Bihar News: प्रशांत किशोर के जॉब दांव पर किसे आगे करेगी BJP? किन भाजपाइयों ने बिहारियों को बिहार में नौकरी दी?
Job in Bihar : बांकीपुर से विधायक चुने गए प्रशांत किशोर 10 हजार युवाओं को बिहार में नौकरी दिलाने का दावा कर चर्चा में हैं। लेकिन, भाजपा ज्यादा परेशान नहीं है। PK के इस दांव पर भाजपा अपने किन नेताओं का चेहरा आगे कर सकती है?
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विस्तार
31 साल से भारतीय जनता पार्टी के अभेद्य किले के रूप में चर्चित बांकीपुर के किलाबरदार अब प्रशांत किशोर हैं। प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधायक चुने जाते ही कई बड़ी घोषणाएं कीं, लेकिन ताजातरीन घोषणा 10 हजार नौकरियां अपने स्तर से दिलाने की योजना की है। चर्चा भी खूब है। लेकिन, बहुत आश्चर्य कि भाजपा परेशान नहीं है। सरकार भी नहीं। होती तो भाजपाई मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी PK के एलान के अगले दिन कैबिनेट बैठक में नौकरियों को बहुत ज्यादा तवज्जो मिल गई होती। कम-से-कम जवाब तो दिया ही गया होता। क्यों भाजपा ने नहीं दिखाई है तत्परता और जवाब देना होगा तो किसे आगे करेगी पार्टी, समझिए विस्तार से।
प्रशांत किशोर ने भाजपा के गढ़ में किया एलान
प्रशांत किशोर ने मंगलवार को भाजपा के परंपरागत मतदाताओं के बीच पहुंचकर बड़ा एलान किया था। बांकीपुर विधानसभा की एक सीमा पर स्थित यारपुर राजपूताना में एक कार्यक्रम के दौरान प्रशांत किशोर ने एलान किया था कि बांकीपुर के पढ़े-लिखे बेरोजगार युवा अपना बायोडाटा और सीवी उनके कार्यालय में जमा कराएं, ताकि एक से दो साल में कम-से-कम 10 हजार परिवारों के बच्चों को नौकरी दिलाने की व्यवस्था की जा सके। पीके ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले रोजगार के लिए बिहारियों के पलायन को बड़ा मुद्दा बनाया था, हालांकि तब उनकी जन सुराज पार्टी के 238 में से 236 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी और बाकी दो भी जीत से बहुत दूर रह गए थे। चुनाव में प्रशांत किशोर अंत तक नहीं उतरे थे, लेकिन जब भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के बतौर विधायक इस्तीफे से बांकीपुर का उप चुनाव हुआ तो वह पूरी ताकत के साथ उतरे और जीते। भाजपा भारी मतों से न केवल हारी, बल्कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, मुख्यमंत्री और सारे स्टार प्रचारकों की मिट्टी पलीद हो गई। ऐसे में प्रशांत किशोर की ओर जब बांकीपुर के लोग उम्मीद से देख रहे थे तो उन्होंने जॉब को लेकर बड़ा एलान कर दिया।
भाजपा फिर भी परेशान क्यों नहीं?
प्रशांत किशोर के इस 'जॉब दांव' से भाजपा परेशान नहीं दिख रही है। बयानों में प्रतिकार दिख रहा, लेकिन माकूल जवाब नहीं। ऐसा क्यों? वजह तलाशने पर कुछ नाम सामने आ रहे। यह ऐसे नाम हैं, जिन्होंने बिहार में बिहारियों को नौकरी और स्वरोजगार के अवसर दिए हैं। कुछ ऐसे नेता हैं, जो घोषित रूप से बिजनेस नहीं करते हुए भी अपनों को रोजगार के मौके दे रहे हैं। सत्तारूढ़ रहने के कारण टेंडर से जुड़े कार्यों में भी इनका एडजस्टमेंट हो रहा है।
रोजगार देने वाला सबसे चर्चित परिवार भाजपाई
बिहार के कई चर्चित बिजनेसमैन हैं। सबसे चर्चित उद्यमी दवा कारोबारी रहे हैं। लेकिन, जब राजनीतिज्ञों की बात करें तो भाजपा के संस्थापक सदस्यों में रहे पूर्व राज्यसभा सांसद रवींद्र किशोर सिन्हा सबसे बड़े रोजगार-सृजक के रूप में नजर आते हैं। आरके सिन्हा लंबे समय से बीमार हैं और उनकी राजनीतिक विरासत संभाल रहे इकलौते बेटे ऋतुराज सिन्हा अपनी विभिन्न कंपनियों के साथ स्वरोजगार के अवसर भी बना रहे हैं। इस परिवार के पास प्राइवेट सुरक्षा एजेंसी से लेकर कॉरपोरेट कल्चर की साफ-सफाई सेवा देने वाली कंपनियों का एक बड़ा नेटवर्क है।
'अमर उजाला' ने भविष्य निधि संगठन का रिकॉर्ड निकाला तो सामने आया कि इस पूरी कंपनी के सभी कर्मियों का पीएफ पटना में ही जमा होता है। इनमें से लगभग 40 हजार ऐसे कर्मी हैं, जिनका स्थायी पता बिहार है और उनमें से लगभग आठ हजार पटना के बाशिंदा हैं। इसके अलावा, पिछले दिनों जारी एक सूचना के अनुसार स्वरोजगार सृजित कर करीब दो लाख महिला उद्यमियों को आदि चित्रगुप्त माइक्रो फाइनेंस ने बिहार में ही आगे बढ़ने का अवसर दिया है। इनमें 10-15 प्रतिशत तो पटना की जरूर रही होंगी।
कॉलेज से लेकर दवा कंपनी तक में भाजपाई
भाजपा में इस मुद्दे पर सीधे रिकॉर्ड देकर बात करने वाले सामने नहीं आते हैं, लेकिन अगड़ी जाति के एक मंत्री और एक पूर्व मंत्री के दवा कारोबार में सैकड़ों बिहारियों के काम करने की जानकारी पार्टी के अंदर लोग खूब करते हैं। भाजपा के एक पूर्व प्रदेश अध्यक्ष का उनके जिले के औद्योगिक क्षेत्र में कई तरह की कई इकाइयों के काम करने और उनमें स्थानीय स्तर पर सैकड़ों के रोजगार मिलने की जानकारी भी सभी को है। इसी तरह एक मंत्री सहित दो पूर्व प्रदेश अध्यक्षों के शैक्षणिक संस्थानों में सैकड़ों लोगों के रोजगार की जानकारी भी मिलती है।
एक पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के पेट्रोल पंप से लेकर वेयरहाउस तक के कारोबार में दर्जनों लोगों के काम करने की जानकारी भी सभी के पास है। इसके अलावा, दो पूर्व मंत्रियों में से एक की मखाना फैक्ट्री और दूसरे की वाहन एजेंसी से सैकड़ों लोगों के जुड़कर काम करने की जानकारी भी मिलती है। सिर्फ बड़े ओहदे पर रहे नेता ही नहीं, भाजपा में संगठन से जुड़े कई व्यवसायी स्थानीय स्तर पर रोजगार दे रहे हैं। कोई दवा कंपनी खोलकर तो कोई प्रिंटिंग-विज्ञापन का काम कर। मतलब, भाजपा के यह नेता सामने आकर बताने लगें तो प्रशांत किशोर का दांव पलट सकता है। देखना है कि भाजपा के यह नेता आगे आकर कब तक पत्ते खोलते हैं।
जरूरत पड़ी तो क्या करेगी भाजपा?
युवाओं को रोजगार के सपने दिखाने में सबसे आगे तेजस्वी यादव रहे थे। 2020 के विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा यह दिखा था, लेकिन मतदान पर इसका असर नहीं पड़ा था। 2025 के विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर ने इसे मुद्दा बनाया, हालांकि मतदान पर प्रभाव नहीं दिखा। ऐसे में भाजपा इसपर 'प्लान बी' रखे तो आश्चर्य नहीं। दरअसल, भाजपा के पास दर्जनभर नेता तो ऐसे जरूर हैं, जो रोजगार दे रहे हैं। इनमें से कुछ प्रशांत किशोर के कारण 2025 चुनाव के दौरान सुर्खियों में रहे थे। भाजपा इनके प्रयासों से अबतक सृजित रोजगार को दिखाने की योजना रख रही है।