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DoT: वाई-फाई सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए फैसला, 500 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम बिना लाइसेंस इस्तेमाल की अनुमति

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Thu, 22 Jan 2026 04:06 AM IST
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सार

Department of Telecommunications: केंद्र सरकार ने देश में वाई-फाई सेवाओं को तेज और बेहतर बनाने के लिए छह गीगाहर्ट्ज बैंड के निचले हिस्से में मौजूद 500 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम को बिना लाइसेंस इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी है।

DoT: Initiative to promote Wi-Fi services, permission to use 500 MHz spectrum without license
वाई-फाई (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Adobe Stock
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देश में वाई-फाई सेवाओं को तेज और बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। दूरसंचार विभाग (डॉट) ने 6 गीगाहर्ट्ज बैंड के निचले हिस्से में मौजूद 500 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम को बिना लाइसेंस इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी है। इस फैसले से घरों, दफ्तरों और सार्वजनिक जगहों पर वाई-फाई की गति और क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।
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विभाग की ओर से अधिसूचना जारी
डॉट की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, 5925 से 6425 मेगाहर्ट्ज फ्रीक्वेंसी रेंज का इस्तेमाल अब कम पावर इनडोर और बहुत कम पावर वाले आउटडोर वाई-फाई सिस्टम के लिए किया जा सकेगा। इसके लिए किसी तरह का लाइसेंस या स्पेक्ट्रम आवंटन लेने की जरूरत नहीं होगी। यानी वाई-फाई उपकरण बिना सरकारी अनुमति के इस स्पेक्ट्रम पर काम कर सकेंगे। 

सरकार ने यह फैसला करीब छह महीने पहले जारी किए गए मसौदा नोटिफिकेशन के बाद लिया है। हालांकि, इस स्पेक्ट्रम के इस्तेमाल के लिए कुछ शर्तें भी तय की गई हैं। इसका उपयोग साझा आधार पर होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी अन्य संचार सेवा में बाधा न पड़े। सिग्नल की शक्ति पर भी सीमा रखी गई है, ताकि इसका इस्तेमाल केवल वाई-फाई जैसे कम पावर वाले उपकरणों तक ही सीमित रहे।

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छह गीगाहर्ट्ज बैंड का ऊपरी हिस्सा मोबाइल सेवाओं के लिए आरक्षित
डॉट ने यह भी स्पष्ट किया है कि 6 गीगाहर्ट्ज बैंड का ऊपरी हिस्सा भविष्य में मोबाइल सेवाओं के लिए आरक्षित रहेगा। इससे वाई-फाई और मोबाइल नेटवर्क के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी। टेलीकॉम और आईटी क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से वाई-फाई 7 जैसी नई तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा। इससे वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन पढ़ाई, दफ्तरों में काम और डिजिटल सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। कुल मिलाकर, बिना लाइसेंस स्पेक्ट्रम की यह अनुमति देश की डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

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