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Bihar Politics News : तेजस्वी यादव खुल कर मैदान में उतरे तो सत्ताधारी दलों का कहना है कि वह मुद्दाहीन हो गए है

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: Aditya Anand Updated Wed, 20 May 2026 05:30 PM IST
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सार

Bihar Politics News : तेजस्वी यादव खुल कर मैदान में उतरे तो सत्ताधारी दलों का कहना है कि वह मुद्दाहीन हो गए हैं। चूंकि लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष का होना जरूरी है, इसलिए जानिए कि नई सरकार के गठन के बाद अब तक तेजस्वी ने क्या मुद्दे उठाए हैं?

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सम्राट चौधरी और तेजस्वी यादव। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

15 अप्रैल को भारतीय जनता पार्टी ने बिहार को पहला मुख्यमंत्री दिया था। सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने। सात मई को मंत्रिमंडल विस्तार हुआ। इन सब के बीच एक खास चीज सियासी गलियारे से बाहर आई, वो थी नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की सक्रियता। नवंबर 2025 में महज 25 विधायक के नेता बनकर रह गए तेजस्वी यादव दिसंबर, जनवरी, फरवरी तक उतने सक्रिय नहीं थे, जितने आज दिख रहे हैं। नीतीश कुमार के गद्दी छोड़ते ही तेजस्वी यादव खुलकर मैदान में राष्ट्रीय जनतांत्रिक सरकर के खिलाफ हल्ला बोल कर रहे हैं। सत्ता पक्ष भले ही यह कह रहा हो कि तेजस्वी यादव के पास कोई मुद्दा नहीं है लेकिन नेता प्रतिपक्ष हर दिन कुछ न कुछ अलग मुद्दा जरूर सामने लेकर आ रहे हैं। आइये जानते हैं 15 अप्रैल से अब तक तेजस्वी यादव किन मुद्दों पर मुखर रहे। 

 

  • 15 अप्रैल को तेजस्व यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि इलेक्टेड मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को गद्दी से उतारने की अपनी प्रतिज्ञा पूर्ण करने पर बधाई तथा सेलेक्टेड मुख्यमंत्री बनने पर हार्दिक शुभकामनाएं। आशा है कि नए मुख्यमंत्री जी इस कड़वे, अप्रिय एवं कठोर तथ्य से पूर्ण रूप से अवगत होंगे कि 21 वर्षों के एनडीए ने बिहार का क्या हाल किया है?
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  • 15 अप्रैल को ही तेजस्वी यादव ने एक और पोस्ट किया। इसमें वह लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ दिखे। वह INDIA गठबंधन की सर्वदलीय बैठक में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि हमलोग महिला आरक्षण के पक्षधर है। महिलाओं की आधी आबादी को 33% नहीं बल्कि 50% आरक्षण देना चाहिए लेकिन इस आरक्षण के अंदर एससी-एसटी और ओबीसी की महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण होना चाहिए यानी आरक्षित वर्गों की महिलाओं के लिए भी सीटें अनिवार्य रूप से आरक्षित होनी चाहिए।
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  • 16 अप्रैल को तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार की ओर से छपवाए गए विज्ञापन को मुद्दा बनाया। उन्होंने लिखा कि यह वही बिहार है, जो देश का सबसे ग़रीब राज्य है जहां हर व्यक्ति पर औसतन 27 हजार रुपये का कर्ज है। वही बिहार, जहां करीब पांच लाख सरकारी कर्मचारियों को अब तक वेतन नहीं मिला है। लेकिन ‘सेलेक्टेड सीएम’ के राज में राजनीति चमकाने के उद्देश्य से लाखों रूपये का विज्ञापन छपावाया गया। यह राज्य वासियों के पैसे का दुरूपयोग भी है। बिहार सरकार किस हैसियत से एक राज्यसभा सांसद की तस्वीर छाप सकती है? क्या पहले ऐसा कभी हुआ? नहीं, तो फिर क्या यह कोर्ट के आदेश का उल्लंघन नहीं है?
  • 19 अप्रैल को तेजस्वी यादव ने महिला आरक्षण बिल के गिरने के बाद सरकार पर हमला बोला। उन्हेंने लिखा कि कट्टर महिला विरोधी, पाखंडी, ढोंगी और झूठे भाजपाई आँख खोल इस सच्चाई को स्वीकार करें तथा अपने तुलनात्मक आँकड़े जारी करे। लोकसभा चुनाव-2024 में राजद ने बिहार में सबसे अधिक 29 फीसदी महिलाओं को टिकट दिया था। कहा कि अब राजद में 25 फीसदी सांसद महिला है। बिहार विधानसभा चुनाव-2025 में भी राजद ने ही सबसे अधिक 17 फीसदी महिलाओं को टिकट दिया था। बिहार विधानपरिषद में भी दलों में सबसे अधिक महिलाओं का प्रतिनिधित्व 21.4 फीसदी राजद का है। 
  • 20 अप्रैल को तेजस्वी यादव ने फिर से सरकार पर हमला बोला गणतंत्र का गला घोंट कर तंत्र-यंत्र और षड्यंत्र से बनाई गई काम रहित एनडीए सरकार पांच महीने सात दिन से खाली बैठ झूठ, फरेब, प्रपंच और पाखंड का वाद्ययंत्र बजा रही है। नई सरकार बिना किसी स्पष्ट दिशा, दीर्घकालिक योजना, बिना विजन, बिना रोडमैप, बिना ब्लूप्रिंट, बिना विस्तृत कार्ययोजना और बगैर किसी टाइमलाइन के अपने कार्यकाल के प्रथम वर्ष का 𝟒𝟑.𝟐𝟗% समय आज तक व्यर्थ कर चुकी है।
  • 21 अप्रैल को तेजस्वी यादव ने अपराध के मुद्दे पर एनडीए सरकार को घेरा। उन्होंने लिखा कि NDA सरकार में कानून व्यवस्था बेहद खराब हो चुकी है। हालात ऐसे हो चुके हैं कि बिहार का कोई भी ऐसा इलाका नहीं है, जहां लोग सुरक्षित है। दिनदहाड़े हर गांव, हर टोले, हर शहर में हत्याएँ हो रही है। स्वर्ण व्यवसायियों को लूटा जा रहा है, स्थिति ऐसी है कि कभी भी कोई कनपट्टी पर पिस्टल तान देता है। विगत दो वर्ष में एक हजार से अधिक स्वर्ण व्यवसायियों के शोरूम और दुकानों को लूटा गया है, सैंकड़ों की गोली मारकर हत्या की गयी है, फिर भी मंगलराज है।
  • 22 अप्रैल को तेजस्वी यादव ने आर्थिक मोर्चे पर एनडीए सरकार को घेरा। उन्होंने लिखा कि राज्य में व्याप्त वित्तीय संकट से जूझ रही अनैतिक सरकार ने हालिया दिनों में दूसरी बार निधि निकासी एवं व्यय नियंत्रण संबंधित पत्र जारी किया है। अपनी कुर्सी बचाने के लिए भ्रष्ट रिटायर्ड और कॉम्प्रोमाइज्ड उच्च अधिकारियों और एजेंसियों से डरी भूंजा गैंग ने अचेत निष्क्रिय मुख्यमंत्री से मिलकर खटारा सरकार से चुनाव के आख़िरी 30 दिनों में 41,000 करोड़ रुपए बंटवा दिया। अब महीनों से बुजुर्गों को दी जाने वाली सामाजिक पेंशन, स्टूडेंट के क्रेडिट कार्ड के भुगतान, छात्रों को छात्रवृत्ति देने के लिए और कर्मचारियों को सैलरी व पेंशन देने के भी एनडीए सरकार के पास धनराशि नहीं बची क्योंकि भ्रष्टाचार के चलते खजाना खाली है। 
  • 27 अप्रैल को तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि बिहार की महिलाओं के साथ NDA सरकार ने विश्वासघात किया है, सफेद झूठ बोल उनकी भावनाओं का दोहन कर करोड़ों महिलाओं के साथ दिनदहाड़े धोखेबाजी की है। चुनाव के दौरान एनडीए सरकार ने महिलाओं और जीविका दीदियों के बैंक खातों में 10 हजार रूपये भेजे। आगे की दो लाख की किश्त को लेकर यह उम्मीद दी गई कि चुनाव के बाद छह महीने के अंदर शेष दूसरी किश्त को अविलंब महिलाओं के खाते में 2 लाख रूपये भेजें जाएंगे। छह महीने हो गए है अब यह धोखेबाज़-दग़ाबाज़ नेता अपनी कुर्सी के खेल में लीन है। खजाना खाली है। वित्तीय स्थिति बदतर है।
  • 28 अप्रैल को तेजस्वी यादव ने दिल्ली में बिहार के युवक की हत्या का मामला उठाया। उन्होंने लिखा कि भाजपा सरकार में बिहारी होना ही सबसे बड़ा अपराध और देशद्रोह हो गया है। उसी दिन तेजस्वी यादव ने भागलपुर में बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सीधे पीएम मोदी और सीएम सम्राट चौधरी पर हमला बोला। 
  • दो मई को तेजस्वी यादव ने फिर से एनडीए सरकार पर हमला बोला। सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा कि सत्तालोलुप एनडीए नेताओं ने नैतिकता और लोक लाज की सारी मर्यादाएं त्याग कर प्रदेश को अपनी तृष्णा पूर्ति का अखाड़ा बना लिया है। विगत छह साल में पांच बार और 12 वर्षों में 10 बार सरकार का गठन-पुनर्गठन हुआ है जिसमें चंचल व्यग्र मन के धनी सत्ताकामी नीतीश कुमार ने कारण-अकारण आठ बार मुख्यमंत्री की शपथ ली है। एनडीए ने बिहार को दिशाहीन तथा बिहारवासियों को उपहास का पात्र बनाया है।
  • चार मई को तेजस्वी यादव ने विक्रमशिला पुल का मुद्दा उठाया। अब भ्रष्ट एनडीए सरकार के सौजन्य से भागलपुर में विक्रमशिला पुल ने गंगा नदी में समाधि ले ली। भ्रष्टाचार का इससे भी बड़ा कोई प्रत्यक्ष प्रमाण चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि विगत दो साल में बिहार में 100 से अधिक पुल-पुलिया गिरे है तभी तो बिहार भ्रष्टाचार में शीर्ष पर है।
  • छह मई को तेजस्वी यादव ने भाजपा और आरएसएस पर हमला बोला। कहा कि बिहार ने छह महीने में दो मुख्यमंत्री देखें है। प्रथम वर्ष का 50 फ़ीसदी कार्यकाल बर्बाद हो चुका है अभी तक दूसरी बार भी सरकार का गठन ही नहीं हुआ है। सरकार का खजाना खाली है। सरकार मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए कभी एनकाउंटर तो कभी आवास खाली कराने, कभी बुलडोजर जैसी नौटंकियां करती रहेगी। 
  • आठ मई को तेजस्वी यादव ने शिक्षक अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज के मामले पर सरकार को घेरा। कहा कि हार के लाखों युवा, जिन्होंने वर्षों मेहनत कर पढ़ाई की है, उनसे चुनाव से पूर्व NDA के नेताओं द्वारा वादा किया गया था कि TRE-4 की वैकेंसी जारी की जाएगी। लेकिन सरकार गठन के 6 महीने बाद भी TRE-4 का विज्ञापन नहीं निकला है। उल्टे वैकेंसी की मांग करने पर लाठियां बरसाई जा रही है। आठ मई को ही तेजस्वी यादव ने बिहार मंत्रिमंडल में परिवारवाद का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी परिवारवाद के पोषक है इसका जीता-जागता उदाहरण दे रहा हूं कि कैसे वंशवाद की बेल में 𝐏𝐌 खाद-पानी डाल परिवारवाद के संपोषक, संरक्षक और पालनहार बने हुए है। तेजस्वी यादव ने 17 मंत्रियों का बैकग्राउंड बताया और पीएम मोदी से सवाल पूछा कि अब पीएम किसे शहजादा, राजकुमार और युवराज कहेंगे? 
  • 11 मई को तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी का वीडियो शेयर किया। लिखा कि बिहार के झाड़-फूंक वाले शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी कह रहे हैं कि  भाजपा सरकार में लड़कियों को शिक्षा की ज़रूरत क्या है? क्यों है? मोदी जी नारी शक्ति वंदन की बात करते है इसलिए लड़कियों को स्कूल जाने की बजाय घर में ही रहना चाहिए। शिक्षा मंत्री की कैसी घृणित सोच है?
  • 12 मई को तेजस्वी यादव ने नीट पेपरलीक का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक के कारण 2026 की परीक्षा रद्द कर दी गई है। 23 लाख छात्रों के भविष्य से एक बार फिर खिलवाड़ किया गया। बिहार और देश में पेपर लीक का अंतहीन सिलसिला खत्म ही नहीं हो रहा है।
  • 16 मई को तेजस्वी यादव ने रसोई गैस की किल्लत का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जीविका ‘दीदी की रसोई’ में गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं होने से प्रसूता महिलाओं को भोजन नहीं मिल पा रहा है। 2.5 करोड़ महिलाओं को चुनाव के दिन 10 हज़ार नगद बांटकर लोकतंत्र की धज्जियाँ उड़ाने वालों ने चुनाव बीतते ही प्रसव बाद अब जच्चा-बच्चा को मरने के लिए छोड़ दिया है।
  • 19 मई को तेजस्वी यादव ने प्रेस वार्ता की और एनडीए सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि छह महीनों में दुबारा बनी नई सरकार के नए सम्राट के अपावन सानिध्य में सत्ता संपोषित अपराधी अब प्रदेश की माताओं-बहनों और बेटियों पर कहर बनकर टूट रहे है। तेजस्वी ने बिहार में एनकाउंटर के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। 

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अब जानिए सत्ता पक्ष ने तेजस्वी यादव को लेकर क्या कहा?

जनता दल यूनाईटेड के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कहा कि तेजस्वी यादव समेत पूरा विपक्ष मुद्दों के घोर अकाल से जूझ रहा है और अनाप-शनाप बयानबाजी के जरिए जनता के बीच भ्रम फैलाने की असफल कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के प्रति विपक्ष के इस दोहरे चरित्र को बिहार की आधी आबादी भलीभांति समझ चुकी है। उन्होंने आगे कहा कि तेजस्वी यादव को अपने माता-पिता के शासनकाल के काले अतीत में जरूर झांकना चाहिए, जब महिलाएं भय के माहौल में जीने को मजबूर थीं और चैखट के बाहर कदम रखना भी मुश्किल था। उस दौर में बेटियों का स्कूल और कॉलेज जाना तक दूभर हो गया था। अपराधियों का ऐसा बोलबाला था कि थानों में मुकदमे दर्ज तक नहीं होते थे।

 

मंत्री रामकृपाल यादव बोले- पहले कार्यकाल का हिसाब दे सरकार

बिहार सरकार में मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता रामकृपाल यादव ने तेजस्वी यादव पर हमला बोलते हुए कहा कि अपराधियों का कोई धर्म या जाति नहीं होती और एनकाउंटर भी जात देखकर नहीं किया जाता। मंत्री ने कहा कि कानून अपना काम करता है और जो अपराध करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। साथ ही उन्होंने तेजस्वी यादव से उनके माता-पिता के शासनकाल की अपराध रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग करते हुए कहा कि पहले वे अपने कार्यकाल का हिसाब दें, फिर वर्तमान सरकार पर सवाल उठाएं।

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