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'जनता को न भटकाएं, समय पर करें काम': आयकर विभाग को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की दो टूक, और क्या-क्या बोलीं?
Sun, 26 Jul 2026 03:48 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, मुंबई।
पीटीआई, मुंबई।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 26 Jul 2026 03:48 PM IST
सार
मुंबई में आयकर विभाग की नई इमारत 'आयकर सिंधु' के उद्घाटन के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अधिकारियों को आम लोगों के प्रति संवेदनशील बनने, सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और कर प्रशासन में पूरी ईमानदारी व पारदर्शिता बरतने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि नागरिकों को बेवजह दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें और प्रशासनिक ढिलाई की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।
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निर्मला सीतारमण, केंद्रीय वित्त मंत्री
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आयकर विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि उनका काम सिर्फ कर वसूली तक सीमित नहीं है, बल्कि आम लोगों को समय पर और बिना परेशानी के सेवाएं देना भी उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक को छोटे-छोटे कामों के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ने चाहिए। अधिकारियों को नियमों का पालन करते हुए लोगों के वैध दावों और अधिकारों का समय पर निपटारा करना चाहिए।
रविवार को मुंबई के नरीमन पॉइंट में आयकर विभाग की नई 13 मंजिला इमारत 'आयकर सिंधु' के उद्घाटन के दौरान वित्त मंत्री ने अधिकारियों को प्रशासनिक जवाबदेही, ईमानदारी और संवेदनशीलता का संदेश दिया। करीब 1.13 लाख वर्ग फीट में बनी इस इमारत के उद्घाटन समारोह में उन्होंने विभाग की कार्यशैली पर भी खुलकर बात की।
1973 से खाली पड़ी जमीन पर हुए कब्जों पर जताई नाराजगी
निर्मला सीतारमण ने कहा कि जिस जमीन पर आज नई इमारत खड़ी है, वह 1973 से आयकर विभाग के पास थी। लंबे समय तक उसका उपयोग नहीं होने के कारण वहां अवैध कब्जे हो गए। उन्होंने इसे प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण बताते हुए कहा कि सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा करना विभाग की जिम्मेदारी है। यदि समय रहते संपत्तियों की देखभाल नहीं की जाएगी, तो बाद में बहाने बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
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'अधिकारियों को भी समझना चाहिए आम आदमी की परेशानी'
वित्त मंत्री ने कहा कि इस भवन के निर्माण के लिए जरूरी मंजूरियां हासिल करने में खुद आयकर विभाग के अधिकारियों को भी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि जब एक शक्तिशाली सरकारी विभाग के अधिकारियों को विभिन्न मंजूरियों के लिए भटकना पड़ता है, तो आम नागरिकों की परेशानी का अंदाजा लगाया जा सकता है। इस अनुभव से अधिकारियों को लोगों की समस्याओं को समझना चाहिए और अनावश्यक देरी से बचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के अधिकारियों के पास महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं। इसलिए उन्हें अपने अधिकारों का उपयोग पूरी ईमानदारी, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ करना चाहिए। कर प्रशासन में ईमानदारी सबसे बड़ा सिद्धांत होना चाहिए।
अधिकारियों के आवास की समस्या दूर करने का भरोसा
सीतारमण ने माना कि मुंबई और नवी मुंबई में कार्यरत आयकर विभाग के लगभग आधे अधिकारियों के पास सरकारी आवास नहीं हैं। ऐसे में उन्हें रोज लंबी दूरी तय कर दफ्तर पहुंचना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए सरकार सरकारी विभागों के बीच जमीन के हस्तांतरण (G2G ट्रांसफर) को बढ़ावा देगी।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में बीएसएनएल जैसी सरकारी कंपनियों की अनुपयोगी जमीन का उपयोग करने की संभावना पर भी विचार किया जाएगा। साथ ही सीपीडब्ल्यूडी को निर्माण कार्य, टेंडर और अन्य प्रक्रियाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि भविष्य में विभाग को महंगे किराये के दफ्तरों पर निर्भर न रहना पड़े।
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रविवार को मुंबई के नरीमन पॉइंट में आयकर विभाग की नई 13 मंजिला इमारत 'आयकर सिंधु' के उद्घाटन के दौरान वित्त मंत्री ने अधिकारियों को प्रशासनिक जवाबदेही, ईमानदारी और संवेदनशीलता का संदेश दिया। करीब 1.13 लाख वर्ग फीट में बनी इस इमारत के उद्घाटन समारोह में उन्होंने विभाग की कार्यशैली पर भी खुलकर बात की।
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1973 से खाली पड़ी जमीन पर हुए कब्जों पर जताई नाराजगी
निर्मला सीतारमण ने कहा कि जिस जमीन पर आज नई इमारत खड़ी है, वह 1973 से आयकर विभाग के पास थी। लंबे समय तक उसका उपयोग नहीं होने के कारण वहां अवैध कब्जे हो गए। उन्होंने इसे प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण बताते हुए कहा कि सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा करना विभाग की जिम्मेदारी है। यदि समय रहते संपत्तियों की देखभाल नहीं की जाएगी, तो बाद में बहाने बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
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'अधिकारियों को भी समझना चाहिए आम आदमी की परेशानी'
वित्त मंत्री ने कहा कि इस भवन के निर्माण के लिए जरूरी मंजूरियां हासिल करने में खुद आयकर विभाग के अधिकारियों को भी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि जब एक शक्तिशाली सरकारी विभाग के अधिकारियों को विभिन्न मंजूरियों के लिए भटकना पड़ता है, तो आम नागरिकों की परेशानी का अंदाजा लगाया जा सकता है। इस अनुभव से अधिकारियों को लोगों की समस्याओं को समझना चाहिए और अनावश्यक देरी से बचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के अधिकारियों के पास महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं। इसलिए उन्हें अपने अधिकारों का उपयोग पूरी ईमानदारी, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ करना चाहिए। कर प्रशासन में ईमानदारी सबसे बड़ा सिद्धांत होना चाहिए।
अधिकारियों के आवास की समस्या दूर करने का भरोसा
सीतारमण ने माना कि मुंबई और नवी मुंबई में कार्यरत आयकर विभाग के लगभग आधे अधिकारियों के पास सरकारी आवास नहीं हैं। ऐसे में उन्हें रोज लंबी दूरी तय कर दफ्तर पहुंचना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए सरकार सरकारी विभागों के बीच जमीन के हस्तांतरण (G2G ट्रांसफर) को बढ़ावा देगी।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में बीएसएनएल जैसी सरकारी कंपनियों की अनुपयोगी जमीन का उपयोग करने की संभावना पर भी विचार किया जाएगा। साथ ही सीपीडब्ल्यूडी को निर्माण कार्य, टेंडर और अन्य प्रक्रियाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि भविष्य में विभाग को महंगे किराये के दफ्तरों पर निर्भर न रहना पड़े।