Bihar Cabinet: बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार में परिवार अपार; सम्राट चौधरी के कौन मंत्री किनके परिवारजन?
The Family Man : बिहार की राजनीति में अब फैमिली की चर्चा है।सीएम खुद पूर्व मंत्री के बेटे हैं। मंत्रिमंडल विस्तार हुआ तो एक साथ तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। सांसद पुत्र, सांसद पत्नी- परिवार अपार है इस मंत्रिमंडल में।
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बिहार की नई सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के साथ सबसे ज्यादा चर्चा राजनीति में परिवारवाद की हो रही है। जब बिहार में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी तो यह बात उठी थी कि परिवारवाद अब समाप्त होगा। लेकिन, नया अध्याय ही शुरू हो गया। पूर्व मंत्री पुत्र सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने तो हंगामा हुआ था, लेकिन अब तो चरम है। मंत्रिपरिषद में 32 नए नाम शामिल हुए। सूची पढ़ी जाने लगी तो सबसे पहले ध्यान इस बात पर गया कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे भी शपथ ले रहे हैं। दो भूतपूर्व मुख्यमंत्रियों जीतन राम मांझी और दिवंगत जगन्नाथ मिश्रा के बेटे पहले भी मंत्री रह चुके थे, इस बार भी हैं। बिहार में पहली बार हुआ, जब तीन पूर्व CM के बेटे एक साथ मंत्रिपरिषद में शामिल हुए। वैसे, इस मंत्रिपरिषद् में सांसद पुत्र,पूर्व सांसद की पत्नी जैसे भी कई नाम हैं। मतलब, परिवारवाद अपार है।
नीतीश कुमार का नाम भी सूची में शामिल
दिवंगत जगन्नाथ मिश्रा कांग्रेसी मुख्यमंत्री थे। उनके बेटे नीतीश मिश्रा भाजपा कोटे से पहले भी मंत्री रह चुके हैं। गुरुवार को इन्होंने फिर मंत्री पद की शपथ ली। केंद्रीय मंत्री के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ काम कर रहे भूतपूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन उर्फ संतोष मांझी ने भी सम्राट चौधरी सरकार में मंत्री पद की शपथ ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने उनके सामने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। इस शपथ ग्रहण समारोह के पहले, जब नवंबर में नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद संभाला था तो शपथ ग्रहण में पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश के मंत्री बनने पर परिवारवाद को लेकर खूब हंगामा मचा था। अब एक मंच पर तीन पूर्व सीएम के बेटों के शपथ ग्रहण से 'राजनीति में परिवारवाद' पर नई बहस छिड़ गई है। इस बार भी उपेंद्र कुशवाहा के बेटे मंत्री बने हैं। निशांत कुमार और दीपक प्रकाश किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। दोनों के लिए विधान परिषद् का रास्ता है। इसी तरह एक समय में किसी सदन का सदस्य नहीं रहते हुए राबड़ी देवी को लालू प्रसाद यादव ने मुख्यमंत्री बनाया था।
इन मंत्रियों के बारे में भी लोग चर्चा कर रहे
मंत्रियों की सूची में दीपक प्रकाश को लेकर फिर चर्चा है तो बाकी नामों पर भी लोग चुप नहीं हैं। जदयू कोटे से मंत्री लेशी सिंह के पति ने चुनाव में हार के बाद राजनीति में पत्नी को उतारा था। वह चुनाव जीतकर राजनीति की कुर्सी तक पहुंचीं। इस हिसाब से उन्हें इस उदाहरण में समेटना बहुत उचित नहीं। हां, अशोक चौधरी की चर्चा भी है। वह कांग्रेस के जमाने में मंत्री रहे महावीर चौधरी के बेटे हैं। राजनीति इन्हें भी विरासत में मिली है और अब इनकी बेटी सांसद हैं। चर्चा में श्रेयसी सिंह भी हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह की बेटी श्रेयसी सिंह अंतरराष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी रही हैं और मां पुतुल कुमार की संसदीय पारी के समापन के बहुत बाद क्षेत्र से चुनाव जीतकर राजनीति की कुर्सी तक पहुंची हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री की पतोहू और पूर्व सांसद की पत्नी रमा निषाद ने भी गुरुवार को मंत्री पद की शपथ ली।