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ED: 420 दिन तक हर सप्ताह 3% रिटर्न या प्लॉट देने का झूठा वादा, जुटा लिए ₹2,676 करोड़; उड़ाया निवेशकों का पैसा

Tue, 11 Aug 2026 05:43 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Tue, 11 Aug 2026 05:43 PM IST
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ED Uncovers rs 2,676 Crore Fraud: Investors Promised 3 percent Weekly Returns or Plots
प्रवर्तन निदेशालय - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जयपुर जोनल ऑफिस ने 'नेक्सा एवरग्रीन' धोखाधड़ी से जुड़े केस की मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में सुभाष चंद्र बिजनोरिया (उर्फ सुभाष चंद्र बिजारणिया), जो नेमीचंद के बेटे हैं, को 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए), 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया है। इस धोखाधड़ी में रणवीर बिजारणिया और सुभाष चंद्र बिजनोरिया ने अपने साथियों के साथ मिलकर बड़ी संख्या में निवेशकों से 2,676 करोड़ रुपये जमा किए थे। बाद में उस पैसे का इस्तेमाल दूसरे कामों में किया गया। नतीजा, निवेशकों के हाथ खाली रहे। आरोपियों ने जो रिटर्न देने का वादा किया था, वह पूरा नहीं किया गया। सुभाष चंद्र बिजनोरिया को जयपुर की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) के सामने पेश किया गया। उन्हें 13 अगस्त ईडी की कस्टडी में भेज दिया गया है। 

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ईडी ने बड़े पैमाने पर निवेश धोखाधड़ी के सिलसिले में राजस्थान पुलिस द्वारा 'नेक्सा एवरग्रीन ग्रुप' के खिलाफ दर्ज कई एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की थी। जांच में पता चला कि मुख्य आरोपी रणवीर बिजारणिया और सुभाष चंद्र बिजनोरिया (उर्फ सुभाष चंद्र बिजारणिया) ने अपने साथियों के साथ मिलकर निवेशकों को यह झूठा दावा करके लुभाया। कहा गया कि उनका पैसा गुजरात के धोलेरा स्मार्ट सिटी में ज़मीन के विकास और प्लॉटिंग प्रोजेक्ट्स में लगाया जाएगा। निवेशकों को 60 सप्ताह तक हर हफ़्ते 3 प्रतिशत का पक्का रिटर्न देने का वादा किया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि उन्हें प्लॉट भी मिलेगा। 
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आरोपियों ने ज्यादा संख्या में निवेशकों को लुभाने के लिए एक मल्टी-लेवल रेफरल स्कीम के तहत कुछ घोषणाएं भी कर दी। अतिरिक्त निवेशकों को जोड़ने पर लैपटॉप, मोटरसाइकिल और कार जैसे अतिरिक्त कमीशन और इनाम देने का भी लालच दिया गया। ईडी की जांच से पता चला कि सुभाष चंद्र बिजनोरिया, नेक्सा एवरग्रीन ग्रुप के मुख्य कर्ता-धर्ताओं और संचालकों में से एक थे। उन्होंने रणवीर बिजारनिया के साथ मिलकर इस पूरे धोखाधड़ी वाले ऑपरेशन पर पूरा कंट्रोल रखा। उन्होंने अपराध से हुई कमाई को इधर-उधर घुमाने और छिपाने (लेयरिंग और रूटिंग) के लिए अपने साथियों और निवेशकों के नाम पर कंपनियों, एलएलपी, पार्टनरशिप फर्मों और प्रोप्राइटरशिप फर्मों का एक जाल बनाया और उसे चलाया। 
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इन कंपनियों और उनके बैंक अकाउंट्स का इस्तेमाल व्यवस्थित तरीके से निवेशकों का पैसा इकट्ठा करने, अकाउंट्स के बीच पैसे ट्रांसफर करने, पोंजी स्कीम की तरह पुराने निवेशकों को रिटर्न देने और अचल संपत्ति खरीदने के लिए किया गया। इसका मकसद, पैसे का असली स्रोत और मालिकाना हक छिपाना था। जांच में यह भी सामने आया है कि सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म, इन्वेस्टर मैनेजमेंट, बैंकिंग ऑपरेशन, कंपनियों को रजिस्टर करना और पैसे को दूसरी जगह लगाना, ये सभी काम आरोपियों के निर्देशों पर ही किए गए थे।


इससे पहले, इस जांच एजेंसी ने जून 2025 में पीएमएलए की धारा 17 के तहत जयपुर, सीकर, झुंझुनू और अहमदाबाद में 25 जगहों पर तलाशी ली थी। इस दौरान 2.04 करोड़ रुपये नकद और कई आपत्तिजनक रिकॉर्ड व डिजिटल डिवाइस ज़ब्त किए गए थे। इसके अलावा, नेक्सा ग्रुप की अलग-अलग कंपनियों/साथियों से जुड़े बैंक अकाउंट्स/क्रिप्टो अकाउंट्स में मौजूद लगभग 15 करोड़ रुपये की रकम भी फ्रीज़ कर दी गई थी। 
 

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