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CJI के सुझाव के बिना होगी चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति: SC का फैसला जल्द; सरकार के किस कानून को दी गई है चुनौती?
Thu, 30 Jul 2026 04:58 PM IST
प्रशांत तिवारी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Thu, 30 Jul 2026 04:58 PM IST
सार
मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी पीठ को मामला भेजने के सवाल पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। अदालत ने सभी पक्षों से लिखित दलीलें मांगी हैं। याचिकाओं में मुख्य न्यायाधीश को चयन समिति से बाहर रखने पर आपत्ति जताई गई है और इसे चुनाव आयोग की स्वतंत्रता के लिए खतरा बताया गया है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयुक्तों (ईसी) की नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अदालत अब यह तय करेगी कि नियुक्ति प्रक्रिया को नियंत्रित करने वाले 2023 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सुनवाई के लिए बड़ी, पांच सदस्यीय संविधान पीठ के पास भेजा जाए या नहीं। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने सभी पक्षों से इस मुद्दे पर लिखित दलीलें भी दाखिल करने को कहा।
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क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि हम इस मामले को बड़ी पीठ के पास भेजने के प्रश्न पर अपना आदेश सुरक्षित रख रहे हैं। सभी पक्ष अपनी लिखित दलीलें दाखिल कर सकते हैं। इसके बाद अदालत ने इस मुद्दे पर फैसला सुरक्षित रख लिया।
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किस कानून को चुनौती दी गई है?
सुप्रीम कोर्ट उन कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह कानून चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को प्रभावित करता है।
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नए कानून में चयन समिति में कौन-कौन हैं?
2023 के कानून के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए बनी चयन समिति में प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय मंत्री और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (या सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता) शामिल होते हैं।
विवाद की सबसे बड़ी वजह क्या है?
याचिकाओं में कहा गया है कि इस कानून के तहत भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को चयन समिति से बाहर कर दिया गया है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इससे नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्षता और चुनाव आयोग की संस्थागत स्वतंत्रता पर असर पड़ सकता है।
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किन लोगों ने दायर की हैं याचिकाएं?
इस कानून को चुनौती देने वालों में कांग्रेस नेता जया ठाकुर और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) समेत कई याचिकाकर्ता शामिल हैं। उनका कहना है कि चयन प्रक्रिया में न्यायपालिका की भागीदारी खत्म करना संविधान की मूल भावना के विपरीत है।