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Hindi News ›   India News ›   ED Bank loan obtained fraudulently and funds diverted; ED attaches immovable assets worth ₹150 crore.

ED: धोखाधड़ी से बैंक लोन लिया, फिर पैसे को दूसरी जगह लगाया, ईडी ने जब्त की 150 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां

Thu, 06 Aug 2026 06:43 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Thu, 06 Aug 2026 06:43 PM IST
सार

डीसीआईएल और इसके प्रमोटरों ने हेरफेर किए गए फाइनेंशियल स्टेटमेंट को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया। इसके बाद स्टॉक स्टेटमेंट और गलत देनदार (डेटर) स्टेटमेंट जमा करके कंसोर्टियम बैंकों के साथ धोखाधड़ी कर कई क्रेडिट सुविधाएं हासिल कीं। उनका अनुचित लाभ उठाया। जांच में यह भी पता चला कि आरोपियों ने सामान की वास्तविक आवाजाही के बिना ही नकली खरीद-बिक्री के लेन-देन करके, संबंधित कंपनियों के एक नेटवर्क के जरिए बैंक लोन के पैसे को दूसरी जगह लगाया और हड़प लिया।

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ED Bank loan obtained fraudulently and funds diverted; ED attaches immovable assets worth ₹150 crore.
ED - फोटो : ED

विस्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के बेंगलुरु जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत लगभग 51.28 करोड़ रुपये (बाजार मूल्य लगभग 150 करोड़ रुपये या उससे अधिक) की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया है। यह कार्रवाई दीपक केबल (इंडिया) लिमिटेड (डीसीआईएल), इसके मैनेजिंग डायरेक्टर के. वेंकटेश्वर राव, डायरेक्टर सत्यवती बॉल और उनसे जुड़ी कंपनियों द्वारा बैंक धोखाधड़ी, लोन के पैसे को दूसरी जगह लगाने और हड़पने से जुड़े मामले में की गई है। 

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ईडी ने सीबीआई, बीएसएंडएफबी, बेंगलुरु द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। इसमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल, शामिल है। इन सबके चलते कंसोर्टियम बैंकों को गलत तरीके से भारी नुकसान हुआ है।

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जांच से पता चला कि डीसीआईएल और इसके प्रमोटरों ने हेरफेर किए गए फाइनेंशियल स्टेटमेंट को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया। इसके बाद स्टॉक स्टेटमेंट और गलत देनदार (डेटर) स्टेटमेंट जमा करके कंसोर्टियम बैंकों के साथ धोखाधड़ी कर कई क्रेडिट सुविधाएं हासिल कीं। उनका अनुचित लाभ उठाया। जांच में यह भी पता चला कि आरोपियों ने सामान की वास्तविक आवाजाही के बिना ही नकली खरीद-बिक्री के लेन-देन करके, संबंधित कंपनियों के एक नेटवर्क के जरिए बैंक लोन के पैसे को दूसरी जगह लगाया और हड़प लिया। 

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इन संबंधित कंपनियों में सूर्य ट्रांसमिशन लिमिटेड, आधुनिक पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड, दंडदेली फेरो प्राइवेट लिमिटेड, शरावती कंडक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड, वेंकटेश इंडस्ट्रीज, मारुति इंजीनियरिंग वर्क्स, यूनिवर्सल ट्रांसमिशन लाइन प्रोडक्ट्स, केजीएन इलेक्ट्रिकल्स और अन्य जुड़ी हुई कंपनियां शामिल हैं। लोन से मिली रकम को उन कामों में लगाया गया, जिनके लिए लोन मंजूर नहीं हुआ था। इनमें जुड़ी हुई कंपनियों के जरिए प्राइवेट इक्विटी निवेशकों से इक्विटी शेयर वापस खरीदना और एसेट खरीदना शामिल है।

इससे पहले, जांच एजेंसी ने आरोपी व्यक्तियों और उनके साथियों से जुड़ी कई जगहों पर तलाशी ली थी, जिसके दौरान कई अहम दस्तावेज़, डिजिटल डिवाइस और रिकॉर्ड ज़ब्त किए गए थे। इसके बाद, के वेंकटेश्वर राव को दो जून गिरफ़्तार किया गया। उन्हें ईडी की कस्टडी में भेज दिया गया। जांच के दौरान पीएमएलए, 2002 की धारा 50 के तहत कई आरोपियों, बैंक अधिकारियों और अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए गए।

अपराध की रकम से सीधे खरीदी गई संपत्तियों के अलावा, आरोपियों, उनके परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी कंपनियों के नाम पर मौजूद उतनी ही कीमत की संपत्तियों की भी पहचान की गई। चूंकि अपराध से मिली रकम का एक बड़ा हिस्सा अलग-अलग लेयर्स में घुमाया गया। पैसे को कई जगह पर लगाया गया। इसका मकसद, किसी को यह पता न चले कि पैसा कहां लगा है। अपराध से मिली रकम को सुरक्षित रखने और जब्ती की कार्रवाई को नाकाम होने से बचाने के लिए पीएमएलए के प्रावधानों के तहत उतनी ही कीमत की संपत्तियों को भी अस्थायी रूप से अटैच (जब्त) किया गया है।

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