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चुनाव आयोग से क्यों मिला TMC का बागी गुट?: ममता बनर्जी के धड़े ने उठाए सवाल, नियमों के उल्लंघन का लगाया आरोप
Thu, 02 Jul 2026 04:54 PM IST
निर्मल कांत
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 02 Jul 2026 04:54 PM IST
सार
टीएमसी में नेतृत्व को लेकर अंदरूनी संघर्ष तेज हो गया है, जहां बागी गुट ने निर्वाचन आयोग में दस्तावेज जमा कर पार्टी पर अपना दावा ठोका है और आयोग की सुनवाई पर संतोष जताया है। वहीं, ममता बनर्जी गुट ने इस पर आपत्ति जताते हुए आयोग पर नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए हैं। विस्तार से पढ़िए रिपोर्ट-
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ममता बनर्जी
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने निर्वाचन आयोग के फैसले पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि आयोग ने बागी गुट को मिलने का समय देकर अपने ही नियमों का उल्लंघन किया है। इससे पहले ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने गुरुवार को कहा कि निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ ने पार्टी पर उनके दावे को धैर्य से सुना। उन्होंने उम्मीद जताई कि आयोग जल्द ही इस मामले में जवाब देगा।
ममता के नेतृत्व वाले गुट का क्या कहना है?
लेकिन ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने इस दावे को खारिज किया है। उनका कहना है कि बागी नेता निर्वाचन आयोग के सामने पार्टी का प्रतिनिधित्व करने के लिए अधिकृत (अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता) नहीं हैं। ममता बनर्जी के गुट ने निर्वाचन आयोग के इस फैसले पर भी सवाल उठाए कि उसने बागी गुट को मिलने का समय क्यों दिया। उनका आरोप है कि इससे आयोग ने अपने ही नियमों का उल्लंघन किया है। टीएमसी के वरिष्ठ नेता सौगत राय और सागरिका घोष ने कहा कि किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल की ओर से केवल अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता ही निर्वाचन आयोग से मिलने का समय मांग सकते हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी ने ऐसी कोई मांग नहीं की थी।
सौगत राय ने क्या कहा?
सागरिका घोष ने क्या कहा?
इससे पहले, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो अन्य निर्वाचन आयुक्तों से मुलाकात के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि उनके प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचन आयोग के सामने अपना पक्ष रखा। उन्होंने आयोग को यह भी बताया कि 22 जून को कोलकाता में उनके गुट का विशेष अधिवेशन (बैठक) हुआ था।
उन्होंने कहा, 22 जून को अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) का विशेष अधिवेशन कोलकाता में हुआ था। अधिवेशन के तुरंत बाद हमने इसकी लिखित जानकारी निर्वाचन आयोग को दी। हमने कोलकाता में निर्वाचन आयोग के अधिकारियों से भी मुलाकात की थी और मुख्य निर्वाचन आयुक्त से मिलने का समय मांगा था।
उन्होंने आगे कहा, हम आभारी हैं कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दोनों निर्वाचन आयुक्तों वाली पूर्ण पीठ ने आज हमारी बात धैर्य से सुनी। हमने अपना पक्ष रखा है। निर्वाचन आयोग का धन्यवाद करते हैं। हमें उम्मीद है कि आयोग बहुत जल्द हमसे संपर्क करेगा।
ऋतब्रत बनर्जी ने पार्टी पर दावा ठोकते हुए क्या कहा?
पार्टी के बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने यह बताने से इनकार कर दिया कि उन्होंने निर्वाचन आयोग को कौन-कौन से दस्तावेज दिए हैं। लेकिन उन्होंने कहा कि 22 जून का संगठनात्मक अधिवेशन सभी नियमों का पालन करके किया गया था। उन्होंने कहा, मैं यह नहीं बताऊंगा कि हमने कौन से दस्तावेज दिए हैं। लेकिन हमारा अधिवेशन सभी नियमों के अनुसार हुआ था। हमें पूरी उम्मीद है कि निर्वाचन आयोग जल्द ही हमसे संपर्क करेगा। बागी नेता ने फिर दोहराया कि उनका गुट ही असली तृणमूल कांग्रेस है।
ये भी पढ़ें: खालिस्तानी नेटवर्क में क्यों पड़ी दरार?: खुफिया एजेंसियों ने तेज की कार्रवाई, रणनीति बदलने पर हुए मजबूर
निर्वाचन आयोग के साथ यह बैठक तृणमूल कांग्रेस पर नियंत्रण की लड़ाई में ताजा घटनाक्रम है। ऋतब्रत बनर्जी का गुट चाहता है कि उसे पार्टी का वैध संगठनात्मक और विधायी (विधानमंडल) गुट माना जाए।
बागी गुट ने सीईओ के कार्यालय में जमा कराए दस्तावेज
पिछले हफ्ते बागी गुट ने कोलकाता में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय में दस्तावेज जमा किए थे। साथ ही निर्वाचन आयोग को अलग से भी जानकारी भेजी थी। उनका दावा है कि वही मूल तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने पार्टी के नाम, दो फूल वाले चुनाव चिन्ह और संगठन पर भी अपना दावा किया है। उनका कहना है कि पार्टी के ज्यादातर विधायक और पदाधिकारी उनके साथ हैं।
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ममता के नेतृत्व वाले गुट का क्या कहना है?
लेकिन ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने इस दावे को खारिज किया है। उनका कहना है कि बागी नेता निर्वाचन आयोग के सामने पार्टी का प्रतिनिधित्व करने के लिए अधिकृत (अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता) नहीं हैं। ममता बनर्जी के गुट ने निर्वाचन आयोग के इस फैसले पर भी सवाल उठाए कि उसने बागी गुट को मिलने का समय क्यों दिया। उनका आरोप है कि इससे आयोग ने अपने ही नियमों का उल्लंघन किया है। टीएमसी के वरिष्ठ नेता सौगत राय और सागरिका घोष ने कहा कि किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल की ओर से केवल अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता ही निर्वाचन आयोग से मिलने का समय मांग सकते हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी ने ऐसी कोई मांग नहीं की थी।
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सौगत राय ने क्या कहा?
- सौगत राय ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को बताया था कि केवल अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता ही मुलाकात का समय मांग सकते हैं।
- उन्होंने पूछा कि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस ने कोई समय नहीं मांगा। फिर निर्वाचन आयोग ने टीएमसी से निकाले गए एक व्यक्ति को किस आधार पर मिलने का समय दिया?
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सागरिका घोष ने क्या कहा?
- टीएमसी की नेता सागरिका घोष ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कहने पर काम कर रहा है।
- उन्होंने कहा, निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ से मिलने का समय केवल अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता ही मांग सकते हैं। लेकिन आज एक ऐसे व्यक्ति के नेतृत्व वाला समूह पूर्ण पीठ से मिला, जिसे पार्टी से निकाला जा चुका है।
- उन्होंने पूछा कि निर्वाचन आयोग के अपने नियमों के अनुसार इस समूह को मिलने की अनुमति कैसे मिली?
- सागरिका घोष ने राजनीतिक दल और उसके विधायी दल के बीच अंतर बताते हुए कहा कि विधायी दल संगठन का केवल एक हिस्सा होता है। वह पार्टी के विलय या विभाजन का फैसला नहीं कर सकता।
- उन्होंने कहा, यह कैसा समूह है जिसके पास एक भी सांसद (एमपी) नहीं है? इसे निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ से मिलने का समय सिर्फ इसलिए मिला क्योंकि इसके पीछे भाजपा और अमित शाह हैं।
इससे पहले, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो अन्य निर्वाचन आयुक्तों से मुलाकात के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि उनके प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचन आयोग के सामने अपना पक्ष रखा। उन्होंने आयोग को यह भी बताया कि 22 जून को कोलकाता में उनके गुट का विशेष अधिवेशन (बैठक) हुआ था।
उन्होंने कहा, 22 जून को अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) का विशेष अधिवेशन कोलकाता में हुआ था। अधिवेशन के तुरंत बाद हमने इसकी लिखित जानकारी निर्वाचन आयोग को दी। हमने कोलकाता में निर्वाचन आयोग के अधिकारियों से भी मुलाकात की थी और मुख्य निर्वाचन आयुक्त से मिलने का समय मांगा था।
उन्होंने आगे कहा, हम आभारी हैं कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दोनों निर्वाचन आयुक्तों वाली पूर्ण पीठ ने आज हमारी बात धैर्य से सुनी। हमने अपना पक्ष रखा है। निर्वाचन आयोग का धन्यवाद करते हैं। हमें उम्मीद है कि आयोग बहुत जल्द हमसे संपर्क करेगा।
ऋतब्रत बनर्जी ने पार्टी पर दावा ठोकते हुए क्या कहा?
पार्टी के बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने यह बताने से इनकार कर दिया कि उन्होंने निर्वाचन आयोग को कौन-कौन से दस्तावेज दिए हैं। लेकिन उन्होंने कहा कि 22 जून का संगठनात्मक अधिवेशन सभी नियमों का पालन करके किया गया था। उन्होंने कहा, मैं यह नहीं बताऊंगा कि हमने कौन से दस्तावेज दिए हैं। लेकिन हमारा अधिवेशन सभी नियमों के अनुसार हुआ था। हमें पूरी उम्मीद है कि निर्वाचन आयोग जल्द ही हमसे संपर्क करेगा। बागी नेता ने फिर दोहराया कि उनका गुट ही असली तृणमूल कांग्रेस है।
ये भी पढ़ें: खालिस्तानी नेटवर्क में क्यों पड़ी दरार?: खुफिया एजेंसियों ने तेज की कार्रवाई, रणनीति बदलने पर हुए मजबूर
- ऋतब्रत बनर्जी ने कहा, हम ही असली टीएमसी हैं। पार्टी के दो-तिहाई से ज्यादा विधायक (एमएलए) हमारे साथ हैं। नगर निगम के पार्षद और नगर परिषद के सदस्य भी हमारे साथ हैं।
- उन्होंने यह भी कहा कि अधिवेशन के बाद निर्वाचन आयोग को जानकारी देना तय प्रक्रिया का हिस्सा है और उनका गुट यह प्रक्रिया पूरी कर चुका है।
निर्वाचन आयोग के साथ यह बैठक तृणमूल कांग्रेस पर नियंत्रण की लड़ाई में ताजा घटनाक्रम है। ऋतब्रत बनर्जी का गुट चाहता है कि उसे पार्टी का वैध संगठनात्मक और विधायी (विधानमंडल) गुट माना जाए।
बागी गुट ने सीईओ के कार्यालय में जमा कराए दस्तावेज
पिछले हफ्ते बागी गुट ने कोलकाता में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय में दस्तावेज जमा किए थे। साथ ही निर्वाचन आयोग को अलग से भी जानकारी भेजी थी। उनका दावा है कि वही मूल तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने पार्टी के नाम, दो फूल वाले चुनाव चिन्ह और संगठन पर भी अपना दावा किया है। उनका कहना है कि पार्टी के ज्यादातर विधायक और पदाधिकारी उनके साथ हैं।