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High Court: यौन उत्पीड़न मामले में तरुण तेजपाल ने पीडिता के बयानों को बताया विरोधाभासी, क्या है पूरा मामला?
Thu, 16 Jul 2026 06:56 PM IST
अमन तिवारी
पीटीआई, पणजी
पीटीआई, पणजी
Published by: अमन तिवारी
Updated Thu, 16 Jul 2026 06:56 PM IST
सार
बॉम्बे हाई कोर्ट में तरुण तेजपाल के वकील ने पीड़िता के बयानों को विरोधाभासी बताया। उन्होंने होटल की लिफ्ट के वीडियो फुटेज का हवाला देकर पीड़िता के दावों को गलत ठहराया। अदालत साल 2021 में तेजपाल को बरी करने के खिलाफ सरकारी अपील पर सुनवाई कर रही है।
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बॉम्बे हाई कोर्ट
- फोटो : ANI
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विस्तार
तहलका पत्रिका के संस्थापक-संपादक तरुण तेजपाल ने बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ के सामने वर्ष 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में पीड़िता के बयानों को विरोधाभासी बताया है। गोवा के मापुसा की एक अदालत ने साल 2021 में तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। राज्य सरकार ने इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। न्यायमूर्ति डॉ. नीला गोखले और न्यायमूर्ति अमित जामसंडेकर की खंडपीठ ने गुरुवार को इस अपील पर अंतिम बहस सुनना शुरू किया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला साल 2013 का है। तरुण तेजपाल की एक पूर्व महिला सहयोगी ने उन पर गंभीर आरोप लगाए थे। महिला के अनुसार, गोवा में तहलका पत्रिका के एक कार्यक्रम के दौरान 7 और 8 नवंबर 2013 को होटल की लिफ्ट के अंदर उनका यौन उत्पीड़न किया गया था। सुनवाई के दौरान अदालत में होटल की लिफ्ट के वीडियो क्लिप भी चलाकर दिखाए गए। इस दौरान अदालत कक्ष में मौजूद लोगों के अलावा अन्य लोगों के देखने पर रोक लगाई गई थी।
बयानों में विरोधाभास का दावा
तेजपाल के वकील आबाद पोंडा ने पीड़िता के बयानों में अंतर की बात कही। उन्होंने जांच अधिकारी और अदालत के सामने दिए गए बयानों में विरोधाभास की ओर इशारा किया। वकील ने कहा कि पुलिस शिकायत में महिला ने लिफ्ट के भीतर दो मिनट के मानसिक तनाव की बात कही थी। महिला का दावा था कि आरोपी लगातार लिफ्ट के बटन दबा रहा था ताकि लिफ्ट चलती रहे और वह बाहर न निकल सके।
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तकनीकी विशेषज्ञों की राय
वकील पोंडा ने अदालत को बताया कि लिफ्ट विशेषज्ञों और होटल के सुरक्षा प्रभारी की गवाही ने महिला के इस दावे को गलत साबित किया है। उन्होंने कहा कि होटल की लिफ्ट इस तरह बनाई जाती हैं कि उनमें कोई फंस न सके। वीडियो फुटेज का हवाला देते हुए वकील ने तर्क दिया कि महिला का यह दावा भी गलत है कि उसे लिफ्ट में पीछे खींचा गया और उसके साथ बदसलूकी की गई। वीडियो में ऐसा कुछ नहीं दिख रहा है।
ये भी पढ़ें: ओडिशा: पुरी रथ यात्रा में भारी भीड़ से भगदड़ जैसी स्थिति, एक की मौत, कई श्रद्धालु अस्पताल में भर्ती
वीडियो फुटेज का हवाला
वकील ने अदालत में कहा कि सबूत दिखाते हैं कि लिफ्ट से उतरते समय तेजपाल महिला से आगे चल रहे थे। ऐसे में महिला का पीछा करने का कोई सवाल ही नहीं उठता। साल 2021 में निचली अदालत ने तेजपाल को बरी करते हुए कहा था कि पीड़िता का व्यवहार वैसा नहीं था जैसा आमतौर पर किसी पीड़ित का होता है। इस टिप्पणी की कई हलकों में आलोचना भी हुई थी। उच्च न्यायालय इस मामले में शुक्रवार को भी सुनवाई जारी रखेगा।
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क्या है पूरा मामला?
यह मामला साल 2013 का है। तरुण तेजपाल की एक पूर्व महिला सहयोगी ने उन पर गंभीर आरोप लगाए थे। महिला के अनुसार, गोवा में तहलका पत्रिका के एक कार्यक्रम के दौरान 7 और 8 नवंबर 2013 को होटल की लिफ्ट के अंदर उनका यौन उत्पीड़न किया गया था। सुनवाई के दौरान अदालत में होटल की लिफ्ट के वीडियो क्लिप भी चलाकर दिखाए गए। इस दौरान अदालत कक्ष में मौजूद लोगों के अलावा अन्य लोगों के देखने पर रोक लगाई गई थी।
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बयानों में विरोधाभास का दावा
तेजपाल के वकील आबाद पोंडा ने पीड़िता के बयानों में अंतर की बात कही। उन्होंने जांच अधिकारी और अदालत के सामने दिए गए बयानों में विरोधाभास की ओर इशारा किया। वकील ने कहा कि पुलिस शिकायत में महिला ने लिफ्ट के भीतर दो मिनट के मानसिक तनाव की बात कही थी। महिला का दावा था कि आरोपी लगातार लिफ्ट के बटन दबा रहा था ताकि लिफ्ट चलती रहे और वह बाहर न निकल सके।
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तकनीकी विशेषज्ञों की राय
वकील पोंडा ने अदालत को बताया कि लिफ्ट विशेषज्ञों और होटल के सुरक्षा प्रभारी की गवाही ने महिला के इस दावे को गलत साबित किया है। उन्होंने कहा कि होटल की लिफ्ट इस तरह बनाई जाती हैं कि उनमें कोई फंस न सके। वीडियो फुटेज का हवाला देते हुए वकील ने तर्क दिया कि महिला का यह दावा भी गलत है कि उसे लिफ्ट में पीछे खींचा गया और उसके साथ बदसलूकी की गई। वीडियो में ऐसा कुछ नहीं दिख रहा है।
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वीडियो फुटेज का हवाला
वकील ने अदालत में कहा कि सबूत दिखाते हैं कि लिफ्ट से उतरते समय तेजपाल महिला से आगे चल रहे थे। ऐसे में महिला का पीछा करने का कोई सवाल ही नहीं उठता। साल 2021 में निचली अदालत ने तेजपाल को बरी करते हुए कहा था कि पीड़िता का व्यवहार वैसा नहीं था जैसा आमतौर पर किसी पीड़ित का होता है। इस टिप्पणी की कई हलकों में आलोचना भी हुई थी। उच्च न्यायालय इस मामले में शुक्रवार को भी सुनवाई जारी रखेगा।