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BRICS: 'बदलती विश्व व्यवस्था के बीच ब्रिक्स पर टिकी दुनिया की नजर', एस जयशंकर बोले- वैश्विक स्थिरता के लिए अहम

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Thu, 14 May 2026 11:32 AM IST
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सार

ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि दुनिया इस समय संघर्ष, आर्थिक अस्थिरता, व्यापार, तकनीक और जलवायु संबंधी चुनौतियों के कारण अनिश्चित दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में उभरते बाजारों और विकासशील देशों की BRICS से स्थिरता और संतुलनकारी भूमिका निभाने की उम्मीद बढ़ी है।

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विदेश मंत्री जयशंकर ने ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में मंत्रियों और प्रतिनिधियों का स्वागत किया - फोटो : ANI
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विस्तार

ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वैश्विक हालात, आर्थिक चुनौतियों और बदलती अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के बीच BRICS की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया। बैठक में अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा कि दुनिया इस समय काफी अनिश्चित और जटिल दौर से गुजर रही है, जहां लगातार संघर्ष, आर्थिक अस्थिरता, व्यापार और तकनीक से जुड़ी चुनौतियां वैश्विक परिदृश्य को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में उभरते बाजारों और विकासशील देशों की उम्मीदें BRICS से बढ़ी हैं और संगठन से वैश्विक स्थिरता में रचनात्मक और संतुलनकारी भूमिका निभाने की अपेक्षा की जा रही है।

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यह बैठक केवल औपचारिक संवाद नहीं

विदेश मंत्री ने कहा कि BRICS देशों के बीच यह बैठक सिर्फ औपचारिक संवाद नहीं, बल्कि वैश्विक और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर विचार साझा करने और साझा रणनीति विकसित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में बहुपक्षीय सहयोग और कूटनीतिक संवाद पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है।

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भारत की अध्यक्षता में अब तक कितने बैठकों का आयोजन हुआ?

जयशंकर ने बताया कि भारत की अध्यक्षता में अब तक 80 से अधिक BRICS बैठकों का आयोजन किया जा चुका है, जिनमें सभी सदस्य देशों ने सक्रिय भागीदारी की है। इन बैठकों के जरिए विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने और संवाद को आगे बढ़ाने का काम हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत BRICS को अधिक समावेशी और सहयोगात्मक मंच बनाने के लिए साझेदार देशों के साथ लगातार संपर्क और संवाद बनाए हुए है।

नए सदस्य देशों पर क्या बोले?

उन्होंने BRICS के संस्थागत विकास और नए सदस्य देशों के एकीकरण को भी अहम बताया। जयशंकर ने कहा कि संगठन के विस्तार के साथ उसके मौजूदा ढांचे और तंत्र को अपडेट करने पर चर्चा आगे बढ़ाई गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि BRICS की सुचारु प्रगति के लिए जरूरी है कि नए सदस्य देश संगठन की साझा सहमति, प्राथमिकताओं और मूल सिद्धांतों को पूरी तरह समझें और उनका समर्थन करें।

विकास से जुड़े मुद्दे अब भी चिंता का विषय

विदेश मंत्री ने कहा कि वैश्विक स्तर पर विकास से जुड़े मुद्दे अब भी बड़ी चिंता बने हुए हैं। कई देश ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य संकट, उर्वरक उपलब्धता, स्वास्थ्य सेवाओं और वित्तीय संसाधनों तक पहुंच जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि BRICS इन देशों को प्रभावी समाधान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

जयशंकर ने आर्थिक मजबूती और सप्लाई चेन की विश्वसनीयता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्थिर और विविध बाजार वैश्विक अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए बेहद जरूरी हैं। इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन को एक गंभीर वैश्विक चुनौती बताते हुए उन्होंने कहा कि सतत विकास को आगे बढ़ाने के साथ समानता और साझी लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों के सिद्धांतों का पालन जरूरी है।

उन्होंने तेजी से बदलती तकनीकों का जिक्र करते हुए कहा कि तकनीकी बदलाव वैश्विक शासन और आर्थिक ढांचे को प्रभावित कर रहे हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इन तकनीकों का इस्तेमाल समावेशी विकास और बेहतर वैश्विक प्रशासन के लिए किया जाए।

ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की यह बैठक 14 और 15 मई तक आयोजित हो रही है। भारत ने इस वर्ष 1 जनवरी से BRICS की अध्यक्षता संभाली है। इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में भी BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर चुका है।

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