Bihar : युद्ध में सुरक्षा का पूर्वाभ्यास कैसे करते हैं? बिहार के छह जिलों में क्यों-कब-कैसे होगा ब्लैक आउट
Bihar News : वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए युद्ध के पूर्वाभ्यास में बचाव पर फोकस है। क्योंकि, बचाव में नागरिक की अहम भूमिका होती है। बिहार में नागरिकों की इसी भूमिका की जांच के लिए 14 मई को ब्लैक आउट मॉक ड्रिल किया जा रहा है। छह जिलों में होगा।
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जब युद्ध होता है, तो घर की एक छोटी-सी रोशनी को निशाना बनाकर दुश्मन देश पूरे इलाके को तबाह और बर्बाद कर सकते हैं। यानी, अगर एक भी रोशनी दिख गई, तो उस पर निशाना साधने से हजारों लोगों की जान जा सकती है। इसके विपरीत, यदि रोशनी न हो, तो दुश्मन के लिए वह 'अंधेरे में तीर चलाने' जैसा होगा। इन्हीं आशंकाओं से बचने के लिए 'ब्लैकआउट मॉक ड्रिल' किया जाता है।
मॉक ड्रिल के लिए यह छह जिले क्यों चिह्नित?
गुरुवार, 14 मई को बिहार के पटना, किशनगंज, बेगूसराय, पूर्णिया, अररिया और कटिहार में यह मॉक ड्रिल आयोजित किया जा रहा है। राजधानी होने के कारण पटना का महत्व सर्वाधिक है, वहीं औद्योगिक जिला होने के नाते बेगूसराय भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, सीमांचल के चार जिलों- किशजगंज, पूर्णिया, अररिया और कटिहार को भी सरकार का विशेष ध्यान है, क्योंकि ये बांग्लादेश के काफी करीब होने के कारण संवेदनशील हैं। इन 6 जिलों में गुरुवार शाम 6:58 बजे सायरन की तेज आवाज गूंजेगी, जिसके बाद शाम 7:00 बजे से 7:15 बजे तक ब्लैकआउट मॉक ड्रिल होगा।
क्या मोबाइल की रोशनी जला सकते हैं?
इस दौरान हर व्यक्ति को अपने आसपास की तमाम रोशनी बंद करनी होंगी। बिजली कटने पर इन्वर्टर या इमरजेंसी लाइट भी नहीं जलानी है। इस दौरान सैटेलाइट के जरिए तस्वीरें भी ली जाएंगी ताकि यह देखा जा सके कि इन 6 जिलों में ब्लैकआउट कितना प्रभावी रहा। ब्लैकआउट के दौरान बाहर निकलकर मोबाइल का उपयोग करने से भी बचना है, क्योंकि सैटेलाइट इमेजिंग में मोबाइल की रोशनी भी पकड़ी जा सकती है।
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क्या जांचने के लिए होता है यह पूर्वाभ्यास?
महज 15 मिनट का यह अभ्यास दिखाएगा कि किस इलाके के लोग कितने जिम्मेदार हैं। हवाई हमले से बचाव और नागरिक सुरक्षा के लिए किए जा रहे इस अभ्यास को लेकर किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि घबराने की कोई बात नहीं है और फिलहाल युद्ध जैसी कोई स्थिति नहीं है। बिहार में ब्लैकआउट का अभ्यास पहले भी कराया जा चुका है। वर्तमान वैश्विक संकट को देखते हुए एक बार फिर यह परखने की कोशिश है कि नागरिक कितने सजग हैं।
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