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चिंताजनक: बोतलबंद पानी में मिले जहरीले रसायन, सेहत के लिए हानिकारक; अब तक 700 से अधिक डीबीपीएस की पहचान
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: लव गौर
Updated Thu, 22 Jan 2026 05:27 AM IST
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सार
दुनिया के बड़े बोतलबंद पानी ब्रांडों में भी ऐसे रासायनिक तत्व पाए गए हैं, जो लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं। ऐसे में बोतलबंद पानी को पूरी तरह सुरक्षित मानना उचित नहीं होगा।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
बोतलबंद पानी स्वास्थ्य और शुद्धता की गारंटी मानकर खरीदा जाता है, लेकिन नए वैज्ञानिक अध्ययन ने इस धारणा पर सवाल खड़े किए हैं। वाटर रिसर्च पत्रिका में प्रकाशित शोध के मुताबिक, दुनिया के बड़े बोतलबंद पानी ब्रांडों में भी ऐसे रासायनिक तत्व पाए गए हैं, जो लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
दुनिया भर में बोतलबंद पानी की खपत पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। लोग इसे सुविधा, स्वच्छता और सुरक्षित पीने के पानी के विकल्प के तौर पर देखते हैं। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ कैरोलिना के रसायन और जैव-रसायन विभाग के शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन किया। शोध का उद्देश्य यह जानना था कि बोतलबंद पानी में केवल वे डीबीपीएस मौजूद हैं या नहीं, जिन पर नियम लागू हैं, या फिर ऐसे प्राथमिक और बिना-नियमबद्ध डीबीपीएस भी हैं, जिन्हें अब तक गंभीरता से नहीं परखा गया।
इसके लिए 10 लोकप्रिय ब्रांडों का विश्लेषण किया गया और उनकी तुलना क्लोरामिनयुक्त नल के पानी से की गई। पानी को पीने योग्य बनाने के लिए क्लोरीन, क्लोरामाइन, क्लोरीन डाइऑक्साइड या ओजोन जैसे रसायनों से कीटाणुशोधन किया जाता है। यह प्रक्रिया पानी में मौजूद प्राकृतिक ऑर्गेनिक पदार्थों, ब्रोमाइड और आयोडाइड के साथ प्रतिक्रिया करके अनजाने में नए रासायनिक यौगिक बना देती है। इन्हें डाइसइंफेक्शन बाय-प्रोडक्ट्स यानी डीबीपीएस कहा जाता है। अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (ईपीए) और फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने कुछ डीबीपीएस के लिए सीमा तय की है, लेकिन अब तक 700 से अधिक डीबीपीएस की पहचान हो चुकी है, जिनमें कई अत्यधिक विषैले माने जाते हैं।
बोतलबंद पानी को पूरी तरह सुरक्षित मानना उचित नहीं
बोतलबंद पानी को पूरी तरह सुरक्षित मान लेना सही नहीं होगा, लेकिन नल के पानी की तुलना में इसमें हानिकारक रसायन कम पाए जाते हैं। बदलती जीवनशैली और बढ़ती खपत के दौर में यह अध्ययन चेतावनी है कि शुद्ध पानी के दावों की वैज्ञानिक जांच और कड़े मानक समय की मांग हैं।
ये भी पढ़ें: चिंताजनक: 2025 तीसरा सबसे गर्म साल, दुनिया 1.5 डिग्री सीमा पार करने की ओर; ध्रुवीय इलाकों में रिकॉर्ड गर्मी
कैंसरजनक डीबीपीएस तक मौजूद
अध्ययन के अनुसार सभी जांचे गए बोतलबंद पानी ब्रांडों में डीबीपीएस मौजूद थे। इनकी मात्रा 0.01 से 22.4 माइक्रोग्राम प्रति लीटर के बीच रही, जबकि औसत मात्रा 2.6 माइक्रोग्राम पाई गई। चिंता की बात यह है कि कुछ अत्यधिक विषैले डीबीपीएस भी पाए गए। डिब्रोमोएसीटोनीट्राइल, जिसे कैंसरजनक माना जाता है, दो ग्रॉसरी ब्रांडों में पाया गया। हालांकि इसकी मात्रा कम थी, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसे यौगिकों की मौजूदगी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। एक डिजाइनर ब्रांड जो केवल यूवी डिसइंफेक्शन वाले भूमिगत पानी के तौर पर बेचा जा रहा था, उसमें भी हिलोएसेटिक एसिड और क्लोरोफॉर्म पाए गए।
ये भी पढ़ें: चिंताजनक: माइक्रोप्लास्टिक से महासागर खो रहे कार्बन सोखने की ताकत, धरती की प्राकृतिक सुरक्षा हो रही कमजोर
स्रोत और ब्रांड से बदलती है तस्वीर
शोध में सामने आया कि पानी के स्रोत के आधार पर डीबीपीएस की मात्रा में अंतर था। झरने और भूमिगत पानी वाले ब्रांडों में औसतन 0.6 माइक्रोग्राम प्रति लीटर डीबीपीएस पाए गए। शुद्ध पानी वाले ब्रांडों में यह मात्रा लगभग 1.2 माइक्रोग्राम प्रति लीटर रही, जबकि नामी और प्रीमियम ब्रांडों में औसतन 3.7 माइक्रोग्राम प्रति लीटर डीबीपीएस दर्ज किए गए।
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इसके लिए 10 लोकप्रिय ब्रांडों का विश्लेषण किया गया और उनकी तुलना क्लोरामिनयुक्त नल के पानी से की गई। पानी को पीने योग्य बनाने के लिए क्लोरीन, क्लोरामाइन, क्लोरीन डाइऑक्साइड या ओजोन जैसे रसायनों से कीटाणुशोधन किया जाता है। यह प्रक्रिया पानी में मौजूद प्राकृतिक ऑर्गेनिक पदार्थों, ब्रोमाइड और आयोडाइड के साथ प्रतिक्रिया करके अनजाने में नए रासायनिक यौगिक बना देती है। इन्हें डाइसइंफेक्शन बाय-प्रोडक्ट्स यानी डीबीपीएस कहा जाता है। अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (ईपीए) और फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने कुछ डीबीपीएस के लिए सीमा तय की है, लेकिन अब तक 700 से अधिक डीबीपीएस की पहचान हो चुकी है, जिनमें कई अत्यधिक विषैले माने जाते हैं।
बोतलबंद पानी को पूरी तरह सुरक्षित मानना उचित नहीं
बोतलबंद पानी को पूरी तरह सुरक्षित मान लेना सही नहीं होगा, लेकिन नल के पानी की तुलना में इसमें हानिकारक रसायन कम पाए जाते हैं। बदलती जीवनशैली और बढ़ती खपत के दौर में यह अध्ययन चेतावनी है कि शुद्ध पानी के दावों की वैज्ञानिक जांच और कड़े मानक समय की मांग हैं।
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कैंसरजनक डीबीपीएस तक मौजूद
अध्ययन के अनुसार सभी जांचे गए बोतलबंद पानी ब्रांडों में डीबीपीएस मौजूद थे। इनकी मात्रा 0.01 से 22.4 माइक्रोग्राम प्रति लीटर के बीच रही, जबकि औसत मात्रा 2.6 माइक्रोग्राम पाई गई। चिंता की बात यह है कि कुछ अत्यधिक विषैले डीबीपीएस भी पाए गए। डिब्रोमोएसीटोनीट्राइल, जिसे कैंसरजनक माना जाता है, दो ग्रॉसरी ब्रांडों में पाया गया। हालांकि इसकी मात्रा कम थी, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसे यौगिकों की मौजूदगी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। एक डिजाइनर ब्रांड जो केवल यूवी डिसइंफेक्शन वाले भूमिगत पानी के तौर पर बेचा जा रहा था, उसमें भी हिलोएसेटिक एसिड और क्लोरोफॉर्म पाए गए।
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स्रोत और ब्रांड से बदलती है तस्वीर
शोध में सामने आया कि पानी के स्रोत के आधार पर डीबीपीएस की मात्रा में अंतर था। झरने और भूमिगत पानी वाले ब्रांडों में औसतन 0.6 माइक्रोग्राम प्रति लीटर डीबीपीएस पाए गए। शुद्ध पानी वाले ब्रांडों में यह मात्रा लगभग 1.2 माइक्रोग्राम प्रति लीटर रही, जबकि नामी और प्रीमियम ब्रांडों में औसतन 3.7 माइक्रोग्राम प्रति लीटर डीबीपीएस दर्ज किए गए।
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