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आपातकाल: पीएम मोदी ने दोहराया संविधान के प्रति संकल्प, उपराष्ट्रपति बोले- सांविधानिक मूल्यों की हुई थी परीक्षा

आईएएनएस, नई दिल्ली Published by: Asmita Tripathi Updated Thu, 25 Jun 2026 12:54 PM IST
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सार

आपातकाल की 51वीं बरसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने इसे भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने संविधान के प्रति संकल्प को दोहराया है। इसके साथ ही उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस दिन सांविधानिक मूल्यों की परीक्षा हुई थी। 

Emergency PM Modi commitment to the Constitution Vice President says constitutional values put to the test.
पीएम मोदी ने लोकतंत्र की रक्षा का लिया संकल्प - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

आपातकाल की आज 51वीं बरसी है। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारतीय इतिहास का सबसे काला दिन बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'संविधान हत्या दिवस' के अवसर पर कहा कि यह दिन आज हमें उस काले दौर की याद दिला रहा है, जब भारतीय लोकतंत्र को बुरी तरह से कुचला गया था।इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हम ऐसे भारत के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्शों के प्रति सदैव समर्पित रहे।

प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'आज हम उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने भारत के इतिहास के सबसे काले दौर में से एक, यानी 'आपातकाल' के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती से रक्षा की।'

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'आपातकाल हमारे संविधान पर सीधा हमला था'
उन्होंने लिखा, 'आपातकाल हमारे संविधान पर सीधा हमला था। इस दौरान नागरिक स्वतंत्रताएं छीन ली गईं, अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक लगाई गई, राजनीतिक नेताओं, पत्रकारों और समाज सेवकों को गिरफ्तार किया गया। इसके साथ ही उन संस्थाओं पर हमला किया गया, जो हमारे लोकतंत्र की नींव हैं।  उस दौर ने अनगिनत नागरिकों के असाधारण साहस को भी दिखाया, जिन्होंने चुप रहने से इनकार कर दिया और हमारे संविधान में निहित आदर्शों को बनाए रखा।'

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भारतीय लोकतंत्र को बुरी तरह से कुचला गया
उन्होंने आगे लिखा, 'हम सभी के लिए, हमारा संविधान 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं, अधिकारों और कर्तव्यों का प्रतीक है। हम सांविधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता को दोहराते हैं। अपने संविधान की भावना से प्रेरित होकर हम एक ऐसा भारत बनाएंगे, जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के प्रति हमेशा प्रतिबद्ध रहे।' 'संविधान हत्या दिवस आज हमें उस काले दौर की याद दिला रहा है, जब भारतीय लोकतंत्र को बुरी तरह से कुचला गया था। यह हमें लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहने को प्रेरित करता है। आपातकाल का विरोध करने वाली सभी विभूतियों को सादर नमन।'

इसके साथ ही, पीएम मोदी ने 'संस्कृत सुभाषितम्' शेयर करते हुए लिखा, 'स्वातन्त्र्यात् सुखमाप्नोति स्वातन्त्र्याल्लभते परम्। स्वातन्त्र्यान्निर्वृत्तिं गच्छेत् स्वातन्त्र्यात् परमं पदम्।' इसमें कहा गया है, 'स्वतंत्रता से ही मनुष्य सुख प्राप्त करता है, स्वतंत्रता से ही वह सर्वोच्च उपलब्धि पाता है। स्वतंत्रता से ही वह शांत अवस्था को प्राप्त होता है और स्वतंत्रता के माध्यम से ही वह परम पद को प्राप्त करता है।'

इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक आपातकाल -उपराष्ट्रपति
इसके साथ ही उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने गुरुवार को 'संविधान हत्या दिवस' के मौके पर उन लोगों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने 1975 के आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक और सांविधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए आवाज उठाई थी।  उपराष्ट्रपति ने एक्स पर लिखा, 'संविधान हत्या दिवस' पर, मैं उन सभी बहादुर लोगों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं जो भारत के इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक-1975 में घोषित 'आपातकाल' (इमरजेंसी) के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए अडिग रहे और हमारे संविधान की भावना को सुरक्षित रखा।'

दरअसल, 25 जून 1975 को भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाया था। 1975 का भारतीय आपातकाल (25 जून 1975 - 21 मार्च 1977) 21 महीने की वह अवधि थी जब इंदिरा गांधी सरकार ने संविधान के तहत प्रमुख लोकतांत्रिक मानदंडों और नागरिक स्वतंत्रताओं को निलंबित कर दिया था। इसे स्वतंत्र भारत के इतिहास की सबसे विवादास्पद और सत्तावादी घटनाओं में से एक माना जाता है, जिसे अक्सर लोकतंत्र के लिए एक 'काला अध्याय कहा जाता है।

 

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