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WB: सरकार का स्कूल सेवा आयोग के विकेंद्रीकरण का निर्णय, भर्ती में पारदर्शिता और अनियमितताएं रोकना उद्देश्य

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Sandhya Kumari Updated Thu, 14 May 2026 01:29 PM IST
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सार

पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डब्ल्यूबीएसएससी और प्राथमिक शिक्षक भर्ती प्रणाली का विकेंद्रीकरण करने का फैसला किया है। पांच क्षेत्रीय कार्यालय फिर सक्रिय होंगे, डीपीएससी को स्वायत्तता मिलेगी और कथित दागी उम्मीदवारों से वसूली की तैयारी शुरू कर दी गई है।

State Government Decision Decentralize the School Service Commission Ensuring Transparency in Recruitment
शुभेंदु अधिकारी, मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल - फोटो : ANI
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विस्तार

पश्चिम बंगाल में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य स्कूल सेवा आयोग (डब्ल्यूबीएसएससी) का विकेंद्रीकरण करने का निर्णय लिया है। यह कदम भर्ती प्रक्रिया में अधिक दक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है, क्योंकि आयोग पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं से घिरा था। इस पहल के तहत, डब्ल्यूबीएसएससी को पांच क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से संचालित करने की पुरानी प्रणाली को फिर से शुरू किया जाएगा।

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भविष्य की भर्तियों को निष्पक्ष बनाने का लक्ष्य 

राज्य शिक्षा विभाग के सूत्रों ने बताया कि यह निर्णय पिछली अनियमितताओं को दूर करने और भविष्य की भर्तियों को निष्पक्ष बनाने के लिए लिया गया है। 1 अप्रैल, 1997 को वाम मोर्चा सरकार के दौरान डब्ल्यूबीएसएससी की स्थापना हुई थी, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु के नेतृत्व में आयोग को इन पांच क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से विकेंद्रीकृत तरीके से काम करना था। हालांकि, 2011 में ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद, इन पांच क्षेत्रीय कार्यालयों को निष्क्रिय कर दिया गया था और स्कूल-नौकरी भर्ती की पूरी प्रणाली आयोग के मुख्यालय आचार्य सदन, साल्ट लेक, कोलकाता से संचालित की जाती थी।

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स्कूल सेवा आयोग की पुरानी प्रणाली बहाल

राज्य सरकार ने अब राज्य-संचालित स्कूलों में शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती के संबंध में पांच क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से काम करने की पुरानी प्रणाली पर लौटने का फैसला किया है। हालांकि, महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय आयोग के मुख्यालय साल्ट लेक से केंद्रीय रूप से लिए जाएंगे। यह कदम भर्ती प्रक्रिया को स्थानीय स्तर पर अधिक सुलभ और जवाबदेह बनाने में मदद करेगा। विकेंद्रीकरण से निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी आने और पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।


ये भी पढ़ें- West Bengal: दागी शिक्षकों से वेतन वसूली का आदेश, 26,000 नौकरियां रद्द, सूची में टीएमसी नेताओं के करीबी शामिल

प्राथमिक शिक्षक भर्ती में स्वायत्तता

इसी तरह, नई राज्य सरकार ने राज्य-संचालित स्कूलों में प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को भी विकेंद्रीकृत करने का निर्णय लिया है। इसके लिए विभिन्न जिला प्राथमिक विद्यालय परिषद (डीपीएससी) को स्वायत्त दर्जा दिया जाएगा। पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती में भी बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई थीं। अब तक, डीपीएससी पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड (डब्ल्यूबीपीपीई) की जिला-स्तरीय विस्तारित शाखाओं की तरह काम कर रहे थे। स्वायत्तता मिलने से डीपीएससी अपने स्तर पर भर्ती संबंधी निर्णय ले सकेंगे।

दागी उम्मीदवारों से वसूली की तैयारी

राज्य शिक्षा विभाग ने पहले ही सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं। उन्हें अपने-अपने जिलों में उन पहचान किए गए दागी उम्मीदवारों की सूची संकलित करने को कहा गया है, जिन्होंने नकदी के बदले विभिन्न राज्य-संचालित स्कूलों में शिक्षण और गैर-शिक्षण पद प्राप्त किए थे।

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