सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Evidence damaged, witnesses missing: Court acquits Maharashtra couple on the run for 37 years

सबूत खराब, गवाह गायब: 37 साल से फरार महाराष्ट्र के दंपति को कोर्ट ने किया बरी, कहा- मुकदमा चलाना अब बेकार

पीटीआई, ठाणे Published by: Asmita Tripathi Updated Wed, 27 May 2026 12:36 PM IST
विज्ञापन
सार

महाराष्ट्र कोर्ट ने 37 साल पुराने मामले में फरार दंपति को बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि सबूत खराब हो चुके हैं। गवाह भी गायब है, तो मुकदमा चलाना बेकार है। पढ़ें पूरी खबर

Evidence damaged, witnesses missing: Court acquits Maharashtra couple on the run for 37 years
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobestock
विज्ञापन

विस्तार

ठाणे की एक अदालत ने 37 साल पुराने हत्या के प्रयास के मामले में फरार दंपति को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि लंबी देरी के कारण अभियोजन पक्ष प्रत्येक गवाह का पता लगाने में असमर्थ रहा है। वहीं मामले के दस्तावेज क्षतिग्रस्त और पढ़ें योग नहीं थे। 

कल्याण अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पीआर अष्टुरकर ने सोमवार को ललितमोहन देवेंद्रनाथ दुग्गल और उनकी पत्नी रीता ललितमोहन दुग्गल को बरी करते हुए अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है, जो दूर-दूर तक इस मामले में आरोपियों की संलिप्तता और सक्रिय भागीदारी का संकेत देता हो।

विज्ञापन
विज्ञापन

यह भी पढ़ें-  देश में गर्मी ने बढ़ाया तापमान: पीएम मोदी ने नागरिकों से की सावधानी बरतने की अपील, साथ में दी नेकी की सलाह

विज्ञापन
Trending Videos

क्या है पूरा मामला?
दरअसल, महाराष्ट्र के ठाणे जिले के उल्हासनगर में 6 अप्रैल, 1989 को कचरा निपटान को लेकर हुए विवाद के बाद अपने पड़ोसी पर तेजाब से हमला करने के आरोप में दंपति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास) और 34 (सामान्य इरादा) के तहत मामला दर्ज किया गया था। यह मामला 1996 में जिला न्यायालय से कल्याण सत्र न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया था और लगभग तीन दशकों तक लंबित रहा क्योंकि आरोपी जमानत तोड़कर फरार हो गया था।


यह भी पढ़ें-  SIR: 'एसआईआर कराना चुनाव आयोग का अधिकार', मतदाता सूची पुनरीक्षण की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर

कोर्ट ने क्या कहा?
पुराने मामलों को प्राथमिकता देने के उच्च न्यायालय के निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए सत्र न्यायालय ने हाल ही में फरार दंपति के खिलाफ एक घोषणा प्रकाशित की। वहीं, 25 मई को अपना अंतिम फैसला सुनाने से पहले सीआरपीसी की धारा 299 (फरार आरोपी की अनुपस्थिति में साक्ष्य दर्ज करने की अनुमति देने वाली धारा) के तहत औपचारिक पुलिस गवाही दर्ज की। न्यायाधीश ने टिप्पणी की ' यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि घटना घटने के लगभग 37 साल बीत जाने के कारण अभियोजन पक्ष हर गवाह का पता खो बैठा होगा। इसके साथ ही, रिकॉर्ड बहुत पुराना होने के कारण उसके पन्नों को संभालना भी बहुत मुश्किल है। सभी दस्तावेज फटे हुए हैं और उन्हें पढ़ा भी नहीं जा सकता।'

विट्ठलवाड़ी पुलिस की ओर से  पीड़िता सुसान जॉर्ज माइक उसके परिवार के सदस्यों या किसी भी स्वतंत्र स्पॉट पंच का पता लगाने में विफल रहने के बाद अभियोजन पक्ष का मामला धराशायी हो गया। पूरे मुकदमे में केवल पुलिस कांस्टेबल गोपाल जयराम सावले से ही पूछताछ की गई, जो वारंट तामील करने वाला अधिकारी था। उसने औपचारिक रूप से बयान दिया कि आरोपपत्र में नामित किसी भी व्यक्ति का पता नहीं लगाया जा सका।

ठिकाने के बारे में किसी को भी कोई जानकारी नहीं
न्यायाधीश ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि ऐसे मुकदमे को आगे बढ़ाना निरर्थक है, जिसमें सबूत और पक्षकार दोनों ही कानूनी व्यवस्था के लिए अस्तित्वहीन हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि आरोपी 30 वर्षों से अधिक समय से लापता हैं।  उनके ठिकाने के बारे में किसी को भी कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में उनके मिलने की दूर-दूर तक कोई संभावना नहीं है। उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है। आरोपियों की उपस्थिति की उम्मीद में मामले को लटकाए रखने से कोई लाभ नहीं होगा। 'यह एक व्यर्थ प्रयास होगा, जिसका कोई परिणाम नहीं निकलेगा। इसलिए, आरोपी बरी होने के हकदार हैं।' इसने उनके दशकों पुराने जमानत बांड को रद्द करने का आदेश दिया और निर्देश दिया कि जब्त किए गए हथियार - एक चाकू - को कानूनी कार्रवाई के लिए जिला मजिस्ट्रेट को भेज दिया जाए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed