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आरजी कर मामला: विसरा नमूनों से छेड़छाड़ का आरोप, पत्र के आधार पर अदालत पहुंचा परिवार

Thu, 02 Jul 2026 06:12 PM IST
राहुल कुमार अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता Published by: राहुल कुमार Updated Thu, 02 Jul 2026 06:12 PM IST
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RG Kar case: Allegation of tampering with viscera samples; family moves court based on a letter
डॉक्टरों का प्रदर्शन - फोटो : ANI
आरजी कर मेडिकल कॉलेज की प्रशिक्षु चिकित्सक से दुष्कर्म और हत्या के मामले में अब विसरा (आंतरिक अंगों के नमूनों) से कथित छेड़छाड़ का नया आरोप सामने आया है। पीड़िता के परिवार ने सियालदह अदालत का रुख करते हुए एक पूर्व फोरेंसिक अधिकारी के पत्र के आधार पर आरोपों की सीबीआई से जांच कराने की मांग की है।
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परिवार का दावा है कि उन्हें मई में दो बार एक गुमनाम पत्र मिला था। पत्र लिखने वाले ने खुद को बेलगाछिया स्थित राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला का पूर्व कर्मचारी बताया है। परिवार के अनुसार, पत्र में आरोप लगाया गया है कि फोरेंसिक विश्लेषण के लिए सुरक्षित रखे गए पीड़िता के विसरा नमूनों से राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई। साथ ही, केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला और सीबीआई को भेजे गए नमूने भी मूल नहीं थे।
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पत्र में राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला के तीन अधिकारियों का नाम लेकर उन पर नमूनों में कथित हेरफेर का आरोप लगाया गया है। हालांकि, परिवार ने सार्वजनिक रूप से उन अधिकारियों के नाम उजागर नहीं किए हैं और मीडिया ने भी उनकी पहचान प्रकाशित नहीं की है।
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पीड़िता के पिता ने कहा कि उन्हें पहला पत्र 16 मई और दूसरा 23 मई को मिला था। उनका दावा है कि दोनों पत्र मिलने के बाद इसकी जानकारी सीबीआई को दी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब परिवार ने अदालत से पत्र की सत्यता की जांच कराने और उसमें लगाए गए आरोपों के आधार पर जांच के आदेश देने की मांग की है।


परिवार का कहना है कि विसरा के नमूने इस उद्देश्य से लिए गए थे कि यह पता लगाया जा सके कि पीड़िता को किसी प्रकार का विषाक्त पदार्थ या बेहोशी की दवा दी गई थी या नहीं। आरोप है कि इन्हीं नमूनों में कथित रूप से बदलाव किया गया। पत्र में यह भी दावा किया गया है कि अतीत में अन्य मामलों में भी विसरा नमूनों से कथित छेड़छाड़ की गई थी। साथ ही, कुछ अधिकारियों पर फोरेंसिक जांच में निम्न गुणवत्ता की सामग्री इस्तेमाल करने के आरोप भी लगाए गए हैं। इन सभी दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। परिवार ने अदालत से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया है। मामले में अदालत के निर्देश और जांच एजेंसियों की प्रतिक्रिया का इंतजार है।


 
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