सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   India News ›   EC begins delisting 476 registered unrecognised political parties for flouting key norms

ECI: चुनावी नियमों का पालन न करने पर 476 राजनीतिक दलों पर होगा एक्शन, पहले 334 पार्टियों पर हुई थी कार्रवाई

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Mon, 11 Aug 2025 08:30 PM IST
विज्ञापन
सार

बिहार में एसआईआर और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की तरफ से वोट चोरी के आरोप के बीच चुनाव आयोग अपना काम बड़ी मजबूती से कर रहा है। बता दें कि चुनावी नियमों का पालन न करने पर आयोग ने 476 राजनीतिक दलों को लिस्ट से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

EC begins delisting 476 registered unrecognised political parties for flouting key norms
चुनाव आयोग - फोटो : PTI
विज्ञापन

विस्तार

चुनाव आयोग (ईसी) ने सोमवार को कहा कि उसने 476 पंजीकृत लेकिन अप्रतिष्ठित राजनीतिक दलों को लिस्ट से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन दलों ने जरूरी नियमों का पालन नहीं किया है और पिछले छह वर्षों में एक भी चुनाव नहीं लड़ा है। यह कदम उस एक दिन बाद आया है जब आयोग ने ऐसे 334 दलों को लिस्ट से हटा दिया था, जिन्होंने चुनावी कानूनों और नियमों का पालन नहीं किया।

Trending Videos


यह भी पढ़ें - Election Commission: 334 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल सूची से हटाए गए, चुनाव आयोग का बड़ा फैसला
विज्ञापन
विज्ञापन


सीईओ को निर्देश- दलों को जारी करें कारण बताओ नोटिस
आयोग ने बताया कि इस दूसरी सूची में शामिल 476 दल देश के अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से हैं। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) को निर्देश दिया गया है कि वे इन दलों को कारण बताओ नोटिस जारी करें और सुनवाई के बाद ही अंतिम निर्णय लें।

किस राज्य से कितने दल?
इसमें सबसे ज्यादा दल उत्तर प्रदेश से 121, महाराष्ट्र में 44, तमिलनाडु में 42 और दिल्ली में 41 से हैं। बिहार, जहां इस साल चुनाव होने हैं, वहां 15 दलों को लिस्ट से हटाने की प्रक्रिया चल रही है।

सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद शुरू की गई 'डीलिस्ट' प्रक्रिया
चुनाव आयोग 2001 से अब तक तीन-चार बार ऐसे निष्क्रिय दलों को हटा चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले आयोग को राजनीतिक दलों को मान्यता खत्म करने से रोक दिया था, लेकिन ईसी ने 'डीलिस्ट' करने का तरीका अपनाया है। डीलिस्ट किए गए दल चाहें तो बाद में फिर से सूची में शामिल हो सकते हैं। कुछ दलों पर पहले आयकर कानून और मनी लॉन्ड्रिंग कानून तोड़ने के आरोप भी लगे थे।

यह भी पढ़ें - ONOE: 'वन नेशन, वन इलेक्शन' पर राजनीतिक विशेषज्ञों से हुई चर्चा, जेपीसी प्रमुख बोले- देश के विकास के लिए जरूरी

पंजीकरण के बाद राजनीतिक दलों को मिलता ये लाभ
देश में सभी राष्ट्रीय, राज्य और अप्रतिष्ठित राजनीतिक दल, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 29A के तहत पंजीकृत होते हैं। पंजीकरण के बाद उन्हें टैक्स छूट जैसी सुविधाएं मिलती हैं। अधिकारियों के मुताबिक, यह अभियान राजनीतिक व्यवस्था को साफ-सुथरा बनाने के लिए चलाया जा रहा है, जिसमें ऐसे दलों को हटाया जा रहा है जिन्होंने 2019 के बाद से लोकसभा, विधानसभा या उपचुनाव में हिस्सा नहीं लिया या जो अब अस्तित्व में ही नहीं हैं।

SIR पर विपक्ष का प्रदर्शन, ड्राफ्ट रोल एंट्री पर बोला आयोग
बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दलों ने सोमवार को संसद से चुनाव आयोग तक मार्च किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोककर हिरासत में ले लिया। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे भी शामिल थे। विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया 'वोट चोरी' और मतदाताओं को वंचित करने के लिए है। वहीं, चुनाव आयोग ने कहा कि 1 से 11 अगस्त तक किसी भी राजनीतिक दल ने नाम जोड़ने या हटाने पर आपत्ति नहीं दी है। अब तक 10,570 व्यक्तियों ने अपने नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया है। दावा-आपत्ति की अंतिम तारीख 1 सितंबर है।
 

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed