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Infiltration: भारत में बांग्लादेशी घुसपैठिए बसाने के लिए विदेशों से फंडिंग, ईडी की जांच में बड़ा खुलासा
Fri, 17 Jul 2026 09:29 AM IST
नितिन गौतम
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Fri, 17 Jul 2026 09:29 AM IST
सार
देश में बांग्लादेशी घुसपैठियों को बसाने के लिए एक पूरा तंत्र काम कर रहा है। इसके लिए विदेशों से फंडिंग होने का पता चला है। खुलासे के बाद ईडी ने इस मामले में देश के पांच राज्यों में अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की है। आइए जानते हैं कि इस मामले में क्या खुलासा हुआ है।
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ईडी की टीम कार्रवाई करती हुई
- फोटो : ANI
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विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अवैध बांग्लादेशी व रोहिंग्या को भारत में बसाने में जुटे नेटवर्क का खुलासा किया है। ईडी ने इस नेटवर्क पर शिकंजा कसते हुए यूपी, दिल्ली और पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में छापे मारे। यह नेटवर्क विदेशों से मिले पैसे का इस्तेमाल अवैध घुसपैठियों के फर्जी दस्तावेज तैयार कराने, उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजने और उनकी आजीविका के इंतजाम करने में कर रहा था। इस नेटवर्क के तार आतंकी फंडिंग से भी जुड़े होने की आशंका है।
पांच राज्यों के 13 ठिकानों पर छापेमारी
छापों के दौरान बंगाल के कलिकापुर इलाके में स्थित हरोरा अल-जामियातुल इस्लामिया दारुल उलूम से 40 लाख रुपये नकद व 180 ग्राम सोने के सिक्के जब्त किए गए हैं। ईडी ने धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत यूपी के सहारनपुर (देवबंद), दिल्ली के जामिया नगर, हरियाणा के बल्लभगढ़, पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना, उत्तर 24 परगना व मुर्शिदाबाद और महाराष्ट्र के रायगढ़ में 13 ठिकानों पर एकसाथ छापे मारे।
ईडी ने जब्त दस्तावेज व इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि ईडी ऐसे गिरोह की गतिविधियों की जांच कर रहा है, जो विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम के तहत पंजीकृत ट्रस्ट और स्वयंसेवी संस्थाओं के जरिये काम करता है।
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घुसपैठियों के मददगार नेटवर्क के साथ कुछ ट्रस्टों, स्वयंसेवी संस्थाओं और शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े लेन-देन की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि कुछ स्वयंसेवी संस्थाओं और ट्रस्टों के माध्यम से छोटे-छोटे हिस्सों में बड़ी रकम का लेनदेन किया गया। कई बैंक खातों और कथित रेंट अकाउंट के इस्तेमाल की भी जांच की जा रही है।
यूपी एटीएस की प्राथमिकी पर केंद्रित है मामला
ईडी की ओर से 2024 में दर्ज मामला उत्तर प्रदेश आतंकवाद-रोधी दस्ते (यूपी-एटीएस) की प्राथमिकी पर आधारित है। प्राथमिकी ऐसे संगठित गिरोह पर केंद्रित है, जिसपर रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को भारत में गैरकानूनी तरीके से दाखिल कराने, उनके लिए आधार, पैन और पासपोर्ट जैसे जाली पहचान दस्तावेज बनवाने तथा देश के अलग-अलग हिस्सों में बसने में मदद करने का आरोप है।
छह, आठ हजार जैसी छोटी किस्तों में भेजा पैसा : एटीएस की जांच में कुछ संस्थाओं पर विदेशी चंदा प्राप्त करने व अवैध गतिविधियां संचालित करने में मदद के लिए बैंक खातों, बिचौलियों के खातों व जटिल लेनदेन के जरिये राशि स्थानांतरित करने का पता चला है। ईडी के अनुसार, संदिग्धों को भारत में बसाने के लिए छह हजार, आठ हजार और 10 हजार की छोटी किस्तों में पैसे भेजे गए।
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पांच राज्यों के 13 ठिकानों पर छापेमारी
छापों के दौरान बंगाल के कलिकापुर इलाके में स्थित हरोरा अल-जामियातुल इस्लामिया दारुल उलूम से 40 लाख रुपये नकद व 180 ग्राम सोने के सिक्के जब्त किए गए हैं। ईडी ने धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत यूपी के सहारनपुर (देवबंद), दिल्ली के जामिया नगर, हरियाणा के बल्लभगढ़, पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना, उत्तर 24 परगना व मुर्शिदाबाद और महाराष्ट्र के रायगढ़ में 13 ठिकानों पर एकसाथ छापे मारे।
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ईडी ने जब्त दस्तावेज व इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि ईडी ऐसे गिरोह की गतिविधियों की जांच कर रहा है, जो विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम के तहत पंजीकृत ट्रस्ट और स्वयंसेवी संस्थाओं के जरिये काम करता है।
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घुसपैठियों के मददगार नेटवर्क के साथ कुछ ट्रस्टों, स्वयंसेवी संस्थाओं और शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े लेन-देन की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि कुछ स्वयंसेवी संस्थाओं और ट्रस्टों के माध्यम से छोटे-छोटे हिस्सों में बड़ी रकम का लेनदेन किया गया। कई बैंक खातों और कथित रेंट अकाउंट के इस्तेमाल की भी जांच की जा रही है।
यूपी एटीएस की प्राथमिकी पर केंद्रित है मामला
ईडी की ओर से 2024 में दर्ज मामला उत्तर प्रदेश आतंकवाद-रोधी दस्ते (यूपी-एटीएस) की प्राथमिकी पर आधारित है। प्राथमिकी ऐसे संगठित गिरोह पर केंद्रित है, जिसपर रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को भारत में गैरकानूनी तरीके से दाखिल कराने, उनके लिए आधार, पैन और पासपोर्ट जैसे जाली पहचान दस्तावेज बनवाने तथा देश के अलग-अलग हिस्सों में बसने में मदद करने का आरोप है।
छह, आठ हजार जैसी छोटी किस्तों में भेजा पैसा : एटीएस की जांच में कुछ संस्थाओं पर विदेशी चंदा प्राप्त करने व अवैध गतिविधियां संचालित करने में मदद के लिए बैंक खातों, बिचौलियों के खातों व जटिल लेनदेन के जरिये राशि स्थानांतरित करने का पता चला है। ईडी के अनुसार, संदिग्धों को भारत में बसाने के लिए छह हजार, आठ हजार और 10 हजार की छोटी किस्तों में पैसे भेजे गए।