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भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए ईडी और सीबीआई के अधिकारी कर रहे हैं नेपाल के सिमकार्ड का इस्तेमाल
Thu, 25 Oct 2018 07:27 PM IST
Trainee Trainee
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
Published by: Trainee Trainee
Updated Thu, 25 Oct 2018 07:27 PM IST
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सीबीआई के घटनाक्रम ने कई दूसरी जांच एजेंसियों के कारनामों की पोल खोल कर रख दी है। सामने आया है कि कथित तौर से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआई के कई अधिकारी अपने भ्रष्टाचार के मामलों को छिपाने के लिए नेपाल का सिमकार्ड इस्तेमाल कर रहे हैं। सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना, जिन पर भ्रष्टाचार के मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद उन्हें छुट्टी पर भेज दिया गया है, ने गत दिनों सीवीसी और कैबिनेट सचिव को दी अपनी शिकायत में इस बात का जिक्र किया है।
उधर, रॉ चीफ अनिल दसमाना की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात के बाद माना जा रहा है कि रॉ के स्पेशल सेक्रेटरी सामंत गोयल, जिनका नाम मोईन कुरैशी मामले में लिया जा रहा है, वे जल्द ही यहां से अपने मूल कॉडर में भेजे जा सकते हैं। जांच एजेंसी के सूत्रों का कहना कि अफसरों द्वारा दूसरे देश, खासतौर से नेपाल के सिमकार्ड का जमकर इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका फायदा यह होता है कि उनकी बातचीत दूसरी भारतीय एजेंसियों के हाथ नहीं लगती। वे विदेश में या स्वदेश में किसके साथ बात कर रहे हैं, यह राज ही बना रहता है।
सीबीआई में मचे बवाल के बाद अब इस राज का पर्दाफाश हुआ है कि ईडी, सीबीआई, डीआरआई और दूसरी खुफिया एजेंसियों के अधिकारी कथित तौर से अपने भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए नेपाल के सिमकार्ड से बातचीत कर रहे हैं। छुट्टी पर जाने से पहले सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना ने सीवीसी और कैबिनेट सचिव को आलोक वर्मा की जो शिकायत भेजी थी, उसमें 13 नंबर पेज पर साफ तौर से सीबीआई और ईडी के तीन अधिकारियों का नाम लिखा है। इनमें राजेंद्र पाल उपाध्याय (आईपीएस), राजेश्वर सिंह (आईपीएस) और विकास मेहता शामिल हैं।
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सीबीआई को टेलीफोन सर्विलांस (टीएस) के द्वारा पता चला है कि ये तीनों अधिकारी नेपाल का सिमकार्ड इस्तेमाल करते हैं। इस बाबत पुख्ता सबूत होने के बाद भी उक्त अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया। अस्थाना के मुताबिक, छह माह के बाद टीएस और टीएस फाइल, सब नष्ट कर दी गई।
अब मोईन कुरैशी केस में भी यह खुलासा हुआ है कि सीबीआई और ईडी के कई अधिकारी दुबई, सिंगापुर और दूसरे देशों में बातचीत करने के लिए इस तरह के सिमकार्ड इस्तेमाल कर रहे थे। उस दौरान सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा, राकेश अस्थाना और ईडी के एक ज्वाइंट डायरेक्टर की विदेशों में हुई बातचीत का ब्योरा डीओपीटी व पीएमओ के पास भी पहुंच गया है।
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उधर, रॉ चीफ अनिल दसमाना की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात के बाद माना जा रहा है कि रॉ के स्पेशल सेक्रेटरी सामंत गोयल, जिनका नाम मोईन कुरैशी मामले में लिया जा रहा है, वे जल्द ही यहां से अपने मूल कॉडर में भेजे जा सकते हैं। जांच एजेंसी के सूत्रों का कहना कि अफसरों द्वारा दूसरे देश, खासतौर से नेपाल के सिमकार्ड का जमकर इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका फायदा यह होता है कि उनकी बातचीत दूसरी भारतीय एजेंसियों के हाथ नहीं लगती। वे विदेश में या स्वदेश में किसके साथ बात कर रहे हैं, यह राज ही बना रहता है।
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सीबीआई में मचे बवाल के बाद अब इस राज का पर्दाफाश हुआ है कि ईडी, सीबीआई, डीआरआई और दूसरी खुफिया एजेंसियों के अधिकारी कथित तौर से अपने भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए नेपाल के सिमकार्ड से बातचीत कर रहे हैं। छुट्टी पर जाने से पहले सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना ने सीवीसी और कैबिनेट सचिव को आलोक वर्मा की जो शिकायत भेजी थी, उसमें 13 नंबर पेज पर साफ तौर से सीबीआई और ईडी के तीन अधिकारियों का नाम लिखा है। इनमें राजेंद्र पाल उपाध्याय (आईपीएस), राजेश्वर सिंह (आईपीएस) और विकास मेहता शामिल हैं।
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सीबीआई को टेलीफोन सर्विलांस (टीएस) के द्वारा पता चला है कि ये तीनों अधिकारी नेपाल का सिमकार्ड इस्तेमाल करते हैं। इस बाबत पुख्ता सबूत होने के बाद भी उक्त अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज नहीं किया गया। अस्थाना के मुताबिक, छह माह के बाद टीएस और टीएस फाइल, सब नष्ट कर दी गई।
अब मोईन कुरैशी केस में भी यह खुलासा हुआ है कि सीबीआई और ईडी के कई अधिकारी दुबई, सिंगापुर और दूसरे देशों में बातचीत करने के लिए इस तरह के सिमकार्ड इस्तेमाल कर रहे थे। उस दौरान सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा, राकेश अस्थाना और ईडी के एक ज्वाइंट डायरेक्टर की विदेशों में हुई बातचीत का ब्योरा डीओपीटी व पीएमओ के पास भी पहुंच गया है।
रॉ के स्पेशल सेक्रेटरी को मूल कॉडर में भेजने की तैयारी...
मोईन कुरैशी मामले में कथित तौर से रॉ के स्पेशल सेक्रेटरी सामंत गोयल का नाम भी सामने आ रहा है। सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने के बाद रॉ चीफ अनिल दसमाना ने भी पीएम को अपनी विंग की स्थिति से अवगत कराया था। बताया जा रहा है कि अब सामंत गोयल को उनके मूल कॉडर पंजाब पुलिस में वापस भेजा जा सकता है। इससे पहले सामंत गोयल ने जब पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह से मुलाकात की थी, तो वह मामला भी सुर्खियों में रहा था। गोयल पंजाब के डीजीपी पद पर जाना चाहते थे।
सूत्रों के मुताबिक, रॉ सेक्रेटरी अनिल दसमाना ने प्रधानमंत्री को मोईन कुरैशी मामले में गोयल की भूमिका को लेकर सभी तथ्यों से अवगत करा दिया है। पीएमओ के पास गोयल और साल 2000 में रॉ चीफ पद से रिटायर हुए देवेश्वर प्रसाद के लड़के सोमेश प्रसाद और मनोज प्रसाद के साथ संबंधों के पुख्ता सबूत हैं। इनके बीच आपस में कई बार बातचीत हुई है। उधर, ईडी में भी बदलाव की संभावना बन गई है। बहुत जल्द वहां ज्वाइंट डायरेक्टर और निचले स्तर के कुछ अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, रॉ सेक्रेटरी अनिल दसमाना ने प्रधानमंत्री को मोईन कुरैशी मामले में गोयल की भूमिका को लेकर सभी तथ्यों से अवगत करा दिया है। पीएमओ के पास गोयल और साल 2000 में रॉ चीफ पद से रिटायर हुए देवेश्वर प्रसाद के लड़के सोमेश प्रसाद और मनोज प्रसाद के साथ संबंधों के पुख्ता सबूत हैं। इनके बीच आपस में कई बार बातचीत हुई है। उधर, ईडी में भी बदलाव की संभावना बन गई है। बहुत जल्द वहां ज्वाइंट डायरेक्टर और निचले स्तर के कुछ अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।