के प्रति संयम बरतने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। यदि अमेरिका जैसा देश परमाणु हथियारों का उपयोग करता है, तो यह वैश्विक संतुलन बिगाड़ देगा।

ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को नकारा
दूसरी ओर, राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को ईरान के प्रस्ताव को ठुकराने की पुष्टि की। ट्रंप ने कहा, 'मैंने ईरान का नवीनतम प्रस्ताव देखा और मुझे पहली लाइन ही पसंद नहीं आई। मैंने उसे फेंक दिया। वे पूरी तरह से परमाणु-मुक्त होने पर सहमत हुए थे, लेकिन उनके गारंटी का स्तर पर्याप्त नहीं था।' ट्रंप ने न्यूक्लियर डस्ट यानी परमाणु धूल शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि ईरान के पास इसे हटाने की तकनीक नहीं है और केवल अमेरिका या चीन ही इसे हटा सकते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि अंतत: ईरान उनकी शर्तों पर सहमत हो जाएगा।

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