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Bihar: बिहार में हाईवे किनारे अतिक्रमण और अवैध पार्किंग पर बड़ा एक्शन, 20 दिन में हटेंगे ढाबे-होटल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: पटना ब्यूरो
Updated Wed, 20 May 2026 08:12 PM IST
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सार
बिहार सरकार ने राष्ट्रीय उच्च पथों पर अतिक्रमण और अवैध पार्किंग के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू करने का फैसला लिया है। अवैध ढाबे और होटल 20 दिनों में हटाने होंगे। नियम तोड़ने वालों पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सांकेतिक फोटो
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
बिहार में राष्ट्रीय उच्च पथों पर बढ़ते अतिक्रमण, अवैध पार्किंग और असुरक्षित व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लगाने और हाईवे सुरक्षा मजबूत करने के उद्देश्य से अब व्यापक अभियान चलाया जाएगा। इस संबंध में बुधवार को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में बिहार सड़क सुरक्षा परिषद की अहम बैठक आयोजित की गई।
अनधिकृत पार्किंग को चिंता का विषय बताया
बैठक में परिवहन विभाग, पथ निर्माण विभाग, एनएचएआई, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, नगर विकास एवं आवास विभाग तथा पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। अधिकारियों ने राष्ट्रीय उच्च पथों पर बढ़ते अतिक्रमण और अनधिकृत पार्किंग को गंभीर चिंता का विषय बताया।
संचालकों पर होगी सख्त कार्रवाई
सरकार ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय उच्च पथों के राइट ऑफ वे क्षेत्र में अब भारी और व्यावसायिक वाहनों की अनधिकृत पार्किंग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। वाहनों की पार्किंग केवल निर्धारित ट्रक ले-बाय और वे-साइड अमेनिटी स्थलों पर ही की जा सकेगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों और संचालकों पर जुर्माना समेत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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20 दिन के अंदर हटानी होगी व्यावसायिक संरचनाएं
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि हाईवे किनारे बने अवैध ढाबे, होटल और अन्य व्यावसायिक संरचनाओं को 20 दिनों के भीतर हटाना होगा। तय समय सीमा के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाने पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित डिस्ट्रिक्ट हाईवे सेफ्टी टास्क फोर्स संयुक्त कार्रवाई करेगी। इस अभियान में जिला प्रशासन, पुलिस, एनएचएआई, पथ निर्माण विभाग और स्थानीय निकाय शामिल रहेंगे।
ये भी पढ़ें- Bihar: बिहार में 'योगी मॉडल'! सीएम की चेतावनी के बाद एनकाउंटर, पुलिस पर फायरिंग करने वाले के पैर में लगी गोली
एनओसी लेना अनिवार्य
सरकार ने राष्ट्रीय उच्च पथों के राइट ऑफ वे क्षेत्र में किसी भी नए ढाबे, होटल या व्यावसायिक निर्माण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अब किसी भी निर्माण से पहले संबंधित विभाग से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) लेना अनिवार्य होगा। इसके अलावा जिन ढाबों, होटलों और प्रतिष्ठानों का प्रवेश सीधे हाईवे से है, उन्हें वैकल्पिक पहुंच मार्ग विकसित करना होगा। ऐसा नहीं करने पर कंट्रोल ऑफ नेशनल हाईवे एक्ट 2002 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
समय रहते कार्रवाई की जा सके
पथ निर्माण विभाग ने यह भी साफ किया कि हाईवे सेफ्टी जोन के भीतर आने वाले निर्माण कार्यों के लिए भी संबंधित विभाग से एनओसी लेना जरूरी होगा। आवासीय क्षेत्र में यह सीमा 40 मीटर और व्यावसायिक क्षेत्र में 75 मीटर तय की गई है। सरकार ने आम लोगों से अपील की है कि राष्ट्रीय उच्च पथों पर अतिक्रमण और अवैध पार्किंग की सूचना टोल-फ्री नंबर 1033 या ‘राजमार्ग यात्रा’ ऐप के जरिए दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
अनधिकृत पार्किंग को चिंता का विषय बताया
बैठक में परिवहन विभाग, पथ निर्माण विभाग, एनएचएआई, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, नगर विकास एवं आवास विभाग तथा पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। अधिकारियों ने राष्ट्रीय उच्च पथों पर बढ़ते अतिक्रमण और अनधिकृत पार्किंग को गंभीर चिंता का विषय बताया।
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संचालकों पर होगी सख्त कार्रवाई
सरकार ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय उच्च पथों के राइट ऑफ वे क्षेत्र में अब भारी और व्यावसायिक वाहनों की अनधिकृत पार्किंग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। वाहनों की पार्किंग केवल निर्धारित ट्रक ले-बाय और वे-साइड अमेनिटी स्थलों पर ही की जा सकेगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों और संचालकों पर जुर्माना समेत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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20 दिन के अंदर हटानी होगी व्यावसायिक संरचनाएं
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि हाईवे किनारे बने अवैध ढाबे, होटल और अन्य व्यावसायिक संरचनाओं को 20 दिनों के भीतर हटाना होगा। तय समय सीमा के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाने पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित डिस्ट्रिक्ट हाईवे सेफ्टी टास्क फोर्स संयुक्त कार्रवाई करेगी। इस अभियान में जिला प्रशासन, पुलिस, एनएचएआई, पथ निर्माण विभाग और स्थानीय निकाय शामिल रहेंगे।
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एनओसी लेना अनिवार्य
सरकार ने राष्ट्रीय उच्च पथों के राइट ऑफ वे क्षेत्र में किसी भी नए ढाबे, होटल या व्यावसायिक निर्माण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अब किसी भी निर्माण से पहले संबंधित विभाग से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) लेना अनिवार्य होगा। इसके अलावा जिन ढाबों, होटलों और प्रतिष्ठानों का प्रवेश सीधे हाईवे से है, उन्हें वैकल्पिक पहुंच मार्ग विकसित करना होगा। ऐसा नहीं करने पर कंट्रोल ऑफ नेशनल हाईवे एक्ट 2002 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
समय रहते कार्रवाई की जा सके
पथ निर्माण विभाग ने यह भी साफ किया कि हाईवे सेफ्टी जोन के भीतर आने वाले निर्माण कार्यों के लिए भी संबंधित विभाग से एनओसी लेना जरूरी होगा। आवासीय क्षेत्र में यह सीमा 40 मीटर और व्यावसायिक क्षेत्र में 75 मीटर तय की गई है। सरकार ने आम लोगों से अपील की है कि राष्ट्रीय उच्च पथों पर अतिक्रमण और अवैध पार्किंग की सूचना टोल-फ्री नंबर 1033 या ‘राजमार्ग यात्रा’ ऐप के जरिए दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।