ECI: चुनावी नियमों का पालन न करने पर 476 राजनीतिक दलों पर होगा एक्शन, पहले 334 पार्टियों पर हुई थी कार्रवाई
बिहार में एसआईआर और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की तरफ से वोट चोरी के आरोप के बीच चुनाव आयोग अपना काम बड़ी मजबूती से कर रहा है। बता दें कि चुनावी नियमों का पालन न करने पर आयोग ने 476 राजनीतिक दलों को लिस्ट से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
विस्तार
चुनाव आयोग (ईसी) ने सोमवार को कहा कि उसने 476 पंजीकृत लेकिन अप्रतिष्ठित राजनीतिक दलों को लिस्ट से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन दलों ने जरूरी नियमों का पालन नहीं किया है और पिछले छह वर्षों में एक भी चुनाव नहीं लड़ा है। यह कदम उस एक दिन बाद आया है जब आयोग ने ऐसे 334 दलों को लिस्ट से हटा दिया था, जिन्होंने चुनावी कानूनों और नियमों का पालन नहीं किया।
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सीईओ को निर्देश- दलों को जारी करें कारण बताओ नोटिस
आयोग ने बताया कि इस दूसरी सूची में शामिल 476 दल देश के अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से हैं। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) को निर्देश दिया गया है कि वे इन दलों को कारण बताओ नोटिस जारी करें और सुनवाई के बाद ही अंतिम निर्णय लें।
किस राज्य से कितने दल?
इसमें सबसे ज्यादा दल उत्तर प्रदेश से 121, महाराष्ट्र में 44, तमिलनाडु में 42 और दिल्ली में 41 से हैं। बिहार, जहां इस साल चुनाव होने हैं, वहां 15 दलों को लिस्ट से हटाने की प्रक्रिया चल रही है।
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद शुरू की गई 'डीलिस्ट' प्रक्रिया
चुनाव आयोग 2001 से अब तक तीन-चार बार ऐसे निष्क्रिय दलों को हटा चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले आयोग को राजनीतिक दलों को मान्यता खत्म करने से रोक दिया था, लेकिन ईसी ने 'डीलिस्ट' करने का तरीका अपनाया है। डीलिस्ट किए गए दल चाहें तो बाद में फिर से सूची में शामिल हो सकते हैं। कुछ दलों पर पहले आयकर कानून और मनी लॉन्ड्रिंग कानून तोड़ने के आरोप भी लगे थे।
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पंजीकरण के बाद राजनीतिक दलों को मिलता ये लाभ
देश में सभी राष्ट्रीय, राज्य और अप्रतिष्ठित राजनीतिक दल, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 29A के तहत पंजीकृत होते हैं। पंजीकरण के बाद उन्हें टैक्स छूट जैसी सुविधाएं मिलती हैं। अधिकारियों के मुताबिक, यह अभियान राजनीतिक व्यवस्था को साफ-सुथरा बनाने के लिए चलाया जा रहा है, जिसमें ऐसे दलों को हटाया जा रहा है जिन्होंने 2019 के बाद से लोकसभा, विधानसभा या उपचुनाव में हिस्सा नहीं लिया या जो अब अस्तित्व में ही नहीं हैं।
SIR पर विपक्ष का प्रदर्शन, ड्राफ्ट रोल एंट्री पर बोला आयोग
बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दलों ने सोमवार को संसद से चुनाव आयोग तक मार्च किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोककर हिरासत में ले लिया। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे भी शामिल थे। विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया 'वोट चोरी' और मतदाताओं को वंचित करने के लिए है। वहीं, चुनाव आयोग ने कहा कि 1 से 11 अगस्त तक किसी भी राजनीतिक दल ने नाम जोड़ने या हटाने पर आपत्ति नहीं दी है। अब तक 10,570 व्यक्तियों ने अपने नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया है। दावा-आपत्ति की अंतिम तारीख 1 सितंबर है।
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