ED: रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप की कंपनी के निदेशक पर ईडी की रेड, कर्मचारियों के हाथ में थी शेल कंपनियों की कमान
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में खुलासा हुआ है कि रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के कर्मचारी और करीबी सहयोगी शेल कंपनियां संचालित कर रहे थे। पीएमएलए के तहत सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग की जांच सीबीआई की एफआईआर के आधार पर हो रही है, जो कई बैंकों की शिकायतों पर दर्ज की गई थीं। पढ़ें पूरी रिपोर्ट...
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रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप की कंपनी के निदेशक के यहां ईडी ने रेड की है। वहां से जांच एजेंसी को कई तरह जानकारी मिली है। जांच में सामने आया कि रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के कर्मचारी या करीबी सहयोगी, शेल कंपनियों की कमान संभालते थे। वे ग्रुप के सीनियर मैनेजमेंट के निर्देशों पर काम करते थे। ईडी द्वारा 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002' के तहत रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड द्वारा पब्लिक फंड के गलत इस्तेमाल और हेराफेरी से जुड़े मामलों की जांच की जा रही है। ईडी ने यह जांच सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन, दिल्ली द्वारा दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू की है।
ये एफआईआर यस बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, केनरा बैंक, इंडियन ओवरसीज़ बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और एक्सिस बैंक लिमिटेड की शिकायतों पर दर्ज की गई थीं।
ईडी की रेड में शेल कंपनियों से जुड़े अहम दस्तावेज मिले
उक्त जांच के सिलसिले में, ईडी ने ई-कॉम्प्लेक्स प्राइवेट लिमिटेड के दफ्तर और उसके एक डायरेक्टर के घर पर तलाशी अभियान चलाया। तलाशी के दौरान, कई अहम दस्तावेज, अचल संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड और सबूत के तौर पर अन्य चीजें जब्त की गईं। तलाशी में संदिग्ध लेन-देन और रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के मालिकाना हक या कंट्रोल वाली संपत्तियों से जुड़े सबूत भी मिले हैं। ईडी ने उन्हें अपने कब्जे में ले लिया है।
इससे पहले, ईडी ने इस मामले में 12 जून को स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) के सामने प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (मुकदमा चलाने की शिकायत) दायर की थी। अब तक की जांच से पता चला है कि रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड द्वारा जुटाए गए हजारों करोड़ रुपये के पब्लिक फंड को रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप द्वारा कंट्रोल और मैनेज की जाने वाली शेल और ग्रुप कंपनियों के जाल के जरिए व्यवस्थित तरीके से दूसरी जगह ट्रांसफर किया गया।
15,548 करोड़ की कथित मनी लॉन्ड्रिंग, 4,510 करोड़ की संपत्ति अटैच
इन कंपनियों को समझदारी भरे लोन देने के नियमों का गंभीर उल्लंघन करते हुए, बिना उचित जांच-पड़ताल, सही डॉक्यूमेंटेशन या क्रेडिट-योग्यता के आकलन के कॉर्पोरेट लोन मंज़ूर किए गए थे। जिन कंपनियों को फ़ायदा पहुँचाया गया, वे आर्थिक रूप से कमजोर पाई गईं। उनमें कोई असली बिजनेस ऑपरेशन नहीं था। लोन चुकाने की क्षमता बहुत कम या बिल्कुल नहीं थी। जांच में यह भी पता चला है कि इन शेल कंपनियों के डायरेक्टर रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के कर्मचारी या करीबी सहयोगी थे। इन कंपनियों के बैंक अकाउंट और अकाउंट की किताबें ग्रुप की मुख्य कंपनियों - जैसे रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, रिलायंस पावर लिमिटेड और रिलायंस कैपिटल लिमिटेड - के अधिकारियों द्वारा ऑपरेट और मेंटेन की जाती थीं, जिससे इन शेल कंपनियों पर उनका प्रभावी कंट्रोल साबित होता है।
इस मामले में कुल 15,548 करोड़ रुपये की अपराध से हुई कमाई का हिसाब लगाया गया है। अब तक 4,510 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टीज़ अटैच की गई हैं। अब तक, अटैच की गई 3,926 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टीज़ की पुष्टि संबंधित एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी द्वारा की जा चुकी है।
इससे पहले, ईडी ने इस मामले में 2 लोगों को गिरफ़्तार किया था। रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड से फ़ंड को दूसरी जगह लगाने में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण, अमिताभ झुनझुनवाला (रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के पूर्व डायरेक्टर) और अमित बापना (रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के पूर्व सीएफओ) को गिरफ़्तार किया गया था। उस समय, रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड, दोनों रिलायंस कैपिटल लिमिटेड की सब्सिडियरी कंपनियां थीं। दोनों आरोपी अभी न्यायिक हिरासत में हैं।