ED Probe: हरियाणा में फर्जी चालान-ट्रक की रसीद से 5000 करोड़ के लेनदेन, महज 10% काम वास्तविक, बाकी फर्जीवाड़ा
सुमाया समूह और उसके सहयोगियों ने 'नीड टू फीड' कार्यक्रम की आड़ में हरियाणा सरकार का फर्जी अनुबंध तैयार किया। इसका मकसद, धन और व्यापार वित्तपोषण प्राप्त करना था। इस तरह उन्होंने गैर-मौजूद व्यावसायिक गतिविधियों को वास्तविक कारोबार के रूप में प्रदर्शित किया।
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सुमाया समूह और उसके सहयोगियों ने 'नीड टू फीड' कार्यक्रम की आड़ में हरियाणा सरकार का फर्जी अनुबंध तैयार किया। इसका मकसद, धन और व्यापार वित्तपोषण प्राप्त करना था। इस तरह उन्होंने गैर-मौजूद व्यावसायिक गतिविधियों को वास्तविक कारोबार के रूप में प्रदर्शित किया। ईडी की जांच से पता चलता है कि सुमाया समूह की संस्थाओं द्वारा प्राप्त धन को उशिक गाला द्वारा एक एजेंट के माध्यम से दिल्ली और हरियाणा स्थित फर्जी कृषि व्यापारी संस्थाओं को हस्तांतरित किया गया। इससे वास्तविक खरीद का झूठा प्रदर्शन किया गया। वास्तव में कोई कृषि खरीद नहीं हुई। फर्जी चालान/ट्रक रसीदों से 5000 करोड़ रुपये का लेनदेन किया गया। जाँच एजेंसी के मुताबिक, इसमें से केवल दस फीसदी ही वास्तविक काम हुआ तो बाकी फर्जीवाड़े की भेंट चढ़ गया।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), मुंबई क्षेत्रीय कार्यालय ने मेसर्स सुमाया ग्रुप और अन्य के मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002) के प्रावधानों के तहत लगभग 35.22 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। इन संपत्तियों में बैंक बैलेंस, डीमैट होल्डिंग्स, म्यूचुअल फंड के रूप में चल संपत्तियां और दो अचल संपत्तियां शामिल हैं। ईडी ने वर्ली पुलिस स्टेशन द्वारा मेसर्स सुमाया इंडस्ट्रीज लिमिटेड और उसके प्रवर्तकों सहित विभिन्न व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ आईपीसी, 1860 के विभिन्न प्रावधानों के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की थी। उन पर भविष्य में 'जरूरत के हिसाब से भोजन कार्यक्रम' के लाभों का वादा करके 137 करोड़ रुपये की धनराशि के गबन और साजिश रचने का आरोप है।
ईडी की जांच से पता चलता है कि सुमाया समूह और उसके सहयोगियों ने 'नीड टू फीड' कार्यक्रम की आड़ में हरियाणा सरकार के साथ फर्जी अनुबंध तैयार किया। ऐसी गतिविधियों को कारोबार का हिस्सा बताया गया, जिनका कोई अस्तित्व ही नहीं था। गैर-मौजूद व्यावसायिक गतिविधियों को वास्तविक कारोबार के रूप में प्रदर्शित किया गया। वास्तव में कोई भी कृषि खरीद नहीं हुई। इस तरीके से जो धन हस्तांतरित हुआ, एसे अन्य फर्जी संस्थाओं के जरिए नकद और आरटीजीएस लेनदेन के माध्यम से वापस उशिक गाला को भेज दिया गया।
सुमाया ने भारी मात्रा में व्यापार दिखाने के लिए फर्जी चालान और ट्रक रसीदें तैयार की। इसके परिणामस्वरूप 5000 करोड़ रुपये के चक्रीय लेनदेन हुए, जिनमें से केवल 10 फीसदी ही वास्तविक थे। ये लेनदेन चक्रीय पैटर्न में किए गए थे, जिससे संबंधित संस्थाओं के कारोबार में वृद्धि हुई। इन बढ़ाए गए लेनदेनों ने कृत्रिम रूप से सुमाया के कारोबार को बढ़ाया (दो वर्षों में 210 करोड़ रुपये से बढ़कर 6,700 करोड़ रुपये)। इसके शेयर की कीमत में अभूतपूर्व उछाल आया, जिससे सूचीबद्ध समूह संस्थाओं के निवेशकों को भ्रामक जानकारी मिली।
इससे पहले, जांच के दौरान ईडी ने मुंबई, दिल्ली और गुड़गांव में 19 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था। तलाशी के दौरान, ईडी ने 3.9 करोड़ रुपये की चल संपत्ति और बड़ी मात्रा में वित्तीय और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए, साथ ही धन शोधन और धन के गबन के अपराध को प्रमाणित करने वाले दस्तावेज भी बरामद किए। जांच के दौरान, ईडी ने 17.11.2025 को सुमाया समूह की कंपनियों के प्रमोटर उशिक गाला को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया था।