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युद्ध से साइबर सुरक्षा तक: रक्षामंत्री ने बताया क्यों जरूरी है सैन्य-सिविल समन्वय? किसे बताया भारत की ताकत

Mon, 03 Aug 2026 06:50 PM IST
प्रशांत तिवारी आईएएनएस, नई दिल्ली
आईएएनएस, नई दिल्ली Published by: प्रशांत तिवारी Updated Mon, 03 Aug 2026 06:50 PM IST
सार

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत के मजबूत रक्षा तंत्र के लिए सैन्य और सिविल विभागों के बीच गहरा समन्वय बेहद आवश्यक है। उन्होंने संयुक्त प्रशिक्षण, क्रॉस-एक्सपोज़र, तकनीकी सहयोग और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि दोनों की संयुक्त विशेषज्ञता ही देश की रक्षा क्षमता को नई मजबूती दे सकती है।

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From warfare to cybersecurity Defence Minister Rajnath Singh explain why civil military coordination essential
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को रक्षा मंत्रालय के सैन्य और सिविल विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि मजबूत डिफेंस इकोसिस्टम के लिए दोनों के बीच तालमेल और अधिक गहरा होना चाहिए। दिल्ली में आयोजित 85वें आर्म्ड फोर्सेज़ हेडक्वार्टर सिविलियन सर्विसेज़ डे समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वर्दीधारी और सिविल सेवाओं का साझा उद्देश्य केवल एक है'राष्ट्र प्रथम'।

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कैसे बनेगा मजबूत डिफेंस इकोसिस्टम?
राजनाथ सिंह ने कहा कि जब रक्षा मंत्रालय के सैन्य और सिविल विभाग एक ही लक्ष्य के साथ काम करते हैं, तो व्यवस्था का हर हिस्सा देश की शक्ति को बढ़ाने का माध्यम बन जाता है। उन्होंने कहा कि दोनों के बीच बेहतर समन्वय से सुरक्षा और तकनीक से जुड़ी उभरती चुनौतियों का अधिक प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकेगा। साथ ही संस्थागत अनुभव, प्रशासनिक स्थिरता तथा नियमों और कानूनों का बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित होगा।
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क्यों जरूरी है सैन्य और प्रशासनिक समन्वय?
रक्षा मंत्री ने कहा कि सैन्य और प्रशासनिक व्यवस्था अलग-अलग रास्तों पर नहीं चल सकती। नीति निर्माण, प्रशासन, मानव संसाधन प्रबंधन, वित्तीय प्रक्रियाएं, लॉजिस्टिक्स और संस्थागत ज्ञान जैसे सभी क्षेत्रों में निरंतरता और विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। ऐसे में दोनों विभागों का एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करना समय की मांग है।
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क्रॉस-एक्सपोजर और संयुक्त प्रशिक्षण से क्या होगा फायदा?
राजनाथ सिंह ने सैन्य और सिविल अधिकारियों के बीच व्यवस्थित क्रॉस-एक्सपोज़र यानी एक-दूसरे के कार्यों को समझने के अवसर बढ़ाने की वकालत की। उन्होंने सुझाव दिया कि दोनों के लिए संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम और विकासात्मक असाइनमेंट आयोजित किए जाएं, ताकि वे एक-दूसरे के अनुभवों से सीख सकें और बेहतर समन्वय स्थापित कर सकें।

सैन्य और सिविल अधिकारियों की भूमिका कैसे एक-दूसरे को मजबूत करती है?
उन्होंने कहा कि सैन्य अधिकारी अपने साथ ऑपरेशनल अनुभव, नेतृत्व क्षमता और युद्ध संबंधी समझ लेकर आते हैं, जबकि सिविल अधिकारी प्रशासनिक निरंतरता, नीति निर्माण का अनुभव, सरकारी प्रक्रियाओं की गहरी समझ और संस्थागत ज्ञान के माध्यम से योगदान देते हैं। जब ये दोनों क्षमताएं साथ आती हैं, तो निर्णय अधिक संतुलित, जानकारीपूर्ण और प्रभावी बनते हैं। 

साइबर वॉरफेयर में सिविल विशेषज्ञों की क्या भूमिका हो सकती है?
साइबर युद्ध का उदाहरण देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि यदि आर्म्ड फोर्सेज हेडक्वार्टर सिविलियन सर्विसेज़ के अधिकारी अपनी विशेषज्ञता का उपयोग कर रक्षा क्षेत्र के लिए साझा साइबर टूल विकसित करें, तो इससे सशस्त्र बलों की क्षमता और दक्षता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

AFHQ सिविलियन सर्विसेज़ से क्या अपेक्षा जताई गई?
राजनाथ सिंह ने अधिकारियों से कहा कि वे रक्षा क्षेत्र की व्यापक समझ विकसित करें और भारत के रक्षा प्रबंधन ढांचे का 'रणनीतिक मस्तिष्क' बनने की दिशा में कार्य करें। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में उनकी भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने संयुक्त सचिव एवं मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के कार्यालय की कई डिजिटल पहलों तथा संशोधित विजन और मिशन स्टेटमेंट का शुभारंभ किया।


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'संवाद' पत्रिका और पुरस्कार वितरण में क्या खास रहा?
राजनाथ सिंह ने 'संवाद' पत्रिका का 34वां अंक भी जारी किया। इस अंक में सर्विस हेडक्वार्टर और इंटर-सर्विस ऑर्गनाइजेशन में कार्यरत विभिन्न रैंकों के कर्मचारियों द्वारा लिखे गए यात्रा-वृत्तांत, निबंध, लेख और कविताएं शामिल हैं। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कर्मचारियों को खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया। साथ ही उन कर्मचारियों के बच्चों को भी पुरस्कार प्रदान किए, जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया।

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