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IT नियमों में बदलाव: AI कंटेंट की लेबलिंग अनिवार्य, गैरकानूनी सामग्री हटाने की समयसीमा घटकर अब तीन घंटे हुई
Thu, 06 Aug 2026 06:46 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: राहुल कुमार
Updated Thu, 06 Aug 2026 06:46 PM IST
सार
सरकार ने एआई से बनने वाले डीपफेक पर शिकंजा कसने के लिए आईटी नियमों को और सख्त कर दिया है। अब एआई से तैयार सामग्री पर स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य होगा और गैरकानूनी सामग्री को हटाने की समयसीमा 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे कर दी गई है। क्या इन नए नियमों से सोशल मीडिया पर फैलने वाले फर्जी वीडियो, ऑडियो और तस्वीरों पर प्रभावी रोक लग पाएगी? आइए, विस्तार से जानते हैं कि नियमों क्या-कुछ बदलाव हुए हैं...
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एआई कंटेंट पर सरकार का बड़ा एक्शन
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
भारत सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से तैयार होने वाली डीपफेक सामग्री और फर्जी डिजिटल कंटेंट पर नियंत्रण के लिए आईटी नियमों को और सख्त कर दिया है। नए संशोधनों के तहत अब एआई से तैयार किसी भी सामग्री पर स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य होगा, ताकि लोग आसानी से पहचान सकें कि वह वास्तविक है या कृत्रिम रूप से बनाई गई है। इसके साथ ही सरकार या अदालत के आदेश मिलने पर गैरकानूनी सामग्री हटाने की समयसीमा 36 घंटे से घटाकर केवल 3 घंटे कर दी गई है। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य इंटरनेट को अधिक सुरक्षित, भरोसेमंद और जवाबदेह बनाना है।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में बताया कि सरकार डीपफेक से जुड़े बढ़ते खतरों को गंभीरता से ले रही है। डीपफेक में केवल फर्जी वीडियो ही नहीं, बल्कि एआई से तैयार ऑडियो, तस्वीरें और लिखित सामग्री भी शामिल हैं। इन्हें रोकने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत कानूनी और तकनीकी ढांचे को मजबूत किया गया है।
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केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में बताया कि सरकार डीपफेक से जुड़े बढ़ते खतरों को गंभीरता से ले रही है। डीपफेक में केवल फर्जी वीडियो ही नहीं, बल्कि एआई से तैयार ऑडियो, तस्वीरें और लिखित सामग्री भी शामिल हैं। इन्हें रोकने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत कानूनी और तकनीकी ढांचे को मजबूत किया गया है।
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नए आईटी नियमों में क्या-क्या बदला?
- एआई कंटेंट पर लेबल अनिवार्य... एआई से तैयार सामग्री पर स्पष्ट लेबल और पहचान योग्य मेटाडेटा देना होगा।
- उपयोगकर्ताओं को जानकारी देना जरूरी... प्लेटफॉर्म को सुनिश्चित करना होगा कि लोग आसानी से पहचान सकें कि कंटेंट एआई से बनाया गया है।
- तकनीकी निगरानी बढ़ेगी... गैरकानूनी एआई सामग्री के निर्माण, प्रकाशन और प्रसार को रोकने के लिए तकनीकी उपाय अपनाने होंगे।
- डीपफेक पर सख्ती... प्रतिरूपण (इम्पर्सनेशन) और भ्रामक एआई सामग्री पर तुरंत कार्रवाई करनी होगी।
- बाल यौन शोषण सामग्री पर रोक... ऐसी एआई-जनित सामग्री की पहचान कर उसे तत्काल हटाना अनिवार्य होगा।
- बिना सहमति की अंतरंग तस्वीरों पर कार्रवाई... गैर-सहमति से साझा की गई अंतरंग तस्वीरों या वीडियो पर तुरंत कार्रवाई करनी होगी।
- सोशल मीडिया की जवाबदेही बढ़ी... प्लेटफॉर्म को कानून के अनुरूप उचित सावधानी बरतनी होगी और अनुपालन सुनिश्चित करना होगा।
- स्वचालित निगरानी तंत्र... बड़े सोशल मीडिया मंचों को हानिकारक एआई सामग्री की पहचान के लिए स्वचालित उपकरण या अन्य तकनीकी व्यवस्था लागू करनी होगी।
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सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी कितनी बढ़ गई?
आईटी नियमों के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को अपने उपयोगकर्ताओं को स्पष्ट रूप से बताना होगा कि फर्जी पहचान, भ्रामक जानकारी, हिंसा, अश्लील सामग्री, बच्चों को नुकसान पहुंचाने वाली पोस्ट या एआई के जरिए किसी का रूप धारण करना कानून का उल्लंघन है। 50 लाख या उससे अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ताओं वाले बड़े सोशल मीडिया मंचों को शिकायत अधिकारी नियुक्त करना, नियमित अनुपालन रिपोर्ट जारी करना, भारत में स्थानीय अधिकारियों की नियुक्ति करना और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय बनाए रखना होगा। इसके अलावा गंभीर मामलों में जांच एजेंसियों को आवश्यक तकनीकी सहयोग भी देना होगा।| प्रावधान | नई व्यवस्था |
|---|---|
| एआई कंटेंट | स्पष्ट लेबल और मेटाडेटा अनिवार्य |
| गैरकानूनी सामग्री हटाने की समयसीमा | 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे |
| संवेदनशील शिकायतों का निपटारा | 72 घंटे से घटाकर 36 घंटे |
| अत्यंत संवेदनशील मामलों में कार्रवाई | 24 घंटे से घटाकर 2 घंटे |
| बड़े सोशल मीडिया मंच | शिकायत अधिकारी, अनुपालन रिपोर्ट और स्थानीय अधिकारी अनिवार्य |
| शिकायत दर्ज करने का माध्यम | नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल और हेल्पलाइन 1930 |