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'सीमा पार के लोग कट्टर दुश्मन नहीं': जनरल नरवणे का बड़ा बयान, पाकिस्तान से बातचीत पर किया संघ के रुख का समर्थन

पीटीआई, मुंबई Published by: Devesh Tripathi Updated Wed, 13 May 2026 08:03 PM IST
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सार

आरएसएस नेता दत्तात्रेय होसबाले ने कहा था कि पाकिस्तान के साथ बातचीत के दरवाजे बंद नहीं होने चाहिए। आरएसएस महासचिव के इस बयान का पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) मनोज नरवणे ने समर्थन किया है। जनरल नरवणे ने कहा कि दोनों देशों के लोगों के बीच दोस्ती द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बना सकती है। 

Ex-army chief Naravane backs RSS leader remarks on dialogue with Pakistan says people are not sworn enemies
पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) मनोज नरवणे - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) मनोज नरवणे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नेता दत्तात्रेय होसबाले के पाकिस्तान के साथ बातचीत को लेकर दिए गए बयान का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के लोगों के बीच दोस्ती द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बना सकती है।
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एक कार्यक्रम से इतर पीटीआई से बात करते हुए जनरल नरवणे ने कहा, "सीमा के दोनों ओर आम लोग रहते हैं, जिनकी रोटी, कपड़ा और मकान की समस्याएं एक जैसी हैं। आम आदमी का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। जब दोनों देशों के लोगों के बीच दोस्ती होगी, तो दोनों देशों के बीच भी दोस्ती होगी।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि "यह सही बात है। लोगों के बीच संपर्क महत्वपूर्ण है।"
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पाकिस्तान से संबंधों पर क्या बोले थे दत्तात्रेय होसबाले?
आरएसएस नेता दत्तात्रेय होसबाले ने एक साक्षात्कार में कहा था कि पाकिस्तान के साथ गतिरोध तोड़ने के लिए लोगों के बीच संपर्क महत्वपूर्ण है और बातचीत के लिए हमेशा एक रास्ता खुला रहना चाहिए। होसबाले ने यह भी कहा था कि पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व ने भारत का विश्वास खो दिया है और अब नागरिक समाज के नेतृत्व करने का समय आ गया है।

कूटनीति और सैन्य शक्ति का संतुलन जरूरी : जनरल नरवणे
जनरल नरवणे ने कहा कि दोनों देशों के लोगों के बीच जुड़ाव होना चाहिए, चाहे वह 'ट्रैक टू' कूटनीति के माध्यम से हो या किसी खेल आयोजन के माध्यम से। उन्होंने कहा, "हमारे लोगों को यह भी पता होना चाहिए कि सीमा के पार रहने वाले लोग कट्टर दुश्मन नहीं हैं।" 

उन्होंने आगे कहा, "विवादों को बातचीत के माध्यम से हल किया जाना चाहिए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम सैन्य बल का प्रयोग नहीं कर सकते। भारत एक ऐसा देश है जो शांति की भाषा बोलता है, लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो बल प्रयोग करने में संकोच नहीं करेगा।"

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क्या होती है ट्रैक टू कूटनीति?
ट्रैक टू कूटनीति के तहत गैर-सरकारी, अनौपचारिक और नागरिकों/विशेषज्ञों (जैसे शिक्षाविदों, सेवानिवृत्त राजनयिकों, या गैर-सरकारी संगठनों) के बीच बातचीत की एक प्रक्रिया है। 

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