{"_id":"6a2c4f220c921ccd72016a1f","slug":"ed-arrests-2-former-executives-of-reliance-anil-ambani-group-in-pmla-act-2026-06-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"ED: ईडी ने रिलायंस अनिल अंबानी समूह के दो पूर्व अधिकारियों को किया गिरफ्तार, धनशोधन मामले में कार्रवाई","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
ED: ईडी ने रिलायंस अनिल अंबानी समूह के दो पूर्व अधिकारियों को किया गिरफ्तार, धनशोधन मामले में कार्रवाई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: Devesh Tripathi
Updated Fri, 12 Jun 2026 11:55 PM IST
विज्ञापन
सार
ईडी ने कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी और धनशोधन से जुड़े मामले में रिलायंस अनिल अंबानी समूह की कंपनी के दो पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। दोनों पर वित्तीय लेनदेन और ऋण उपयोग से संबंधित अनियमितताओं की जांच चल रही है। एजेंसी उन्हें आगे की पूछताछ के लिए दिल्ली ले जा रही है, जहां इस मामले से जुड़ी जांच दर्ज है।
प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को मुंबई में रिलायंस अनिल अंबानी समूह (आरएएजी) के दो पूर्व अधिकारियों को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया। अधिकारियों ने बताया कि ईडी ने सतीश सेठ और गौतम दोषी, जो दोनों रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड के पूर्व निदेशक रह चुके हैं, को ट्रांजिट रिमांड पर लिया है। ईडी ने बताया कि दोनों अधिकारियों को दिल्ली ले जाया जा रहा है, क्योंकि मामला राष्ट्रीय राजधानी में दर्ज है।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मार्च में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में कथित 114.98 करोड़ रुपये के ऋण धोखाधड़ी की जांच के तहत दोनों के परिसरों पर छापेमारी की थी और मामला दर्ज किया था। सीबीआई ने कहा था कि एसबीआई उन 11 बैंकों के कंसोर्टियम का सदस्य था, जिसने रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड को कुल 735 करोड़ रुपये की टर्म लोन सुविधा मंजूर की थी।
रिलायंस टेलीकॉम से जुड़ा क्या है पूरा विवाद?
रिलायंस अनिल अंबानी समूह (आरएएजी) की कंपनी रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड को दिए गए बैंक ऋणों के कथित दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा मामला हाल के दिनों में चर्चा में रहा है। इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और अन्य एजेंसियां कर रही हैं। आरोप है कि कंपनी को विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थानों से मिले ऋण का इस्तेमाल निर्धारित कारोबारी उद्देश्यों के बजाय अन्य गतिविधियों में किया गया, जिससे बैंकों को भारी नुकसान हुआ।
विज्ञापन
जांच एजेंसियों के अनुसार, रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड ने अपने दूरसंचार कारोबार के विस्तार और संचालन के लिए बैंकों से बड़े पैमाने पर ऋण प्राप्त किए थे। हालांकि, बाद में कंपनी की वित्तीय स्थिति बिगड़ती गई और वह ऋण चुकाने में असमर्थ हो गई। इस दौरान यह संदेह भी सामने आया कि ऋण राशि का एक हिस्सा समूह की अन्य कंपनियों या संबंधित संस्थाओं तक पहुंचाया गया। जांचकर्ताओं का मानना है कि धन के प्रवाह और लेन-देन की संरचना को इस तरह तैयार किया गया था कि वास्तविक उपयोग और लाभार्थियों का पता लगाना कठिन हो जाए।
पीएमएलए एक्ट के तहत ईडी कर रही जांच
ईडी की जांच धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत चल रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या बैंक ऋणों को कथित रूप से गलत तरीके से डायवर्ट किया गया और बाद में उन रकमों को विभिन्न कंपनियों तथा वित्तीय लेन-देन के जरिए छिपाने का प्रयास किया गया। इसी सिलसिले में ईडी ने रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड के दो पूर्व निदेशकों—सतीश सेठ और गौतम दोषी—को गिरफ्तार किया है। एजेंसी का आरोप है कि दोनों अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और ऋण राशि के उपयोग से संबंधित निर्णयों में महत्वपूर्ण रही थी।
इस मामले की पृष्ठभूमि में दूरसंचार क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और रिलायंस कम्युनिकेशंस समूह की वित्तीय चुनौतियां भी शामिल हैं। रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड, रिलायंस कम्युनिकेशंस के कारोबारी ढांचे का हिस्सा थी। कंपनी पर बढ़ते कर्ज, घटते राजस्व और बाजार में प्रतिस्पर्धा के दबाव का असर पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप उसकी वित्तीय स्थिति कमजोर होती चली गई। बाद में समूह की कई कंपनियां दिवाला प्रक्रिया और कर्ज पुनर्गठन से जुड़ी कार्यवाहियों का सामना करती रहीं।
जांच एजेंसियों का कहना है कि बैंक ऋणों से जुड़े दस्तावेज, फंड ट्रांसफर के रिकॉर्ड और विभिन्न कंपनियों के बीच हुए लेन-देन की विस्तृत जांच की जा रही है। यदि यह साबित होता है कि ऋण राशि का उपयोग स्वीकृत उद्देश्य के विपरीत किया गया था या बैंकों को गुमराह कर धन प्राप्त किया गया था, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और धन शोधन जैसे आरोप मजबूत हो सकते हैं।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मार्च में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में कथित 114.98 करोड़ रुपये के ऋण धोखाधड़ी की जांच के तहत दोनों के परिसरों पर छापेमारी की थी और मामला दर्ज किया था। सीबीआई ने कहा था कि एसबीआई उन 11 बैंकों के कंसोर्टियम का सदस्य था, जिसने रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड को कुल 735 करोड़ रुपये की टर्म लोन सुविधा मंजूर की थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
रिलायंस टेलीकॉम से जुड़ा क्या है पूरा विवाद?
रिलायंस अनिल अंबानी समूह (आरएएजी) की कंपनी रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड को दिए गए बैंक ऋणों के कथित दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा मामला हाल के दिनों में चर्चा में रहा है। इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और अन्य एजेंसियां कर रही हैं। आरोप है कि कंपनी को विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थानों से मिले ऋण का इस्तेमाल निर्धारित कारोबारी उद्देश्यों के बजाय अन्य गतिविधियों में किया गया, जिससे बैंकों को भारी नुकसान हुआ।
जांच एजेंसियों के अनुसार, रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड ने अपने दूरसंचार कारोबार के विस्तार और संचालन के लिए बैंकों से बड़े पैमाने पर ऋण प्राप्त किए थे। हालांकि, बाद में कंपनी की वित्तीय स्थिति बिगड़ती गई और वह ऋण चुकाने में असमर्थ हो गई। इस दौरान यह संदेह भी सामने आया कि ऋण राशि का एक हिस्सा समूह की अन्य कंपनियों या संबंधित संस्थाओं तक पहुंचाया गया। जांचकर्ताओं का मानना है कि धन के प्रवाह और लेन-देन की संरचना को इस तरह तैयार किया गया था कि वास्तविक उपयोग और लाभार्थियों का पता लगाना कठिन हो जाए।
पीएमएलए एक्ट के तहत ईडी कर रही जांच
ईडी की जांच धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत चल रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या बैंक ऋणों को कथित रूप से गलत तरीके से डायवर्ट किया गया और बाद में उन रकमों को विभिन्न कंपनियों तथा वित्तीय लेन-देन के जरिए छिपाने का प्रयास किया गया। इसी सिलसिले में ईडी ने रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड के दो पूर्व निदेशकों—सतीश सेठ और गौतम दोषी—को गिरफ्तार किया है। एजेंसी का आरोप है कि दोनों अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और ऋण राशि के उपयोग से संबंधित निर्णयों में महत्वपूर्ण रही थी।
इस मामले की पृष्ठभूमि में दूरसंचार क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और रिलायंस कम्युनिकेशंस समूह की वित्तीय चुनौतियां भी शामिल हैं। रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड, रिलायंस कम्युनिकेशंस के कारोबारी ढांचे का हिस्सा थी। कंपनी पर बढ़ते कर्ज, घटते राजस्व और बाजार में प्रतिस्पर्धा के दबाव का असर पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप उसकी वित्तीय स्थिति कमजोर होती चली गई। बाद में समूह की कई कंपनियां दिवाला प्रक्रिया और कर्ज पुनर्गठन से जुड़ी कार्यवाहियों का सामना करती रहीं।
जांच एजेंसियों का कहना है कि बैंक ऋणों से जुड़े दस्तावेज, फंड ट्रांसफर के रिकॉर्ड और विभिन्न कंपनियों के बीच हुए लेन-देन की विस्तृत जांच की जा रही है। यदि यह साबित होता है कि ऋण राशि का उपयोग स्वीकृत उद्देश्य के विपरीत किया गया था या बैंकों को गुमराह कर धन प्राप्त किया गया था, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और धन शोधन जैसे आरोप मजबूत हो सकते हैं।