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गजेंद्र शेखावत: भारतीय सभ्यता विभिन्न आस्थाओं का संगम, इतिहास के पन्ने नहीं हटाए जा सकते

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Sandhya Kumari Updated Thu, 28 May 2026 02:54 PM IST
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सार

गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि भारत विभिन्न आस्थाओं और संस्कृतियों का संगम है। उन्होंने ताजमहल, खजुराहो और कैलाश मंदिर जैसी विरासतों को समान महत्व का बताया। शेखावत ने कहा कि इतिहास के पन्ने हटाए नहीं जा सकते और विवादित स्थलों पर अदालत के फैसलों का सम्मान होना चाहिए।

Gajendra Shekhawat Indian Civilization is a Confluence of Diverse Faiths Pages of History Cannot Be Erased
केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र शेखावत ने भारतीय सभ्यता को विभिन्न आस्थाओं का संगम बताया है। उन्होंने कहा कि इतिहास के पन्ने, चाहे उनका रंग कुछ भी हो, हटाए नहीं जा सकते। यह टिप्पणी उन्होंने बुधवार को पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में की। उनकी यह बात ऐसे समय में आई है जब कुछ दक्षिणपंथी संगठन हिंदू सभ्यता और पहचान पर जोर दे रहे हैं।

भारत की सभ्यता का इतिहास 10 हजार साल पुराना

शेखावत ने कहा, भारतीय सभ्यता विभिन्न आस्थाओं का संगम है, और इतिहास के पन्ने, चाहे उनका रंग कुछ भी हो, हटाए नहीं जा सकते। उन्होंने कहा कि ये हमारी विरासत का हिस्सा हैं। मंत्री ने देश में बहुत सारे ऐतिहासिक स्थल होने के बारे में भी बताया। इनमें आठवीं सदी के एलोरा के कैलाश मंदिर, दसवीं सदी के खजुराहो मंदिर और बाद के इस्लामी निर्माण जैसे ताजमहल शामिल हैं। शेखावत ने कहा कि ये सभी भारत की सभ्यता के लिए समान महत्व रखते हैं। 

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उन्होंने बताया कि भारत की सभ्यता का इतिहास 10,000 साल से अधिक की निरंतरता का इतिहास है। समाज का एक वर्ग कई विवादित स्थलों को फिर से प्राप्त करने की मांग कर रहा है। हाल ही में, इंदौर उच्च न्यायालय की पीठ ने 15 मई को भोजशाला मंदिर-कमल मौला मस्जिद परिसर को हिंदू स्थल घोषित किया। शेखावत ने कहा कि कानूनी लंबित मामलों पर टिप्पणी करना अनुचित होगा। उन्होंने विवादित धार्मिक स्थलों को पर्यटन स्थल बनाने के सुझाव को भी खारिज कर दिया।

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इतिहास के पन्ने हटाए नहीं जा सकते

शेखावत ने कहा, विरासत हमारे लिए विरासत है, और वह समान रूप से मूल्यवान है। उन्होंने बताया कि इतिहास के पन्ने, चाहे उनका रंग कुछ भी हो, हटाए नहीं जा सकते। ये हमारी विरासत का उतना ही महत्वपूर्ण हिस्सा हैं जितना वैदिक काल की विरासत है। उन्होंने राखीगढ़ी या सनौली के प्रमुख विरासत स्थलों का भी जिक्र किया। संस्कृति मंत्री ने कहा कि भारत की पहचान उसकी विविधता और समावेशिता है। यह विभिन्न संस्कृतियों, आस्थाओं और विश्वासों का संगम है। इसी से एक भारत का निर्माण होता है।

विवादित स्थलों पर कोर्ट के निर्णय को माने

मंत्री ने कहा कि पहले तलवार की ताकत पर बदली गई जो चीजें सिद्ध हो जाती हैं, तो स्वीकार करना होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि हिंदू और अन्य समुदाय भी इस पर विचार करें। वे इसके महत्व और आस्था को समझें और निर्णय लें। भोजशाला आदेश का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने वैज्ञानिक साक्ष्य का अध्ययन किया। इस अध्ययन में कई साक्ष्य मिले कि भोजशाला पहले एक संस्कृत अनुसंधान केंद्र था। यह वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर भी था। शेखावत ने कहा कि अदालत के फैसले के बाद दोनों पक्षों को आपसी सहमति से आगे बढ़ना चाहिए।

भारत अलग-अलग संस्कृतियों का संगम

शेखावत ने विवादित धार्मिक स्थलों को पर्यटन स्थल बनाने के सुझाव को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया। उन्होंने सवाल किया कि क्या काशी विश्वनाथ मंदिर के बगल की संरचना को पर्यटन स्थल बनाया जा सकता है। उन्होंने मथुरा मंदिर के पास की संरचना का भी उदाहरण दिया। मंत्री ने कहा कि पूरा देश जानता है कि ये संरचनाएं क्यों, कब और किन परिस्थितियों में बनाई गईं। इन विवादों के बावजूद, शेखावत ने भारत की सांस्कृतिक पहचान की बहुलता को बनाए रखने की वकालत की। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी विविधता, समावेशिता और सांस्कृतिक पहचान है। यह विभिन्न संस्कृतियों, आस्थाओं, विश्वासों और सांस्कृतिक प्रथाओं का संगम है।


 
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