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जन-समस्याओं और खोजी नजरिए ने स्नातक से पहले 'आदतन पत्रकार' बना दिया। 1996 से 4 साल तक अंशकालिक पत्रकार के रूप में तमाम झंझावातों को झेलने के बाद वर्ष 2000 से नौकरी शुरू हुई दिल्ली में डेस्क पर। PGJMC पूरा हुआ और पटना में बिहार के सबसे बड़े अखबार में रिपोर्टिंग की। पटना में सिटी रिपोर्टिंग हेड तक का सफर चला। इस बीच जमशेदपुर संस्करण का प्रभारी भी। 2005 में डिजिटल का सालभर का अनुभव। फिर, दिल्ली की यात्रा में NCR के नोएडा और ट्रांस हिंडन ब्यूरो की कमान। बिहार लौटा तो भागलपुर होते हुए नए लॉन्च हुए ... ...और पढ़ें
जन-समस्याओं और खोजी नजरिए ने स्नातक से पहले 'आदतन पत्रकार' बना दिया। 1996 से 4 साल तक अंशकालिक पत्रकार के रूप में तमाम झंझावातों को झेलने के बाद वर्ष 2000 से नौकरी शुरू हुई दिल्ली में डेस्क पर। PGJMC पूरा हुआ और पटना में बिहार के सबसे बड़े अखबार में रिपोर्टिंग की। पटना में सिटी रिपोर्टिंग हेड तक का सफर चला। इस बीच जमशेदपुर संस्करण का प्रभारी भी। 2005 में डिजिटल का सालभर का अनुभव। फिर, दिल्ली की यात्रा में NCR के नोएडा और ट्रांस हिंडन ब्यूरो की कमान। बिहार लौटा तो भागलपुर होते हुए नए लॉन्च हुए राष्ट्रीय अखबार में इन्वेस्टिगेटिव विंग को लीड किया। लॉन्चिंग के दिन ही बिहार सरकार के फर्जी अधिकारी को बर्खास्त कराने के बाद टीम को साथ लेकर अनगिनत घोटाले-फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया। इसके बाद डिजिटल में बिहार की पहली लॉन्चिंग का एडिटर रहा। फिर भोपाल, दिल्ली होते हुए वापस गृह क्षेत्र बिहार के लिए अमर उजाला को लीड कर रहा हूं। अब झारखंड भी। 'आदतन पत्रकार' होने के कारण राजनीति में दोस्त कम, दुश्मन ज्यादा। समाज में दुश्मन कम, दोस्त ज्यादा।
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