केरल में मौसम का रेड अलर्ट: बारिश-भूस्खलन से छह की मौत, प्रभावित इलाकों में रेस्क्यू; CM ने क्या दिए निर्देश?
केरल में मानसून ने एक बार फिर विकराल रूप धारण कर लिया है। राज्य के कई हिस्सों में शनिवार को हुई मूसलाधार बारिश ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण कई जगहों पर भयानक भूस्खलन हुए, नदियां और बांध उफान पर हैं, और निचले इलाकों में भारी जलभराव हो गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक, इस आपदा में अब तक छह लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई लोग लापता हैं।
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#WATCH | Kannur, Keralam | Heavy rainfall triggers rising water levels at Pazhassi Dam, as authorities remove construction materials from the river. pic.twitter.com/CCnTgdZE4Z
— ANI (@ANI) August 1, 2026विज्ञापन
जिलेवार स्थिति और जान-माल का नुकसान
सबसे अधिक नुकसान मध्य और पहाड़ी जिलों में देखने को मिला है। इडुक्की, कोट्टायम, पथानमिट्टा और कोझिकोड जिलों में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर है।- इडुक्की और कोट्टायम: इडुक्की के कुदायथूर के पास अडूरमाला में भूस्खलन की चपेट में आने से सुमति (65) नामक महिला की मौत हो गई, जबकि उनके पति और बेटा घायल हो गए। वहीं, कोट्टायम के पूंजर और वागामोन क्षेत्रों में भी भूस्खलन से जनहानि की खबर है।
- पथानमिट्टा और पम्पा नदी का उफान: पम्पा नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से रन्नी, कोझेनचेरी और अरणमुला के कई इलाके जलमग्न हो गए हैं और मुख्य मार्गों से संपर्क कट गया है। फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए प्रशासन ने विशेष नौकाएं तैनात की हैं।
- रिकॉर्ड तोड़ बारिश: कोझिकोड के अनाक्कमपॉयल क्षेत्र में पिछले 35 घंटों में 340 मिलीमीटर और वायनाड के मेप्पाडी में 177 मिलीमीटर भारी बारिश दर्ज की गई है।
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राहत शिविर और सरकारी सहायता
मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने स्थिति की उच्चस्तरीय समीक्षा की है और प्रभावित जिलों के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। राज्य भर में कुल 65 राहत शिविर खोले गए हैं, जिनमें वर्तमान में 1,465 लोगों को सुरक्षित आश्रय दिया गया है। जरूरत पड़ने पर और अधिक लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर स्थानांतरित करने के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 17 मकान पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं, जबकि 127 घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। कोट्टायम के पाला में एक पोल्ट्री फार्म में पानी घुसने से लगभग 2,500 मुर्गियों की मौत हो गई। सरकार ने घोषणा की है कि आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों, घर खोने वाले परिवारों और अपनी आजीविका गंवा चुके किसानों व व्यापारियों को पर्याप्त वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। घायलों के मुफ्त और बेहतरीन इलाज के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
मंत्रियों ने संभाला मोर्चा और आपदा प्रबंधन
स्थिति से निपटने के लिए मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को सीधे मैदान में उतरने का निर्देश दिया है। मंत्रियों को अपने-अपने प्रभार वाले जिलों में कैंप करने को कहा गया है-
- सीपी जॉन- तिरुवनंतपुरम
- पीसी विष्णुनाथ- पथानमिट्टा
- मॉन्स जोसेफ- कोट्टायम
- अनूप जैकब- इडुक्की
മഴക്കെടുതിയുടെ പശ്ചാത്തലത്തില് റവന്യൂ മന്ത്രിയുമായും ജില്ലകളുടെ ഏകോപന ചുമതലയുള്ള മന്ത്രിമാരുമായും ജില്ലാ ഭരണകൂടങ്ങളുമായും നിരന്തരം ആശയവിനിമയം നടത്തുന്നുണ്ട്. മഴക്കെടുതി രൂക്ഷമായ മേഖലകളിലെ എം.എല്.എമാരുമായും ജനപ്രതിനിധികളുമായും സംസാരിച്ചു.
— V D Satheesan (@vdsatheesan) August 1, 2026
വൈകിട്ട് ആറ് മണി വരെ ആറ് മരണങ്ങള്… pic.twitter.com/yGq36pnrSZ
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बांधों के गेट खुले और मौसम विभाग का 'रेड अलर्ट'
बढ़ते जलस्तर को देखते हुए तिरुवनंतपुरम, पथानमिट्टा, इडुक्की, एर्नाकुलम, त्रिशूर और कन्नूर जिलों के कई बांधों के गेट एहतियात के तौर पर खोल दिए गए हैं। अलप्पुझा में थोट्टापल्ली स्पिलवे के गेट भी खोले गए हैं ताकि बाढ़ के खतरे को टाला जा सके। एर्नाकुलम, अलप्पुझा, कोझिकोड, कन्नूर और कासरगोड के तटीय इलाकों में समुद्र की लहरों के तटों की ओर बढ़ने की खबरें हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने पथानमिट्टा, कोट्टायम, इडुक्की, मलप्पुरम, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड जिलों के लिए 'रेड अलर्ट' जारी किया है, जिसका अर्थ है कि 24 घंटों में 204 मिलीमीटर से अधिक की अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। वहीं, एर्नाकुलम, त्रिशूर और पलक्कड़ के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' घोषित किया गया है। एहतियात के तौर पर कई जिलों में शैक्षणिक संस्थानों में अवकाश घोषित कर दिया गया है। राज्य सरकार ने जनता से अपील की है कि वे पूरी तरह सतर्क रहें और प्रशासन तथा आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें।