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Gujarat Riots: नरोदा गाम दंगे में आज आ सकता है फैसला, 11 लोगों की गई थी जान, 18 आरोपियों की हो चुकी है मौत

Thu, 20 Apr 2023 07:58 AM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद Published by: गुलाम अहमद Updated Thu, 20 Apr 2023 07:58 AM IST
सार

साल 2002 में हुए दंगों में 11 लोग मारे गए थे। मामले में 86 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज है। हालांकि, 86 में से अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है। विशेष जस्टिस एसके बक्शी की अदालत 68 आरोपियों के खिलाफ फैसला सुनाएगी।

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Gujarat Riots 2002 Naroda Gam Massacre Case Verdict Likely Today Maya Kodnani Babu Bajrangi among accused
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

गुजरात के नरोदा गाम दंगे मामले में अहमदाबाद की एक विशेष कोर्ट आज फैसला सुना सकती है। विशेष जस्टिस एसके बक्शी की अदालत 68 आरोपियों के खिलाफ फैसला सुनाएगी। 28 फरवरी, 2002 को अहमदाबाद शहर के नरोदा गाम इलाके में सांप्रदायिक हिंसा में 11 लोग मारे गए थे। इस मामले में 86 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज है। हालांकि, 86 में से अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है।  गुजरात की पूर्व मंत्री और भाजपा नेता माया कोडनानी और बजरंग दल के नेता बाबू बजरंगी भी 86 आरोपियों में शामिल हैं, जिन पर मुकदमा चल रहा है।
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विशेष अभियोजक सुरेश शाह ने कहा कि अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष ने 2010 में शुरू हुए मुकदमे के दौरान क्रमशः 187 और 57 गवाहों का परीक्षण किया और लगभग 13 साल तक चले इस मामले में छह न्यायाधीश सुनवाई कर चुके हैं।सितंबर 2017 में, भाजपा के वरिष्ठ नेता (अब केंद्रीय गृह मंत्री) अमित शाह भाजपा नेता माया कोडनानी के बचाव पक्ष के गवाह के रूप में अदालत के समक्ष पेश हुए थे। कोडनानी ने अदालत से अनुरोध किया था कि उन्हें यह साबित करने के लिए बुलाया जाए कि घटना के दिन वह गुजरात विधानसभा में और बाद में सोला सिविल अस्पताल में मौजूद थीं, न कि नरोडा गाम में, जहां नरसंहार हुआ था।
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अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए सबूतों में पत्रकार आशीष खेतान द्वारा किए गए एक स्टिंग ऑपरेशन का वीडियो और उस दौरान कोडनानी, बजरंगी और अन्य के कॉल विवरण शामिल हैं। जब यह मुकदमा शुरू हुआ, एसएच वोरा पीठासीन न्यायाधीश थे। बाद में उन्हें गुजरात हाईकोर्ट में पदोन्नत किया गया था। उनके उत्तराधिकारी ज्योत्सना याग्निक, केके भट्ट और पीबी देसाई ट्रायल के दौरान सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
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गौरतलब है कि 27 फरवरी 2002 को कारसेवकों से भरी एक ट्रेन अयोध्या से लौट रही थी, जिसपर हमला कर दिया गया था। गोधरा ट्रेन कांड में 58 कारसेवकों की मौत हो गई थी। इसके एक दिन बाद अहमदाबाद शहर के नरोदा गाम इलाके में हिंसा हो गई थी।
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