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IAF: 'अब सिर्फ आंखें नहीं..आसमान के पंजे हैं ड्रोन', ऑपरेशन सिंदूर पर बोले भारतीय वायुसेना प्रमुख एपी सिंह

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Fri, 15 May 2026 03:00 PM IST
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सार

भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन अब सिर्फ निगरानी के साधन नहीं, बल्कि आसमान के पंजे बन चुके हैं। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेनाओं ने बेहतर समन्वय और एयर डिफेंस सिस्टम की मदद से दुश्मन के ड्रोन हमलों को नाकाम किया।

Drones Are Now Claws in the Sky, IAF Chief on Operation Sindoor
वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने आधुनिक युद्ध में ड्रोन और अनमैन्ड एरियल सिस्टम (UAS) की बढ़ती भूमिका को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अब ड्रोन केवल आसमान की आंखें  नहीं रहे, बल्कि आसमान के पंजे बन चुके हैं। यानी अब इनका इस्तेमाल सिर्फ निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि ये सीधे हमला करने और दुश्मन को नुकसान पहुंचाने की क्षमता भी रखते हैं।
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दिल्ली के सुब्रतो पार्क में आयोजित एक रक्षा संगोष्ठी में बोलते हुए एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और अब लड़ाई पारंपरिक तरीके से हटकर तकनीक आधारित हो गई है। उन्होंने कहा कि ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम अब भविष्य की नहीं, बल्कि वर्तमान की जरूरत बन चुके हैं। उन्होंने साफ कहा कि युद्ध का मैदान अब पूरी तरह विकेंद्रीकृत और ऑटोमेटेड सिस्टम की ओर बढ़ रहा है।
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ऑपरेशन सिंदूर को लेकर क्या बताया?

एयर चीफ ने हालिया संघर्षों और ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने इस दौरान ड्रोन हमलों और दुश्मन की गतिविधियों का प्रभावी तरीके से मुकाबला किया। उन्होंने बताया कि दुश्मन की ओर से कई चरणों में ड्रोन भेजे गए थे, लेकिन भारतीय सेनाओं ने मजबूत समन्वय और एयर डिफेंस सिस्टम की मदद से उन्हें लक्ष्य तक पहुंचने नहीं दिया।

उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना, सेना और नौसेना के बीच बेहतरीन तालमेल देखने को मिला। एयर चीफ ने एकीकृत वायु कमान और नियंत्रण प्रणाली (IACCS) को इस सफलता का बड़ा कारण बताया। उन्होंने कहा कि अगर सभी सेनाओं के बीच समन्वय न होता, तो दुश्मन के ड्रोन और हथियारों को रोकना मुश्किल हो सकता था।

आधुनिक युद्ध में क्या है सबसे अहम चीज?

एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध में सबसे अहम चीज डोमेन अवेयरनेस यानी पूरे एयरस्पेस की सटीक जानकारी होना है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अपने और दुश्मन के सिस्टम की सही पहचान न हो, तो फ्रेंडली फायर जैसी घटनाएं हो सकती हैं। इस दौरान उन्होंने कुवैत में अमेरिकी F-15 लड़ाकू विमानों से जुड़ी घटना का भी जिक्र किया।

उन्होंने ड्रोन युद्ध की सबसे बड़ी चुनौती लो-कॉस्ट अटैक और हाई-कॉस्ट डिफेंस को बताया। एयर चीफ ने कहा कि आज बेहद सस्ते ड्रोन के जरिए बड़े और महंगे सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि रक्षा प्रणाली की कीमत से ज्यादा महत्वपूर्ण उस लक्ष्य की सुरक्षा है, जिसे बचाना है। उन्होंने स्वीकार किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत को कुछ महंगे रक्षा विकल्पों का इस्तेमाल करना पड़ा।

भविष्य का युद्ध किस पर आधारित होगा?

एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि भविष्य का युद्ध मैनड और अनमैनड टीमिंग पर आधारित होगा, जहां इंसान और मशीनें मिलकर काम करेंगी। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले एक दशक तक इंसानों को पूरी तरह युद्ध प्रणाली से बाहर नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देश अब भी छठी पीढ़ी के फाइटर जेट्स पर काम कर रहे हैं, जो यह दिखाता है कि मानव नियंत्रण की भूमिका अभी खत्म नहीं हुई है।

उन्होंने अंत में कहा कि भारत को अपने ड्रोन सिस्टम की युद्धक्षेत्र में टिकाऊ क्षमता बढ़ाने पर भी ध्यान देना होगा, ताकि भविष्य के हाई-टेक युद्धों में भारतीय सेनाएं और ज्यादा मजबूत होकर उभर सकें।
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