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Tejashwi Yadav: सम्राट चौधरी के बहुमत प्रस्ताव पर MLA की गिनती नहीं चाहेंगे तेजस्वी यादव; ऐसा क्यों?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: प्रशांत तिवारी Updated Fri, 24 Apr 2026 10:34 AM IST
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सार

Bihar Vidhan Sabha: बिहार विधानसभा में राज्य की नई सरकार आज बहुमत प्रस्ताव पेश करेगी। इसके लिए फ्लोर टेस्ट सत्तारूढ़ एनडीए चाहेगा, लेकिन विपक्षी महागठबंधन नहीं। खासकर राजद और तेजस्वी यादव तो बिल्कुल नहीं। वजह समझिए।
 

leader of opposition bihar vidhan sabha minimum mla requirement for tejashwi yadav bihar floor test
तेजस्वी यादव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महज एक विधायक के कारण तेजस्वी यादव के पास विपक्ष के नेता की कुर्सी आ गई। वह 25 की जगह 24 विधायक लेकर विधानसभा आते तो नियमानुसार उनका हक चला जाता। मतलब, बगैर विपक्ष के नेता ही विधानसभा की कार्यवाही चलती। विपक्षी होते, लेकिन सभी अपने विधायक दल के नेता होते। बीच में राज्यसभा चुनाव हुआ तो राजद के एक विधायक गायब हो गए थे। आज जब बिहार विधानसभा में राज्य की सम्राट चोधरी सरकार बहुमत प्रस्ताव पेश कर रही है तो यह माना जा रहा है कि राजद या तेजस्वी यादव आज फ्लोर टेस्ट से बचकर हो-हंगामा की राह निकालेंगे। सत्ता पक्ष के विधायकों की गिनती भले ही एनडीए करा ले, विपक्षी विधायकों के हाथों की गिनती न हो- यह राजद की इच्छा भी होगी और शायद मजबूरी भी।

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नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी के लिए कितने विधायक चाहिए?
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी के लिए दल को 25 विधायकों की जरूरत पड़ती है। कहने को महागठबंधन कई दलों का गठबंधन है, लेकिन तकनीकी रूप से एक दल के पास 25 विधायक हों तो उसे ही यह कुर्सी मिलती है। विपक्ष के कई दलों के पास अगर 25 से ज्यादा विधायक होते तो सर्वाधिक विधायकों वाली पार्टी का दावा बनता। दरअसल, बिहार विधानसभा में 243 विधायक होते हैं। इस हिसाब से 10 प्रतिशत, यानी 24.3 विधायक वाले को विपक्ष का नेता बनाया जा सकता है। बिहार चुनाव 2025 में राजद के 25 विधायक बने, इसलिए यह कुर्सी तेजस्वी यादव के पास रह गई। कांग्रेस सहित महागठबंधन के बाकी दल भी उनके साथ हैं और इस हालत में नहीं कि वह अपने लिए यह पद मांग सकें।
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भाजपा को एक विधायक का नुकसान, मगर ताकत सबसे ज्यादा
2025 चुनाव के बाद गठित बिहार विधानसभा में फिलहाल 242 विधायक हैं। चुनाव 243 सीटों पर हुआ था। विधायक भी सभी 243 चुने गए थे। इनमें से सत्तारूढ़ एनडीए के पास 202 विधायक थे, जिनमें भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद संख्या घटकर 201 रह गई है। 122 के जादुई आंकड़े से यह अब भी 79 अधिक है। भाजपा के 88, जदयू के 85, लोजपा (रामविलास) के 19, हम (सेक्युलर) के पांच और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के चार विधायक शामिल हैं। दूसरी तरफ, महागठबंधन के कुल विधायकों की संख्या 35 विधायक है। इसमें राजद के 25, कांग्रेस के छह, वामदल के तीन और एक आईआईपी का एक विधायक हैं। अन्य दलों में AIMIM के पांच और बसपा का एक विधायक शामिल है। इन दोनों दलों ने पिछले महीने राज्यसभा चुनाव के दौरान महागठबंधन का साथ दिया था। महागठबंधन की संख्या उस तरह से 41 होती, लेकिन राज्यसभा चुनाव के समय कांग्रेस के तीन और राजद के एक विधायक सदन से गायब रह गए थे। यही कारण है कि राज्यसभा में महागठबंधन का इकलौता प्रत्याशी भी हार गया था। अब उसी आधार पर कहा जा रहा है कि तेजस्वी यादव शुक्रवार को विधानसभा में सम्राट चौधरी के बहुमत प्रस्ताव पर संख्या-बल को लेकर किसी खेल में नहीं उतरेंगे। इसकी तैयारी पहले ही हो भी गई है, क्योंकि सत्ता की तरह ही विपक्ष ने भी अपने दलों के लिए उपस्थिति का व्हिप जारी नहीं किया है।

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