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Great Nicobar Project: 'भारत के भू-राजनीतिक विस्तार से परेशान हैं राहुल गांधी', कांग्रेस नेता पर BJP का पलटवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 05 Jun 2026 04:11 PM IST
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सार
Great Nicobar Project: भाजपा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर ग्रेट निकोबार परियोजना की आलोचना को लेकर पलटवार करते हुए कहा कि वे भारत के बढ़ते भू-राजनीतिक प्रभाव से परेशान हैं। राहुल गांधी ने एक वीडियो बयान में इसे पर्यावरण और आदिवासी समुदायों के लिए खतरा बताया है। पढ़िए रिपोर्ट-
तुहिन सिन्हा, भाजपा प्रवक्ता
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एक्स/भाजपा
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विस्तार
ग्रेट निकोबार विकास परियोजना की आलोचना करने पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर पलटवार किया। भाजपा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी भारत के बढ़ते भू-राजनीतिक प्रभाव से 'परेशान' हैं। वह भारत के बजाय अन्य देशों को अधिक ताकतवर देखना चाहते हैं। सत्तारूढ़ पार्टी की ओर से यह टिप्पणी शुक्रवार को विश्व पर्यावरण दिवस पर राहुल गांधी के बयान के बाद आई।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 16 मिनट से अधिक का एक वीडियो बयान पोस्ट किया। इसमें उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार के तर्क को 'झूठ' बताया। उन्होंने कहा कि ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना रक्षा और पारगमन बंदरगाह के बारे में नहीं है, बल्कि यह एक कारोबारी को लाभ पहुंचाने के लिए है, ताकि वह भारत की सबसे अहम पारिस्थितिक भूमि पर होटल और कसीनो बना सके।
वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने कहा कि ग्रेट निकोबार परियोजना की परिकल्पना 1970 के दशक की गई है। उन्होंने कांग्रेस पर दशकों पहले ऐसी 'भविष्योन्मुखी' परियोजनाओं की कल्पना करने के बावजूद उन्हें लागू करने में विफल रहने का आरोप लगाया। सिन्हा ने कहा, अगर कांग्रेस केवल ऐसी परियोजनाओं की कल्पना कर सकती थी, लेकिन उन्हें लागू करने में असमर्थ थी, तो यह निश्चित रूप से हमारी गलती नहीं है।
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परियोजना का सामरिक महत्व
सिन्हा ने कहा कि इस परियोजना के बनने से भारत की मौजूदगी हिंद महासागर में और दक्षिण की ओर करीब 400 किलोमीटर तक बढ़ जाएगी। ग्रेट निकोबार द्वीप के दक्षिणी हिस्से में बनने वाला बंदरगाह मलक्का जलडमरूमध्य के बहुत करीब होगा, जो दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। दुनिया का लगभग 30% समुद्री व्यापार इसी मार्ग से होकर गुजरता है। इसलिए अगर भारत का एक बड़ा बंदरगाह इसके पास होगा, तो वहां से गुजरने वाले जहाजों को सेवाएं देने, माल उतारने-चढ़ाने और व्यापार बढ़ाने में काफी फायदा होगा। सिन्हा ने ग्रेट निकोबार द्वीप के भू-रणनीतिक महत्व पर भी जोर दिया।
पर्यावरण और आदिवासी समुदायों की चिंता
राहुल गांधी ने चिंता जताई थी कि इस परियोजना से वहां रहने वाले आदिवासी (स्वदेशी) समुदायों और द्वीप के नाजुक पारिस्थितिकीतंत्र को नुकसान पहुंच सकता है। इस पर सिन्हा ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अभी ग्रेट निकोबार द्वीप की केवल लगभग 10% जमीन का ही इस्तेमाल हो रहा है। आने वाले 20 वर्षों में यहां चरणबद्ध तरीके से करीब 3.5 लाख से 4 लाख लोगों को बसाने की योजना है। उन्होंने यह भी कहा कि इस विकास कार्य के दौरान पर्यावरण और प्राकृतिक संतुलन से जुड़ी चिंताओं का ध्यान रखा जाएगा।
ये भी पढ़ें: अरुणाचल प्रदेश में चार उच्चस्तरीय समितियां गठित, घुसपैठ, जनजातीय सुरक्षा की करेगी जांच
सिन्हा ने जोर देकर कहा कि भारत केवल इसलिए भविष्य की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को नहीं छोड़ सकता, क्योंकि उनमें आदिवासी क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने कहा, यदि ऐसे तर्क को सार्वभौमिक रूप से लागू किया जाता है, तो आदिवासी क्षेत्रों से गुजरने वाली कई प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाएं बंद करनी होंगी।
कांग्रेस पर आरोप और एनजीटी की मंजूरी
भाजपा नेता ने परियोजना को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की ओर से दी गई मंजूरी का भी हवाला दिया। सिन्हा ने कहा, यदि एनजीटी ने परियोजना को मंजूरी दी है, तो यह स्पष्ट है कि सभी चिंताओं की सावधानीपूर्वक जांच की गई है। सिन्हा ने कांग्रेस पर ऐतिहासिक रूप से भारत के रणनीतिक हितों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी दल पर्यावरणीय चिंताओं की तुलना में भारत के भू-राजनीतिक विस्तार से अधिक परेशान है। सिन्हा ने कहा कि कुछ लोग या तो इस परियोजना की अहमियत को समझ नहीं रहे हैं या फिर वे भारत की तुलना में अन्य देशों को अधिक ताकतवर के रूप में उभरते हुए देखना चाहते हैं।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 16 मिनट से अधिक का एक वीडियो बयान पोस्ट किया। इसमें उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार के तर्क को 'झूठ' बताया। उन्होंने कहा कि ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना रक्षा और पारगमन बंदरगाह के बारे में नहीं है, बल्कि यह एक कारोबारी को लाभ पहुंचाने के लिए है, ताकि वह भारत की सबसे अहम पारिस्थितिक भूमि पर होटल और कसीनो बना सके।
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वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने कहा कि ग्रेट निकोबार परियोजना की परिकल्पना 1970 के दशक की गई है। उन्होंने कांग्रेस पर दशकों पहले ऐसी 'भविष्योन्मुखी' परियोजनाओं की कल्पना करने के बावजूद उन्हें लागू करने में विफल रहने का आरोप लगाया। सिन्हा ने कहा, अगर कांग्रेस केवल ऐसी परियोजनाओं की कल्पना कर सकती थी, लेकिन उन्हें लागू करने में असमर्थ थी, तो यह निश्चित रूप से हमारी गलती नहीं है।
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परियोजना का सामरिक महत्व
सिन्हा ने कहा कि इस परियोजना के बनने से भारत की मौजूदगी हिंद महासागर में और दक्षिण की ओर करीब 400 किलोमीटर तक बढ़ जाएगी। ग्रेट निकोबार द्वीप के दक्षिणी हिस्से में बनने वाला बंदरगाह मलक्का जलडमरूमध्य के बहुत करीब होगा, जो दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। दुनिया का लगभग 30% समुद्री व्यापार इसी मार्ग से होकर गुजरता है। इसलिए अगर भारत का एक बड़ा बंदरगाह इसके पास होगा, तो वहां से गुजरने वाले जहाजों को सेवाएं देने, माल उतारने-चढ़ाने और व्यापार बढ़ाने में काफी फायदा होगा। सिन्हा ने ग्रेट निकोबार द्वीप के भू-रणनीतिक महत्व पर भी जोर दिया।
पर्यावरण और आदिवासी समुदायों की चिंता
राहुल गांधी ने चिंता जताई थी कि इस परियोजना से वहां रहने वाले आदिवासी (स्वदेशी) समुदायों और द्वीप के नाजुक पारिस्थितिकीतंत्र को नुकसान पहुंच सकता है। इस पर सिन्हा ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अभी ग्रेट निकोबार द्वीप की केवल लगभग 10% जमीन का ही इस्तेमाल हो रहा है। आने वाले 20 वर्षों में यहां चरणबद्ध तरीके से करीब 3.5 लाख से 4 लाख लोगों को बसाने की योजना है। उन्होंने यह भी कहा कि इस विकास कार्य के दौरान पर्यावरण और प्राकृतिक संतुलन से जुड़ी चिंताओं का ध्यान रखा जाएगा।
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सिन्हा ने जोर देकर कहा कि भारत केवल इसलिए भविष्य की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को नहीं छोड़ सकता, क्योंकि उनमें आदिवासी क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने कहा, यदि ऐसे तर्क को सार्वभौमिक रूप से लागू किया जाता है, तो आदिवासी क्षेत्रों से गुजरने वाली कई प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाएं बंद करनी होंगी।
कांग्रेस पर आरोप और एनजीटी की मंजूरी
भाजपा नेता ने परियोजना को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की ओर से दी गई मंजूरी का भी हवाला दिया। सिन्हा ने कहा, यदि एनजीटी ने परियोजना को मंजूरी दी है, तो यह स्पष्ट है कि सभी चिंताओं की सावधानीपूर्वक जांच की गई है। सिन्हा ने कांग्रेस पर ऐतिहासिक रूप से भारत के रणनीतिक हितों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी दल पर्यावरणीय चिंताओं की तुलना में भारत के भू-राजनीतिक विस्तार से अधिक परेशान है। सिन्हा ने कहा कि कुछ लोग या तो इस परियोजना की अहमियत को समझ नहीं रहे हैं या फिर वे भारत की तुलना में अन्य देशों को अधिक ताकतवर के रूप में उभरते हुए देखना चाहते हैं।