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Bihar CM : 146 दिन सीएम रहे नीतीश कुमार, एक मंत्री ने 26 दिन में छोड़ी थी कुर्सी; सबसे छोटा कार्यकाल कब रहा?

Kumar Jitendra Jyoti Kumar Jitendra Jyoti
Updated Tue, 14 Apr 2026 03:38 PM IST
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सार

Bihar News : नीतीश कुमार 10 बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे। इतनी बार देश में किसी नेता ने इस एक पद की शपथ नहीं ली है। 10वीं बार वह सीएम बने तो 146 दिन रहे। आज उनके इस्तीफे से पहले, मंत्रिपरिषद् के एक सदस्य ने महज 33 दिनों में कुर्सी छोड़ी थी। जानिए, 'नीतीशे सरकार' की कहानी।

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पहले नितिन गए दिल्ली, पीछे नीतीश भी। - फोटो : amar ujala digital
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विस्तार

14 अप्रैल 2026 बिहार की राजनीति का बड़ा दिन है। लगभग 25 साल के दरम्यान ज्यादातर समय मुख्यमंत्री की भूमिका निभाने वाले नीतीश कुमार ने अब यह कुर्सी खाली कर दी है। उन्होंने यह कुर्सी बिहार में पहली बार भारतीय जनता पार्टी का मुख्यमंत्री बनाने के लिए छोड़ी है। इससे पहले, उन्होंने 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम को देख भाजपा को यह कुर्सी ऑफर की थी, लेकिन तब भाजपा ने उनपर ही भरोसा जताया था। इस बार भाजपा ने अपना सीएम बनाने के लिए उन्हें राज्यसभा का रास्ता दिखाया, जिसपर चलने को वह राजी भी हो गए। नीतीश कुमार बिहार में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे। देश में 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने का रिकॉर्ड उनके ही नाम है। नीतीश अब तक इस्तीफा लेने के कारण कई बार चर्चा में रहे, लेकिन यह पहली बार है कि किसी ने उनसे एक तरह से इस्तीफा करा लिया। 25 से 30 के लिए नीतीश कुमार ने जनमत हासिल किया था, लेकिन वह 10वें कार्यकाल में 146 दिन ही सीएम रहे। उनके इस कार्यकाल में एक मंत्री का इस्तीफा हुआ, जो महज 33 दिन मंत्रिपरिषद् में रहे। जानिए, ऐसी ही रोचक बातें।
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अटलजी की तरह नीतीश भी झटका खाकर उबरे
जिस तरह एक समय प्रधानमंत्री दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी शपथ के बाद बहुमत साबित नहीं करने के आधार पर भूतपूर्व हुए और फिर मजबूत वापसी की थी, नीतीश कुमार भी उसी तरह से बिहार की राजनीति में उभरे थे। नीतीश कुमार ने 24 नवंबर 2005 से 14 अप्रैल 2026 के बीच नौ बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस बीच उन्होंने नौ महीने के लिए स्वेच्छा से अपनी कुर्सी जीतन राम मांझी को सौंपी थी और फिर अपनी इच्छा से ही उन्हें उतारा भी था। लोग 2005 से अब तक उन्हें लगातार एक तरह से मुख्यमंत्री देख रहे हैं, लेकिन वह इससे पहले 2000 में भी एक बार मुख्यमंत्री बने थे। तब वह तीन मार्च से 10 मार्च तक मुख्यमंत्री रहे थे। वह बहुमत साबित नहीं कर सके और पांच साल के लिए बिहार में राष्ट्रीय जनता दल के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार बनी थी। उस सरकार में पहले लालू यादव और फिर उनकी पत्नी राबड़ी देवी मुख्यमंत्री रहीं थीं। यानी, नीतीश कुमार राबड़ी देवी के बाद एक तरह से मुख्यमंत्री पद का पर्याय बन गए थे।
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नीतीश कुमार इस्तीफा लेने के लिए मशहूर रहे
बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार इस्तीफा लेने के लिए भी चर्चित रहे हैं। खासकर, भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की अपनी नीति के आधार पर। नीतीश कुमार जब बिहार की राजनीति में जनता दल यूनाईटेड को मजबूती से लेकर चल रहे थे, तब तो उन्होंने इस नीति से समझौता नहीं ही किया- उसके बाद भी नहीं। वह भले ही 2015 में महागठबंधन के जनादेश पर मुख्यमंत्री बने, लेकिन सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को देखते हुए ही एनडीए में वापस आए थे। यह तो गठबंधन को लेकर नीति थी। वैसे, नीतीश कुमार अपने मंत्रिपरिषद् को लेकर भी संजीदा रहे। खासकर अपनी पार्टी को लेकर। 2005 में अपनी सरकार के मंत्री जीतन राम मांझी, 2008 में मंत्री आरएन सिंह, 2011 में मंत्री रामाधार सिंह से इस्तीफा लिया था। बाद में जब भ्रष्टाचार के आरोपों से इन्हें मुक्ति मिली तो वापस यह सभी मंत्री बने थे। 2015 में मंत्री अवधेश कुशवाहा, 2018 में मंजू वर्मा और 2020 में डॉ. मेवालाल चौधरी से तत्कालीन मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार ने इस्तीफा लिखवाया था। यह तीनों वापस मंत्री नहीं बनाए गए। जब तक नीतीश खुद बड़े और कड़े फैसले लेते रहे, वह इस्तीफा लेने के लिए भी चर्चित रहे। पिछले कुछ वर्षों में उनके मंत्रियों पर आरोप लगे भी तो नीतीश कुमार ने ऐसी कार्रवाई नहीं कर अपनी छवि को थोड़ा नरम कर लिया।

मंत्री का इस्तीफा, अब अपना भी इस्तीफा
20 नवंबर 2025 को नीतीश कुमार ने बिहार के 10वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। इसके बाद भाजपा मुख्यालय सक्रिय हुआ। महज 26 दिनों के बाद नीतीश मंत्रिमंडल के सदस्य और पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट के विधायक नितिन नवीन ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। नितिन नवीन को तब भाजपा ने कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया था। केंद्र की राजनीति में पदार्पण के लिए नितिन ने तब मंत्री पद से इस्तीफा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सौंपा था। इसके बाद नितिन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। नए साल में सबसे बड़ी राजनीतिक घटना तब हुई, जब नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने के लिए नामांकन भरा। राज्यसभा के लिए ही नितिन नवीन ने भी नामांकन किया। दोनों राज्यसभा सदस्य चुने गए। नितिन ने विधानसभा और नीतीश ने विधान परिषद् की सदस्यता का त्याग किया। दिल्ली जाकर नीतीश राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ले चुके। अब उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी त्याग दी है। 
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