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'छात्रों की भावनाएं महत्वपूर्ण': BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने मांगी माफी; क्या है पूरा मामला?

Sat, 15 Aug 2026 09:33 PM IST
राकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: राकेश कुमार Updated Sat, 15 Aug 2026 09:33 PM IST
सार

एनएएलएसएआर विवाद के बीच बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने कानून छात्रों की भावनाएं आहत होने पर खेद जताते हुए माफी मांगी है। उन्होंने दीक्षांत समारोह में शामिल होने या न होने का फैसला छात्रों पर छोड़ने की बात कही। साथ ही मतभेदों को बातचीत और आपसी सम्मान से सुलझाने पर जोर दिया।
 

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bci chairperson manan kumar mishra apologizes to nalsar law students over convocation row
मनन कुमार मिश्रा, बीसीआई अध्यक्ष - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने एनएएलएसएआर विवाद के बीच कानून छात्रों से माफी मांगी है। स्वतंत्रता दिवस पर जारी तीन पन्नों के पत्र में मिश्रा ने कहा कि अगर उनके किसी शब्द या विवाद से जुड़ी किसी चिट्ठी से कानून छात्रों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो उन्हें इसका खेद है। उन्होंने इसके लिए माफी भी मांगी।
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'पछतावा जताना प्रतिष्ठा या अहंकार का सवाल नहीं'
मनन कुमार मिश्रा ने पत्र में कहा कि अगर मौजूदा विवाद से जुड़ी उनकी किसी बात या पत्र से कानून छात्रों की भावनाओं को ठेस पहुंची है, तो वह इसके लिए ईमानदारी से खेद जताते हैं और माफी मांगते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा कहने में कोई झिझक नहीं होनी चाहिए। मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि खेद जताना प्रतिष्ठा या अहंकार का सवाल नहीं है। यह सिर्फ इस बात को स्वीकार करना है कि छात्रों की भावनाएं और उनकी चिंताएं महत्वपूर्ण हैं। पत्र में उन्होंने किसी विश्वविद्यालय का नाम नहीं लिया और न ही सीधे तौर पर मौजूदा विवाद का जिक्र किया।
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एनएएलएसएआर के पूरे बैच का नामांकन रोकने पर हुआ था विवाद
यह पत्र एनएएलएसएआर और नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआईयू), बंगलूरू के छात्रों की आलोचना के बाद आया है। विवाद तब बढ़ा था, जब बीसीआई ने एनएएलएसएआर के 2026 बैच के पूरे बैच का नामांकन रोकने का निर्देश दिया था। दरअसल, कुछ छात्रों ने दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की भागीदारी पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद बीसीआई चेयरपर्सन की कार्रवाई पर सवाल उठे।
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सार्वजनिक विरोध के बाद बीसीआई चेयरपर्सन ने एनएएलएसएआर छात्रों के खिलाफ कार्रवाई वापस ले ली थी। हालांकि, बीसीआई की शक्तियों से आगे जाकर फैसला लेने के आरोपों को लेकर उनकी आलोचना जारी रही। मिश्रा की चिट्ठी की भाषा पर भी सवाल उठे थे। उन्होंने छात्रों के अभियान को 'घटिया राजनीति' बताया था। एनएएलएसएआर और एनएलएसआईयू के छात्रों तथा पूर्व छात्रों ने मिश्रा से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की थी। एनएलएसआईयू के छात्रों ने अपने दीक्षांत समारोह में मिश्रा की भागीदारी पर भी आपत्ति जताई थी।

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'किसी छात्र को आने या न आने के लिए मजबूर न किया जाए'
अपने तीन पन्नों के पत्र में मिश्रा ने दीक्षांत समारोहों को छात्रों के लिए बेहद खास अवसर बताया। उन्होंने कहा कि ये समारोह वर्षों की मेहनत के बाद होने वाले महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक होते हैं। उन्होंने कहा कि समारोह में शामिल होना है या नहीं, इसका फैसला आखिरकार छात्रों का होना चाहिए। मिश्रा ने कहा, 'किसी छात्र को शामिल होने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए और किसी छात्र को शामिल न होने के लिए भी मजबूर महसूस नहीं कराया जाना चाहिए।' 

'मतभेद बातचीत और सम्मान से सुलझने चाहिए'
बीसीआई चेयरपर्सन ने कहा कि न्यायपालिका, बार, विश्वविद्यालयों और कानून छात्रों के बीच संबंध किसी अस्थायी विवाद से कहीं ज्यादा गहरे और स्थायी हैं। उन्होंने कहा कि मतभेदों का समाधान बातचीत, स्पष्टीकरण और आपसी सम्मान के जरिए होना चाहिए। मिश्रा ने दोहराया कि बीसीआई कानून छात्रों को भविष्य के कानूनी पेशे का हिस्सा मानता है। उन्होंने कहा कि छात्रों की गरिमा, स्वतंत्र सोच और जायज चिंताओं का सम्मान किया जाना चाहिए।
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