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New RTI Rule: अन्ना के आंदोलन की चेतावनी का असर या कुछ और? महाराष्ट्र सरकार ने RTI के नए नियमों पर लगाई रोक
Thu, 02 Jul 2026 04:28 PM IST
प्रशांत तिवारी
पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Thu, 02 Jul 2026 04:28 PM IST
सार
अन्ना हजारे की 5 जुलाई से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की चेतावनी के बाद महाराष्ट्र सरकार ने नए RTI नियम, 2026 पर फिलहाल रोक लगा दी है। इन नियमों में आवेदन शुल्क बढ़ाने, पहचान पत्र अनिवार्य करने, एक आवेदन में केवल एक विषय रखने और अपील पर शुल्क लगाने जैसे कई प्रावधान शामिल थे। हज़ारे ने इन्हें RTI कानून की मूल भावना के खिलाफ बताते हुए वापस लेने की मांग की थी।
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मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ ANI
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विस्तार
महाराष्ट्र सरकार ने सूचना का अधिकार (RTI) नियम, 2026 पर फिलहाल रोक लगा दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश के बाद यह फैसला लिया गया। सूत्रों के मुताबिक, नए नियमों में RTI आवेदन शुल्क बढ़ाने, पहचान पत्र अनिवार्य करने और आवेदन को एक ही विषय तक सीमित रखने जैसे कई बदलाव किए गए थे। इनका सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने कड़ा विरोध किया था और 5 जुलाई से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी थी।
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कब से लागू हुआ था सरकार का नया आदेश?
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र के मुख्य सूचना आयुक्त को हाल ही में अधिसूचित RTI नियमों पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। ये नियम सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी किए गए थे और 12 जून को सरकारी गजट में प्रकाशित होने के साथ ही लागू हो गए थे। संशोधित नियमों के तहत सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत जानकारी मांगने के लिए आवेदन शुल्क 30 रुपये निर्धारित किया गया था।
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सरकार ने कितना बढ़ाया था रेट?
सूचना उपलब्ध कराने के लिए शुल्क भी तय किया गया था। A4 आकार के प्रति पृष्ठ की कॉपी के लिए 5 रुपये, स्कैन या डिजिटल प्रति के लिए भी 5 रुपये देने का प्रावधान था। रिकॉर्ड का निरीक्षण पहले एक घंटे तक निःशुल्क रखा गया था, जबकि इसके बाद प्रत्येक घंटे के लिए 50 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया था। गरीबी रेखा (BPL) से नीचे रहने वाले आवेदकों को आवेदन शुल्क से छूट दी गई थी, लेकिन 50 पृष्ठों से अधिक जानकारी लेने पर उन्हें भी निर्धारित शुल्क देना पड़ता।
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एक आवेदन में कितने विषय रखने का था नियम?
नए नियमों के अनुसार, RTI आवेदन सामान्यतः केवल एक विषय तक सीमित होना चाहिए और उसमें लगभग 150 शब्दों से अधिक नहीं होने चाहिए। यदि किसी आवेदन में एक से अधिक विषय शामिल होते, तो जन सूचना अधिकारी (PIO) केवल पहले विषय पर कार्रवाई कर सकता था। बाकी विषयों के लिए आवेदक को अलग-अलग आवेदन देने की सलाह दी जाती।
पहचान बताना भी हो गया था जरूरी
नियमों में यह भी प्रावधान किया गया था कि प्रत्येक आवेदक को भारतीय नागरिकता साबित करने वाले किसी फोटो पहचान पत्र की स्व-सत्यापित प्रति आवेदन के साथ संलग्न करनी होगी। यदि ऐसा प्रमाण उपलब्ध नहीं कराया जाता, तो आवेदन नियमों का पालन न करने के आधार पर वापस किया जा सकता था।
किस सूचना की अलग से कॉपी नहीं मिलती?
नियमों के मुताबिक, यदि मांगी गई जानकारी पहले से ही सरकार या संबंधित सार्वजनिक प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध होती, तो जन सूचना अधिकारी आवेदक को उसकी अलग प्रति उपलब्ध कराने के बजाय वेबसाइट पर जाकर जानकारी देखने के लिए कह सकता था। इसके अलावा, सार्वजनिक गतिविधि या जनहित से संबंधित न होने वाली व्यक्तिगत जानकारी सामान्यतः उपलब्ध नहीं कराई जाती, जब तक कि बड़े जनहित का स्पष्ट आधार न हो।
अपील करने पर कितना तय किया गया था शुल्क?
नोटिफिकेशन के अनुसार, प्रथम अपील दायर करने के लिए 50 रुपये और महाराष्ट्र राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील दाखिल करने के लिए 100 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया था। इसके साथ आवश्यक दस्तावेज जमा करना भी अनिवार्य रखा गया था। सुनवाई व्यक्तिगत रूप से या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की जा सकती थी।
किनकी बढ़ाई गई थी जिम्मेदारी
इन नियमों में सरकारी विभागों और सार्वजनिक प्राधिकरणों के प्रमुखों को RTI अधिनियम की धारा 4 के तहत अधिकाधिक सूचनाएं स्वतः सार्वजनिक करने की जिम्मेदारी दी गई थी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया था कि नियमों का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ संबंधित सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
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अन्ना हजारे का क्या था आरोप?
अन्ना हजारे ने महाराष्ट्र सरकार से 'महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम, 2026' को पूरी तरह वापस लेने की मांग की थी। उनका आरोप था कि नए नियम RTI कानून की मूल भावना को कमजोर करते हैं और आम नागरिकों के लिए सूचना प्राप्त करना पहले की तुलना में अधिक कठिन बना देंगे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भेजे गए ज्ञापन में हज़ारे ने कहा कि नए नियम अपील प्रक्रिया को अधिक जटिल, महंगा और प्रक्रियात्मक रूप से कठिन बना देंगे। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों प्रभावित होंगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने इन नियमों को लागू करने से पहले जनता या संबंधित पक्षों से कोई व्यापक सलाह-मशविरा नहीं किया। हजारे ने मांग की कि सरकार इन नियमों को रद्द करे और RTI विशेषज्ञों, सूचना आयुक्तों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, वकीलों, पत्रकारों तथा नागरिकों से चर्चा के बाद नए नियम तैयार करे।