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हिंदी विरोधी आंदोलन से 2026 के 'कॉकरोच आंदोलन' तक: विवादों में घिरते रहे शिक्षा मंत्री, लेकिन इस्तीफा पहली बार

Sun, 26 Jul 2026 05:07 AM IST
प्रशांत तिवारी अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: प्रशांत तिवारी Updated Sun, 26 Jul 2026 05:07 AM IST
सार

देश के शिक्षा मंत्रालय का इतिहास लगातार विवादों से जुड़ा रहा है। 1965 के हिंदी विरोधी आंदोलन से लेकर 2026 के नीट पेपर लीक और 'कॉकरोच आंदोलन' तक कई शिक्षा मंत्रियों को नीतिगत फैसलों और छात्र आंदोलनों के कारण आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। हालांकि, इन लंबे विवादों के इतिहास में धर्मेंद्र प्रधान पहले ऐसे शिक्षा मंत्री बने, जिन्हें लगातार बढ़ते विवादों और छात्र आंदोलन के बीच पद छोड़ना पड़ा।

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From anti-Hindi movement to cockroach Education Minister getting embroiled controversies resigned first time
मुरली मनोहर जोशी, स्मृती ईरानी, रमेश पोखरियाल और धर्मेंद्र प्रधान - फोटो : ANI

विस्तार

शिक्षा मंत्रालय (पूर्व में मानव संसाधन विकास मंत्रालय) के मंत्रियों का विवादों से पुराना नाता रहा है। 1965 से 2026 तक यूपीए से लेकर मोदी सरकार के कार्यकाल में कई शिक्षा मंत्री अपने नीतिगत फैसलों, बयानों और डिग्री से जुड़े मुद्दों के कारण सुर्खियों में रहे। धर्मेंद्र प्रधान के पद गंवाने की वजह चार बड़े विवाद बने। इनमें नीट पेपर लीक, स्कूलों में त्रिभाषा नीति के तहत हिंदी को लेकर विवाद, एनसीईआरटी की इतिहास की किताबों में बदलाव, न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और आपातकाल (इमरजेंसी) से जुड़े विषयों को शामिल करना तथा यूजीसी रेग्यूलेशन-2025 प्रमुख रहे। इन मुद्दों के चलते धर्मेंद्र प्रधान छात्र संगठनों, शिक्षकों और विपक्ष के सीधे निशाने पर रहे।

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क्या स्मृति ईरानी के कार्यकाल में भी शिक्षा मंत्रालय विवादों में रहा था?
स्मृति ईरानी और धर्मेंद्र प्रधान, दोनों ही बतौर शिक्षा मंत्री बड़े छात्र आंदोलनों और राजनीतिक घमासान के केंद्र में रहे। जनवरी 2016 में हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या के बाद तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी को भारी विरोध और इस्तीफे की मांग का सामना करना पड़ा था। इस मुद्दे पर संसद में उनकी विभिन्न दलों के नेताओं, विशेषकर मायावती, से तीखी बहस भी हुई थी। हालांकि, मोदी सरकार ने 2016 के कैबिनेट फेरबदल में उनका मंत्रालय बदल दिया। इसके बाद 2024 में नीट परीक्षा में गड़बड़ी और 2026 में नीट पेपर लीक के मुद्दे पर धर्मेंद्र प्रधान विवादों में घिर गए। कपिल सिब्बल और स्मृति ईरानी के कार्यकाल में चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम (एफवाईयूपी) को लेकर भी लगभग एक जैसा विवाद देखने को मिला। कपिल सिब्बल 29 मई 2009 से 28 अक्तूबर 2012 तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री रहे थे।
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किन-किन शिक्षा मंत्रियों के कार्यकाल में कौन-से बड़े विवाद हुए? 

वर्ष केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रमुख विवाद
1965 एम.सी. चागला हिंदी विरोधी आंदोलन
1967 त्रिगुण सेन क्षेत्रीय भाषा विवाद
1990 वी.पी. सिंह मंडल आयोग और आरक्षण
2002 मुरली मनोहर जोशी एनसीईआरटी के 'भगवाकरण' का विवाद
2006 अर्जुन सिंह ओबीसी आरक्षण का विरोध
2013-14 कपिल सिब्बल चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम
2014 स्मृति ईरानी चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम
2016 स्मृति ईरानी रोहित वेमुला, जेएनयू और इलाहाबाद विश्वविद्यालय विवाद
2020 रमेश पोखरियाल नई शिक्षा नीति (एनईपी-2020)
2024-26 धर्मेंद्र प्रधान नीट परीक्षा में गड़बड़ी, नीट पेपर लीक, एनसीईआरटी की किताबों पर विवाद और त्रिभाषा नीति

ये भी पढ़ें: ऐसे बनी प्रधान के इस्तीफे की सूरत: IB-शाह की रिपोर्ट से चिंतित थी सरकार, सफाई देने संघ गए पूर्व शिक्षा मंत्री
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