Bihar : प्रशांत किशोर के तीन भ्रम से बिहार की राजनीति में गरमी; पटना के बिहटा में आवाजाही, बांकीपुर में चर्चा
Bihar News : बिहार चुनाव में जमीन से ज्यादा हवा में प्रशांत किशोर की चर्चा थी। दिल्ली तक इस हवा का जोर था। लेकिन, परिणाम के साथ वह हवा उड़ गई। अब एक बार फिर प्रशांत किशोर की चर्चा से बिहार की राजनीति में गरमी है। क्यों?
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'प्रशांत किशोर'- यह नाम बिहार में राजनीति के सदन से तो दूर है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा खत्म नहीं हो रही। बिहार विधानसभा चुनाव के पहले राजनीतिक रणनीतिकार थे प्रशांत किशोर। चुनाव आने के कुछ समय पहले राजनीतिज्ञ बने। बने तो एक बार जनता दल यूनाईटेड में उपाध्यक्ष के तौर पर जुड़कर भी, लेकिन बिहार विधानसभा चुनाव से पहले बाकायदा पार्टी का एलान कर वह राजनीति के मैदान में सीधे-सीधे उतरते दिखे। लेकिन, यह सबकुछ भ्रमित करने वाला ही रहा। एक बार फिर बिहार की राजनीति में उनके कारण भ्रम जबरदस्त फैला हुआ है। आइए, जानते हैं कि विस्तार से।
बिहार चुनाव के पहले हर दांव से भ्रम फैलाया
बिहार विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर ने खूब पसीना बहाया था। पीली गाड़ियों में पेट्रोल भी। इससे हवा ऐसा बही थी कि दिल्ली तक के दिग्गज पत्रकारों और राजनीतिज्ञों को उनमें ढेर सारी उम्मीदें दिखने लगी थीं। उसी हिसाब से दावे भी होने लगे थे। लेकिन, जमीन पर इन दावों की हकीकत बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम के साथ सामने आ गई। दरअसल, बिहार की राजनीति में उतरते समय प्रशांत किशोर ने कुछ ऐसे कदम उठाए थे, जिनसे जनता भ्रमित हो गई थी। सबसे बड़ी बात कि मोहन दास करमचंद गांधी के पथ पर चलने की बात कहने वाले प्रशांत किशोर ने बिहार में शराबबंदी को खत्म करने का एलान कर महिलाओं को भ्रमित किया। उसके बाद उन्होंने दल में पद नहीं रखते हुए फैसला किया कि जन सुराज पार्टी किसी भी दल से गठबंधन नहीं कर अपनी ताकत से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को सत्ता से दूर रखेगी, इसलिए चुनाव में लगभग सभी सीटों पर प्रत्याशी उतार दिए। और, इन सभी के बाद उन्होंने खुद ही चुनावी राजनीति में नहीं उतर ऐसा भ्रमजाल बुना कि खुद ही फंस गए। लोगों का भरोसा नहीं मिला और एक अदद सीट हासिल नहीं हो सकी।
बिहटा में आश्रम, बांकीपुर में चुनावी चर्चा, उधर टीम बिखरी
प्रशांत किशोर इन दिनों पटना पर फोकस कर रहे हैं। राजनीतिक बयानबाजी कम कर रहे, लेकिन माहौल पूरा बना रहे हैं। पिछले हफ्ते वह पटना के बिहटा में भूमि पूजन के लिए गए थे। जैसे उन्होंने गांधीजी के चंपारण की धरती को चुना था, इस बार किसानों के लिए बिगुल फूंकने वाले स्वामी सहजानंद के नाम पर आगे बढ़ रहे हैं। जन सुराज का केन्द्र बिहटा के अमहरा गांव में बनने जा रहा है। आश्रम का नाम कहा जा रहा है। घोषित नहीं है, लेकिन करीब 16 बीघे में जनसुराज का केंद्र बन रहा है। कई करोड़ में यहां स्ट्रक्चर तैयार करने का काम अब युद्ध स्तर पर चल रहा है। जन सुराज के कर्ता-धर्ता प्रशांत किशोर पिछले दिनों इस गांव में पहुंचे और राघवपुर में जनप्रतिनिधियों-किसानों से बात भी की। मतलब, पटना के बिहटा में एक तरह से जन सुराज ने अपना बड़ा केंद्र तैयार करना शुरू कर दिया है।
इस बीच एक चर्चा प्रशांत किशोर के बांकीपुर सीट से चुनाव लड़ने की भी खूब चल रही है। भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा जाने से खाली हुई यह सीट भाजपा की सबसे सुरक्षित सीट है, इसलिए प्रशांत किशोर यहां उतरेंगे ही- पक्का कहना लगभग असंभव है। हां, चर्चा खूब है। गरमी के इस मौसम से भी गरम। मीडिया के जरिए आम आदमी तक। लेकिन, संकट एक यह साफ दिख रहा है कि प्रशांत किशोर के लिए बिहार विधानसभा चुनाव के पहले काम कर रही प्रचार टीम बिखर चुकी है। चुनाव के तत्काल बाद एक तरह से ऊपरी हिस्से का विघटन ही हो चुका है। ज्यादातर सीनियर लोग या तो उनका साथ छोड़ गए या मुक्त कर दिए गए। ऐसे में बांकीपुर से चुनाव लड़ना राजनीतिक भविष्य को दांव पर लगाने जैसा होगा, लेकिन इसके बावजूद चर्चा जबरदस्त है। शायद यही कारण है कि जन सुराज को सामने आकर कहना पड़ा कि यह अफवाह है।