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Vikramshila Setu: 'गिरने वाला हूं'- डेढ़ महीने पहले विक्रमशिला सेतु ने बताया था; अफसर बोल रहे थे- सुरक्षित है

Kumar Jitendra Jyoti Kumar Jitendra Jyoti
Updated Mon, 04 May 2026 10:37 AM IST
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सार

Vikramshila Setu News : बड़े हादसे के पहले कभी-कभी संकेत सामने आते हैं। विक्रमशिला पुल ने तो बाकायदा डेढ महीने पहले बड़ा संकेत दिया था। अब उन अफसरों की गर्दन पकड़ी जानी चाहिए, जिन्होंने उलटा जवाब दिया था।

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विक्रमशिला सेतु ने गिरने से पहले भी बचा ली लोगों की जान। - फोटो : amar ujala digital
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विस्तार

विक्रमशिला सेतु ने डेढ़ महीने का वक्त दिया था कि उसे ठीक से जांचा जाए। भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाई जाए। लेकिन, अफसरों ने विक्रमशिला सेतु की ही बात नहीं मानी। वह मूक है, इसलिए संकेत दिए थे। ताकि, जांच हो और इस तरह टूटकर गिरने से बच जाए। इसी तरह का अंतिम संकेत रविवार मध्य रात्रि धाराशायी होने से पहले दिया, इसलिए जानें बच गईं। नहीं तो रात में भी कम-से-कम आठ-दस लोग तो गंगा में वाहनों सहित समा ही जाते। दिन में अंतिम संकेत दिए हादसा होता तो संख्या सौ भी हो सकती थी। विक्रमशिला सेतु ने अंतिम संकेत देकर जान बचाई, लेकिन डेढ़ महीने पहले दिए संकेत पर काम होता तो आज यह खबर नहीं होती।

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वह संकेत, जो 20 मार्च को विक्रमशिला सेतु ने खुद दिया था ताकि जांच करा ले सरकार। - फोटो : amar ujala digital
प्रोटेक्शन वाल बहा, तभी जागा नहीं सिस्टम; अब नतीजा सामने

20-21 मार्च को विक्रमशिला सेतु ने अपनी ओर राज्य सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया था। उस समय बिहार की राजनीति में अस्थिरता का दौर था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिल्ली जाने की तैयारी कर ली थी। कुर्सी पर थे, लेकिन नए मुख्यमंत्री के नाम का इंतजार था। विभाग भी उसी हिसाब से उधेड़बुन में थे। अधिकारी भी मस्त। अगर ऐसा नहीं होता तो डेढ़ महीने पहले विक्रमशिला सेतु के पिलर का प्रोटेक्शन वाल जब ढहकर गंगा में बहा, तभी विस्तार से जांच हो जाती और यह नौबत नहीं आती। पिलर को कवर करने वाला प्रोटेक्शन वाल टूटकर गंगा में समाया तो अधिकारियों ने सिर्फ औपचारिकता की और भ्रमण के बाद कह दिया कि "उसकी जरूरत वैसे भी नहीं थी तो बह जाने से पुल पर अंतर नहीं पड़ता। सेतु सुरक्षित है।" तो, अब सेतु बिल्कुल टूट कर गिर गया है। कहने को कहा जा सकता है कि ऊपर से गिरा है, पिलर नहीं; लेकिन वास्तव में गंभीरता से जांच होती तो यह भी नहीं होता- इसमें शक नहीं।


10 साल से तकनीकी मरम्मत नहीं, 'अमर उजाला' ने साफ कहा था

20 मार्च को 'अमर उजाला' ने "विक्रमशिला पुल के खंभे 17-19 की सुरक्षा दीवारें तेज बहाव से क्षतिग्रस्त, वर्षों से नहीं हुई मरम्मत" शीर्षक से प्रकाशित खबर में साफ-साफ लिखा था कि 2016 के बाद से इस पुल की तकनीकी मरम्मत नहीं कराई गई है। बाहर से ही रंग-रोगन और हल्के काम कराते हुए इसे चलाया जा रहा है। विक्रमशिला पुल की सुरक्षा दीवारें बहने की इस खबर के बाद सरकारी अफसरों ने भ्रमण किया और सिरे से इसे नकारते हुए दावा किया कि विक्रमशिला सेतु सुरक्षित है। लेकिन, करीब डेढ़ महीने बाद ही विक्रमशिला सेतु ने प्रमाण दे दिया कि वह सुरक्षित नहीं था। उसे मरम्मत की जरूरत थी। 

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