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शब्दों के पीछे का चेहरा
फिल्मी गॉसिप और खांटी बिजनेस को छोड़ हर विषय पर लेखन। राजनीति, शिक्षा, स्वास्थ्य, जन-सेवा और अपराध की ब्रेकिंग, इन्वेस्टिगेटिव, एक्सप्लेनर और विश्लेषणों पर ज्यादा काम। नवंबर 2022 से 'अमर उजाला' के लिए बिहार की जिम्मेदारी संभाल रहे। 2025 से झारखंड भी।
मेरी कहानी, मेरी बुनियाद
मैट्रिक के दौरान बेगूसराय छोड़कर पटना को मुकाम बनाया। मैट्रिक-इंटर की पढ़ाई के दौरान 'संपादक के नाम पत्र’ लिखते हुए पत्रकारिता का बीज फूटा। वर्ष 1995 स ...
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शब्दों के पीछे का चेहरा
फिल्मी गॉसिप और खांटी बिजनेस को छोड़ हर विषय पर लेखन। राजनीति, शिक्षा, स्वास्थ्य, जन-सेवा और अपराध की ब्रेकिंग, इन्वेस्टिगेटिव, एक्सप्लेनर और विश्लेषणों पर ज्यादा काम। नवंबर 2022 से 'अमर उजाला' के लिए बिहार की जिम्मेदारी संभाल रहे। 2025 से झारखंड भी।
मेरी कहानी, मेरी बुनियाद
मैट्रिक के दौरान बेगूसराय छोड़कर पटना को मुकाम बनाया। मैट्रिक-इंटर की पढ़ाई के दौरान 'संपादक के नाम पत्र’ लिखते हुए पत्रकारिता का बीज फूटा। वर्ष 1995 से फीचर लेखन और स्पेशल ग्राउंड रिपोर्ट के रास्ते पत्रकारिता में प्रवेश। इस दौरान विज्ञापन एजेंसी, जनसंपर्क की प्रतिष्ठित कंपनी और न्यूज एजेंसी में भी काम किया।2003 से लगातार देश के प्रतिष्ठित शीर्ष पांच मीडिया प्रतिष्ठानों में काम किया। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश में काम करने का अनुभव। हिंदी में स्नातक और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर।
शब्दों की लय
‘आदतन पत्रकार’। इन्वेस्टिगेटिव और एनालिटिकल एक्सप्लेनर मोड में ज्यादा काम। खबरों को सबसे पहले लाने की छटपटाहट और पाठकों को पढ़ाने के नजरिये की वजह से अब डिजिटल में कार्यरत। 'अमर उजाला’ में बिहार-झारखंड की जिम्मेदारी। राजनीति और अपराध की इन्वेस्टिगेटिव और जन-उपयोग से जुड़ी खबरों में एक्सप्लेनर पर बीच-बीच में लेखन भी। बिहार में 'द केरल स्टोरी’ सीरीज के लिए ग्राउंड से रिपोर्टिंग। 'आदतन पत्रकार' होने के कारण राजनीति में दोस्त कम, दुश्मन ज्यादा। समाज में दुश्मन कम, दोस्त ज्यादा।
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